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MP LS Election: BJP घर-घर पहुंचने लगी तो कांग्रेस भगदड़ में उलझी, जानिए मप्र में किस पार्टी की क्या तैयारी?
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सार
चुनाव आयोग ने शनिवार को लोकसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया है। देशभर में सात चरणों में तो, मध्य प्रदेश में चार चरणों में चुनाव होना हैं। चार जून को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा-कांग्रेस भी तैयार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लोकसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों के लिए चार चरणों में चुनाव होंगे। बात करें कि राजनीतिक दलों की तैयारियों की तो भाजपा काफी आगे नजर आ रही है। भाजपा घरों में दस्तक देने लगी है तो कांग्रेस पार्टी में मची भगदड़ रोकने और अपने प्रत्याशियों को तलाशने ही व्यस्त दिख रही है। वहीं समाजवादी पार्टी को कांग्रेस ने एक सीट दी है, जहां सपा की कोई तैयारी फिलहाल नजर नहीं आ रही।
सबसे पहले जानते हैं मप्र में कब-कब हैं चुनाव
बता दें कि चुनाव आयोग ने शनिवार को लोकसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया है। देशभर में सात चरणों में तो, मध्य प्रदेश में चार चरणों में चुनाव होना हैं। पहले चरण की वोटिंग 19 अप्रैल को होगी। इसमें छह सीटों पर मतदान होगा। दूसरे चरण का मतदान 26 अप्रैल को होना है। इस चरण में सात सीटों पर वोटिंग होगी। तीसरे चरण में 7 मई को वोटिंग होगी। इस चरण में आठ लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। चौथे चरण का मतदान 13 मई होगा। इस चरण में आठ सीटों पर वोट डाले जाएंगे। चार जून को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
टिकट वितरण की स्थिति भी समझ लीजिए
भाजपा ने प्रदेश की सभी 29 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। जबकि कांग्रेस ने 10 सीटों पर टिकट डिक्लेयर किए हैं। कांग्रेस प्रदेश की 28 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। एक सीट खजुराहो समझौते के तहत समाजवादी पार्टी को दे ही है। कांग्रेस को कुछ सीटों पर प्रत्याशी चयन में ही दिक्कत आ रही है। बड़े नेता अब तक राज्य में संगठनात्मक रूप से सक्रिय कम ही दिखे हैं। भाजपा ने अपने लोकसभा समन्वयकों को हर लोकसभा में भेजकर आकलन किया। कांग्रेस ने भी प्रत्याशियों की लिस्ट तो तैयार की, लेकिन नाम घोषित नहीं किए। लक्ष्मण सिंह से लेकर तमाम बड़े नेता सवाल उठा रहे हैं कि नाम घोषित करने में देरी क्यों...
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सबसे पहले जानते हैं मप्र में कब-कब हैं चुनाव
बता दें कि चुनाव आयोग ने शनिवार को लोकसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया है। देशभर में सात चरणों में तो, मध्य प्रदेश में चार चरणों में चुनाव होना हैं। पहले चरण की वोटिंग 19 अप्रैल को होगी। इसमें छह सीटों पर मतदान होगा। दूसरे चरण का मतदान 26 अप्रैल को होना है। इस चरण में सात सीटों पर वोटिंग होगी। तीसरे चरण में 7 मई को वोटिंग होगी। इस चरण में आठ लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। चौथे चरण का मतदान 13 मई होगा। इस चरण में आठ सीटों पर वोट डाले जाएंगे। चार जून को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
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टिकट वितरण की स्थिति भी समझ लीजिए
भाजपा ने प्रदेश की सभी 29 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। जबकि कांग्रेस ने 10 सीटों पर टिकट डिक्लेयर किए हैं। कांग्रेस प्रदेश की 28 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। एक सीट खजुराहो समझौते के तहत समाजवादी पार्टी को दे ही है। कांग्रेस को कुछ सीटों पर प्रत्याशी चयन में ही दिक्कत आ रही है। बड़े नेता अब तक राज्य में संगठनात्मक रूप से सक्रिय कम ही दिखे हैं। भाजपा ने अपने लोकसभा समन्वयकों को हर लोकसभा में भेजकर आकलन किया। कांग्रेस ने भी प्रत्याशियों की लिस्ट तो तैयार की, लेकिन नाम घोषित नहीं किए। लक्ष्मण सिंह से लेकर तमाम बड़े नेता सवाल उठा रहे हैं कि नाम घोषित करने में देरी क्यों...
लोकसभा चुनाव 2024
- फोटो : अमर उजाला
पहले समझते हैं भाजपा की तैयारियां
प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद से ही लोकसभा चुनावों में जुट गई थी। सीएम के नाम का एलान होने से पहले ही शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की 29 सीटें जिताने के लक्ष्य के साथ प्रदेश में घूमने लगे थे। उनका फोकस उन सीटों पर ज्यादा था जहां विधानसभा में भाजपा को हार मिली थी। भाजपा ने सभी 29 सीटों पर काफी पहले ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। सभी सीटों पर प्रभारी और संयोजक नियुक्त कर दिए गए थे। लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने मध्यप्रदेश को 7 क्लस्टरों में बांटा है और सात बड़े नेताओं को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। जबकि 11 सीट ऐसी हैं, जहां लोकसभा प्रभारी और संयोजक के साथ सहसंयोजक भी बनाए गए हैं।
दीवार लेखन से लेकर महिला तक फोकस
15 जनवरी से भाजपा ने दीवार लेखन अभियान शुरू किया है। इसके तहत दीवारों पर भाजपा के पक्ष में नारे लिखे जा रहे हैं। इससे भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की तैयारी है। भाजपा बूथ को मजबूत करने की तैयारी है। पार्टी इस अभियान के जरिए सभी बूथ और पन्ना-अर्ध पन्ना प्रभारियों की सक्रियता से लेकर मतदाताओं से भी सम्पर्क साध रही है। इस अभियान में भाजपा के बड़े नेता दो-दो घंटे का समय बूथ पर दे रहे हैं और रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। बूथ विजय अभियान के तहत पार्टी के 41 लाख कार्यकर्ता प्रतिदिन दो घंटे बूथ पर रहेंगे। इस दौरान पार्टी के पक्ष में दस प्रतिशत मत की वृद्धि के लिए प्रबुद्धजन के साथ-साथ पन्ना प्रमुखों से संवाद करेंगे। बूथ विजय अभियान के तहत प्रदेश में 64,523 बूथों पर कार्यकर्ता 370 वोट बढ़ाने के लिए 22 मार्च तक निरंतर जाएंगे। इसके अलावा भाजपा ने सोशल मीडया से भी प्रचार शुरू कर दिया है। एप जारी कर दिया है, जिससे सरकार की योजनाओं की विस्तृत जानकारी लोगों तक पहुंच रही है। भाजपा ने महिला वोटों पर भी फोकस बढ़ा रखा है। इस बार छह महिलाओं को टिकट दिया गया है। प्रदेश के विधानसभा चुनावों की बंपर जीत में महिलाओं का बड़ा योगदान था। भाजपा इसे बनाए रखना चाहती है। लाडली बहना योजना का पैसा हर महीने बहनों के खाते में जा ही रहा है।
कांग्रेस के कब्जे वाली सीट के लिए रणनीति
भाजपा ने 2019 में प्रदेश की 29 में से 28 सीटों पर जीत हासिल की थी। छिंदवाड़ा सीट पर कांग्रेस जीती थी। भाजपा ने छिंदवाड़ा को जीतने के लिए करीब दो साल पहले तैयारी कर ली थी। कई केंद्रीय मंत्रियों को वहां नियमित भेजा गया। शिवराज सिंह चौहान भी वहां सक्रिय रहे। हालांकि विधानसभा चुनावों में छिंदवाड़ा की सभी सातों सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इसके बाद भी भाजपा ने तैयारी जारी रखी। बीच में सांसद नकुलनाथ और कमलनाथ के भाजपा में जाने की अटकलों ने माहौल और गर्मा दिया था। हालांकि ये अफवाह साबित हुई। तैयारियों को देख लग रहा था कि भाजपा यहां कोई बड़ा चेहरा उतार सकती है। पहली सूची में छिंदवाड़ा सीट पर नाम नहीं आने से इस बात को बल भी मिला। लेकिन दूसरी सूची में भाजपा ने कमलनाथ से विधानसभा चुनाव हार चुके बंटी साहू को प्रत्याशी बनाया है। कहा जा रहा है कि वे नकुलनाथ को टक्कर दे सकते हैं।
प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद से ही लोकसभा चुनावों में जुट गई थी। सीएम के नाम का एलान होने से पहले ही शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की 29 सीटें जिताने के लक्ष्य के साथ प्रदेश में घूमने लगे थे। उनका फोकस उन सीटों पर ज्यादा था जहां विधानसभा में भाजपा को हार मिली थी। भाजपा ने सभी 29 सीटों पर काफी पहले ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। सभी सीटों पर प्रभारी और संयोजक नियुक्त कर दिए गए थे। लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने मध्यप्रदेश को 7 क्लस्टरों में बांटा है और सात बड़े नेताओं को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। जबकि 11 सीट ऐसी हैं, जहां लोकसभा प्रभारी और संयोजक के साथ सहसंयोजक भी बनाए गए हैं।
दीवार लेखन से लेकर महिला तक फोकस
15 जनवरी से भाजपा ने दीवार लेखन अभियान शुरू किया है। इसके तहत दीवारों पर भाजपा के पक्ष में नारे लिखे जा रहे हैं। इससे भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की तैयारी है। भाजपा बूथ को मजबूत करने की तैयारी है। पार्टी इस अभियान के जरिए सभी बूथ और पन्ना-अर्ध पन्ना प्रभारियों की सक्रियता से लेकर मतदाताओं से भी सम्पर्क साध रही है। इस अभियान में भाजपा के बड़े नेता दो-दो घंटे का समय बूथ पर दे रहे हैं और रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। बूथ विजय अभियान के तहत पार्टी के 41 लाख कार्यकर्ता प्रतिदिन दो घंटे बूथ पर रहेंगे। इस दौरान पार्टी के पक्ष में दस प्रतिशत मत की वृद्धि के लिए प्रबुद्धजन के साथ-साथ पन्ना प्रमुखों से संवाद करेंगे। बूथ विजय अभियान के तहत प्रदेश में 64,523 बूथों पर कार्यकर्ता 370 वोट बढ़ाने के लिए 22 मार्च तक निरंतर जाएंगे। इसके अलावा भाजपा ने सोशल मीडया से भी प्रचार शुरू कर दिया है। एप जारी कर दिया है, जिससे सरकार की योजनाओं की विस्तृत जानकारी लोगों तक पहुंच रही है। भाजपा ने महिला वोटों पर भी फोकस बढ़ा रखा है। इस बार छह महिलाओं को टिकट दिया गया है। प्रदेश के विधानसभा चुनावों की बंपर जीत में महिलाओं का बड़ा योगदान था। भाजपा इसे बनाए रखना चाहती है। लाडली बहना योजना का पैसा हर महीने बहनों के खाते में जा ही रहा है।
कांग्रेस के कब्जे वाली सीट के लिए रणनीति
भाजपा ने 2019 में प्रदेश की 29 में से 28 सीटों पर जीत हासिल की थी। छिंदवाड़ा सीट पर कांग्रेस जीती थी। भाजपा ने छिंदवाड़ा को जीतने के लिए करीब दो साल पहले तैयारी कर ली थी। कई केंद्रीय मंत्रियों को वहां नियमित भेजा गया। शिवराज सिंह चौहान भी वहां सक्रिय रहे। हालांकि विधानसभा चुनावों में छिंदवाड़ा की सभी सातों सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इसके बाद भी भाजपा ने तैयारी जारी रखी। बीच में सांसद नकुलनाथ और कमलनाथ के भाजपा में जाने की अटकलों ने माहौल और गर्मा दिया था। हालांकि ये अफवाह साबित हुई। तैयारियों को देख लग रहा था कि भाजपा यहां कोई बड़ा चेहरा उतार सकती है। पहली सूची में छिंदवाड़ा सीट पर नाम नहीं आने से इस बात को बल भी मिला। लेकिन दूसरी सूची में भाजपा ने कमलनाथ से विधानसभा चुनाव हार चुके बंटी साहू को प्रत्याशी बनाया है। कहा जा रहा है कि वे नकुलनाथ को टक्कर दे सकते हैं।
किस चरण में किस सीट पर होगा मतदान, यहां जानिए।
- फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस की क्या तैयारी
लोकसभा चुनावों में कांग्रेस फिलहाल पिछड़ी नजर आ रही है। चुनाव को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिख रही। कांग्रेस इस वक्त पार्टी में मची भगदड़ रोकने और सीटों पर प्रत्याशियों के चयन में उलझी है। कई दिग्गज पार्टी छोड़ते जा रहे हैं। हाल ही में सुरेश पचौरी, संजय शुक्ला, विशाल पटेल, अंतर सिंह दरबार जैसे बड़े नेता पार्टी से किनारा कर चुके हैं। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पार्टी में मची भगदड़ को रोकने के लिए बैठकें कर रहे हैं। नए अध्यक्ष को संगठन को संगठित करने में जुटे हैं। कांग्रेस ने अभी तक सिर्फ 10 सीटों पर ही नाम तय किए हैं। कई जगह कहा जा रहा है कि भाजपा को टक्कर देने वाले प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं। कहीं दावेदार ही आगे नहीं आ रहे। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि पार्टी की तैयारियां चल रही हैं। पार्टी की ओर से नाम तय हो गए हैं, उनके एलान के लिए सही समय का इंतजार किया जा रहा है। पार्टी के बड़े नेता ही नजर नहीं आ रहे। कमलनाथ छिंदवाड़ा तक सीमित हो गए हैं। दिग्विजय सिंह बीते कुछ दिनों से नजर नहीं आ रहे हैं। जीतू पटवारी पार्टी को एक करने में व्यस्त हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस बिखरी हुई है और लोकसभा चुनाव को लेकर फिलहाल मैदान में नजर नहीं आ रही।
अन्य पार्टियों के क्या हाल
मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के अलावा कोई और दल मैदान में नहीं है। महागठबंधन के कारण बीते चुनाव में भाग्य आजमाने उतरी पार्टियां भी शांत हैं। प्रदेश की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश की सपा और बसपा भी यहां सटे इलाकों में प्रभाव रखती हैं। कांग्रेस और सपा के समझौते के तहत खजुराहो लोकसभा सीट सपा के लिए छोड़ी गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती भी कह चुकी हैं कि प्रदेश की कई सीटों पर वे अपने प्रत्याशी उतारेंगी। हालांकि अभी तक कोई तैयारी नहीं दिख रही है। आम आदमी पार्टी भी विधानसभा चुनावों में सक्रिय थी, पर वो भी इस चुनावों में अभी तक कोई सक्रियता नहीं दिखा पाई है।
सोमवार को देंगे अगली लिस्ट: कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा का कहना है कि कांग्रेस की तैयारी जारी है। हम अधिसूचना का इंतजार कर रहे थे। सोमवार तक हमारे सभी शेष प्रत्याशियों के नामों का एलान कर देंगे। हम जनता तक पहुंचने के लिए प्लानिंग कर रहे हैं। सभाएं, रैलियां की जाएंगी। सोशल मीडिया पर हम सक्रिय हैं। भाजपा के दीवार लेखन सहित अभियानों पर मिश्रा का कहना है कि भाजपा प्रोपैगेंडा करती है। दीवार लेखन फोटो खिंचाने का अभियान था। फोटो खिंचाकर कहां दिख रहे उनके नेता। भाजपा को मैदान में जवाब देना पड़ेगा।
हर मतदाता तक पहुंचना लक्ष्य: भाजपा
भाजपा के प्रवक्ता आलोक दुबे का कहना है कि भाजपा की मजबूती बूथ स्तर से है। मतदाता तक पहुंच है। समाज के प्रतिष्ठित वर्ग तक है। हम ज्यादा से ज्यादा से मतदान को प्रेरित करते हैं। प्रचार अभियान सेकेंडरी है। भाजपा के पास हितग्राहियों का लंबा वोटबैंक है। भाजपा ने किसान, गरीब मजदूर जैसे बड़े वर्ग के लिए काम किया है। मोदी लहर बड़ी जीत का आधार बनेगी। मजबूत संगठन, मजबूत जनसंपर्क, मजबूत की लहर के साथ प्रदेश की सभी 29 सीटों पर भाजपा जीतेगी। वहीं कांग्रेस को लेकर दुबे ने कहा कि का्ंग्रेस का नेतृत्व तार-तार है। मुद्दा विहीन है। कांग्रेस ने वरिष्ठों नेताओं को हाशिए पर कर दिया है। इसलिए लोग छोड़कर जा रहे हैं। कांग्रेस किन मुद्दों पर जनता के पास जाएगी। कांग्रेस की मानसिकता पराजय से ग्रसित होती जा रही है। स्थानीय क्षत्रपों का राज खत्म हो गया है। पार्टी पहले इन्हीं के भरोसे थे। नया नेतृत्व इन नेताओं को रास नहीं आ रहा है।
लोकसभा चुनावों में कांग्रेस फिलहाल पिछड़ी नजर आ रही है। चुनाव को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिख रही। कांग्रेस इस वक्त पार्टी में मची भगदड़ रोकने और सीटों पर प्रत्याशियों के चयन में उलझी है। कई दिग्गज पार्टी छोड़ते जा रहे हैं। हाल ही में सुरेश पचौरी, संजय शुक्ला, विशाल पटेल, अंतर सिंह दरबार जैसे बड़े नेता पार्टी से किनारा कर चुके हैं। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पार्टी में मची भगदड़ को रोकने के लिए बैठकें कर रहे हैं। नए अध्यक्ष को संगठन को संगठित करने में जुटे हैं। कांग्रेस ने अभी तक सिर्फ 10 सीटों पर ही नाम तय किए हैं। कई जगह कहा जा रहा है कि भाजपा को टक्कर देने वाले प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं। कहीं दावेदार ही आगे नहीं आ रहे। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि पार्टी की तैयारियां चल रही हैं। पार्टी की ओर से नाम तय हो गए हैं, उनके एलान के लिए सही समय का इंतजार किया जा रहा है। पार्टी के बड़े नेता ही नजर नहीं आ रहे। कमलनाथ छिंदवाड़ा तक सीमित हो गए हैं। दिग्विजय सिंह बीते कुछ दिनों से नजर नहीं आ रहे हैं। जीतू पटवारी पार्टी को एक करने में व्यस्त हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस बिखरी हुई है और लोकसभा चुनाव को लेकर फिलहाल मैदान में नजर नहीं आ रही।
अन्य पार्टियों के क्या हाल
मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के अलावा कोई और दल मैदान में नहीं है। महागठबंधन के कारण बीते चुनाव में भाग्य आजमाने उतरी पार्टियां भी शांत हैं। प्रदेश की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश की सपा और बसपा भी यहां सटे इलाकों में प्रभाव रखती हैं। कांग्रेस और सपा के समझौते के तहत खजुराहो लोकसभा सीट सपा के लिए छोड़ी गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती भी कह चुकी हैं कि प्रदेश की कई सीटों पर वे अपने प्रत्याशी उतारेंगी। हालांकि अभी तक कोई तैयारी नहीं दिख रही है। आम आदमी पार्टी भी विधानसभा चुनावों में सक्रिय थी, पर वो भी इस चुनावों में अभी तक कोई सक्रियता नहीं दिखा पाई है।
सोमवार को देंगे अगली लिस्ट: कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा का कहना है कि कांग्रेस की तैयारी जारी है। हम अधिसूचना का इंतजार कर रहे थे। सोमवार तक हमारे सभी शेष प्रत्याशियों के नामों का एलान कर देंगे। हम जनता तक पहुंचने के लिए प्लानिंग कर रहे हैं। सभाएं, रैलियां की जाएंगी। सोशल मीडिया पर हम सक्रिय हैं। भाजपा के दीवार लेखन सहित अभियानों पर मिश्रा का कहना है कि भाजपा प्रोपैगेंडा करती है। दीवार लेखन फोटो खिंचाने का अभियान था। फोटो खिंचाकर कहां दिख रहे उनके नेता। भाजपा को मैदान में जवाब देना पड़ेगा।
हर मतदाता तक पहुंचना लक्ष्य: भाजपा
भाजपा के प्रवक्ता आलोक दुबे का कहना है कि भाजपा की मजबूती बूथ स्तर से है। मतदाता तक पहुंच है। समाज के प्रतिष्ठित वर्ग तक है। हम ज्यादा से ज्यादा से मतदान को प्रेरित करते हैं। प्रचार अभियान सेकेंडरी है। भाजपा के पास हितग्राहियों का लंबा वोटबैंक है। भाजपा ने किसान, गरीब मजदूर जैसे बड़े वर्ग के लिए काम किया है। मोदी लहर बड़ी जीत का आधार बनेगी। मजबूत संगठन, मजबूत जनसंपर्क, मजबूत की लहर के साथ प्रदेश की सभी 29 सीटों पर भाजपा जीतेगी। वहीं कांग्रेस को लेकर दुबे ने कहा कि का्ंग्रेस का नेतृत्व तार-तार है। मुद्दा विहीन है। कांग्रेस ने वरिष्ठों नेताओं को हाशिए पर कर दिया है। इसलिए लोग छोड़कर जा रहे हैं। कांग्रेस किन मुद्दों पर जनता के पास जाएगी। कांग्रेस की मानसिकता पराजय से ग्रसित होती जा रही है। स्थानीय क्षत्रपों का राज खत्म हो गया है। पार्टी पहले इन्हीं के भरोसे थे। नया नेतृत्व इन नेताओं को रास नहीं आ रहा है।

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