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नर्मदांचल का लोकोत्सव: नर्मदा जयंती महोत्सव आज, सीएम डॉ. मोहन यादव करेंगे जलमंच से मां नर्मदा का पूजन-अभिषेक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम Published by: उदित दीक्षित Updated Tue, 04 Feb 2025 01:15 PM IST
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सार

मां नर्मदा देश की एकमात्र ऐसी नदी है, जो पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है। इसे मध्य प्रदेश की लाइफलाइन भी कहा जाता है। प्रदेश में इसे 'जीवंत नदी' का दर्जा प्राप्त है।

Narmada Jayanti Mahotsav today: CM   Mohan Yadav worship and anoint Mother Narmada from water stage
नर्मदा जयंती महोत्सव। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

नर्मदांचल का लोकोत्सव मां नर्मदा जयंती महोत्सव आज मंगलवार को बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। शाम को जलमंच से मां नर्मदा का अभिषेक और पूजन होगा, जिसमें प्रदेश के मुखिया सीएम डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे।

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जानकारी के अनुसार, दोपहर सेठानी घाट पर मां नर्मदा का जन्मोत्सव मनाया जाएगा और मुख्य कार्यक्रम शाम 5:30 बजे से होगा। इस कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव, राज्यसभा सांसद माया नारोलिया, सांसद दर्शन सिंह चौधरी, विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा सहित करीब 1 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे। इस दौरान मां नर्मदा की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी और जलमंच से मां नर्मदा का अभिषेक किया जाएगा। श्रद्धालु नर्मदा के पुण्य सलिल में लाखों दीप प्रवाहित कर नर्मदा का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाएंगे।
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दरअसल, मां नर्मदा देश की एकमात्र ऐसी नदी है, जो पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है। इसे मध्य प्रदेश की लाइफलाइन भी कहा जाता है। प्रदेश में इसे 'जीवंत नदी' का दर्जा प्राप्त है। मध्यप्रदेश की जनता की गहरी आस्था इस नदी से जुड़ी हुई है। पुराणों में भी मां नर्मदा का उल्लेख मिलता है। इसे भगवान शंकर से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि गंगा नदी में स्नान करने से और मां नर्मदा के दर्शन मात्र से सारे पाप कट जाते हैं। नर्मदा नदी से निकलने वाले पत्थरों को शिवलिंग का दर्जा प्राप्त है, इनकी प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती।

नर्मदा जयंती को लेकर विश्व प्रसिद्ध सेठानी घाट को नर्मदा जयंती के अवसर पर रंग-बिरंगी रोशनी से मनमोहक रूप से सजाया गया है। आचार्य पंडित सोमेश परसाई ने कहा कि मां नर्मदा वस्तुतः जीवन की धारा हैं। यह मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात की जीवनदायिनी नदी है। नर्मदा है तो कल है। जो साधना का फल लेना चाहता है, वह नर्मदा किनारे आ जाए, और जो मरणासन्न स्थिति में हो, वह गंगा किनारे आ जाए। मां नर्मदा प्रलयकाल के बाद भी बनी रहती हैं। नर्मदा गंगा से भी पुरानी नदी मानी जाती हैं। मां नर्मदा की पद-प्रदक्षिणा करने मात्र से भवसागर से पार हुआ जा सकता है। मां नर्मदा से जो भी माँगा जाए, वह प्राप्त होता है। स्कंद पुराण में उल्लेख आता है कि जब भगवान शिव तपस्या कर रहे थे, तब उनकी तपस्या से जो जल की बूंदें गिरीं, उनसे मां नर्मदा प्रकट हुईं। यही कारण है कि मां नर्मदा का महत्व अत्यधिक है, क्योंकि वे स्वयं भगवान शिव से प्रकट हुई हैं। एक अन्य विशेषता यह भी है कि अन्य देव नदियां हिमालय से निकलती हैं, किंतु मां नर्मदा वृक्षों से उत्पन्न जलधारा से प्रवाहित होती हैं।

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