सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Saved the lives of 20 children without caring for himself, died while trying to save them from bees.

Neemuch News: खुद की परवाह किए बगैर बचाई 20 बच्चों की जान, मधुमक्खियों से मासूमों को बचाते-बचाते हुई मौत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नीमच Published by: नीमच ब्यूरो Updated Wed, 04 Feb 2026 08:49 PM IST
विज्ञापन
सार

नीमच के रानपुर गांव में आंगनबाड़ी कर्मी कंचनबाई मेघवाल ने मधुमक्खियों के हमले से 20 बच्चों की जान बचाई। बच्चों को ढंकते हुए खुद सामने खड़ी रहीं, हजारों डंक से उनकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से सहायता की मांग की है।

Saved the lives of 20 children without caring for himself, died while trying to save them from bees.
नीमच में बच्चों को बचाने में कंचन बाई की मौत हो गई। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

मध्यप्रदेश के नीमच जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसमें आंगनवाड़ी केंद्र पर काम करने वाली महिला ने खुद की जान की परवाह न करते हुए मधुमक्खियों से 20 बच्चों की जान बचाई। मधुमक्खियां कंचनबाई मेघवाल को डंक मारती रहीं, लेकिन उन्होंने खुद की परवाह न करते हुए बच्चों की जान बचाई। मधुमक्खियों से बच्चों को बचाने में रसोइया की जान चली गई है।

Trending Videos

विज्ञापन
विज्ञापन

नीमच में रानपुर गांव के आंगनबाड़ी केंद्र पर मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। घटना मंगलवार को हुई। बच्चों को उनसे बचाने के लिए केंद्र में खाना बनाने वाले स्वसहायता समूह की अध्यक्ष कंचन बाई मेघवाल मधुमक्खियों के सामने खड़ी हो गईं। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना सभी बच्चों को तिरपाल और दरी में लपेटा। फिर अंदर के कमरे में भेजा। यह घटनाक्रम जब हुआ, तब आंगनबाड़ी केंद्र के 20 बच्चे बाहर खेल रहे थे। अचानक कई मधुमक्खियां वहां आ गईं और बच्चों को घेर लिया। यह देखकर कंचन बाई ने तुरंत हिम्मत दिखाई। उन्होंने पास पड़ी तिरपाल और दरी से बच्चों को ढंकना शुरू कर दिया। कंचन बाई बच्चों को बचाने के लिए खुद मधुमक्खियों के सामने खड़ी हो गईं। जब तक ग्रामीण मदद के लिए दौड़ते, हजारों मधुमक्खियां कंचन बाई को बुरी तरह डंक मार चुकी थीं। मंगलवार देर शाम को पीएम के बाद मृतिका कंचनबाई का शव परिजनों को सौंप दिया गया। मृतिका कंचनबाई की जान एक जाबांज महिला की मिसाल कायम कर गई है, जिसने खुद की जान की परवाह न करते हुए बच्चों की जान को अहमियत दी।

ये भी पढ़ें- Mohan Bhagwat: 'भारत में मनुष्य के अंदर की खोज की यात्रा प्रारंभ हुई', भागवत ने राष्ट्र निर्माण पर कही ये बात

पति को पैरालिसिस, घर संभाल रही थीं
स्थानीय ग्रामीणों ने कहा- कंचन बाई आंगनबाड़ी में खाना बनाने वाले 'जय माता दी स्व-सहायता समूह' की अध्यक्ष थीं। वे खुद भी बच्चों के लिए खाना बनाने का काम करती थीं। उनके पति शिवलाल को पैरालिसिस है। ऐसे में घर का सारा बोझ कंचन बाई के कंधों पर ही था। दंपती का एक बेटा और दो बेटियां हैं।

प्रशासन से लगाई मदद करने की गुहार
ग्रामीण अब आंगनबाड़ी के पास जाने से भी कतरा रहे हैं, क्योंकि वहां लगे पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता है। जबकि आंगनबाड़ी में लगा एकमात्र हैंडपंप ही गांवभर के लिए पानी का जरिया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस छत्ते को तुरंत हटाया जाए ताकि और कोई हादसा न हो। साथ ही कंचन बाई के परिवार की आर्थिक मदद करने की गुहार भी लगाई है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed