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Omkareshwar: तेंदुए के जबड़ों से बेटी को छीन लाया पिता, जान जोखिम में डाल बचाई जिंदगी; चारों तरफ हो रही चर्चा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर Published by: Sabahat Husain Updated Sun, 12 Apr 2026 06:55 PM IST
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सार

ओंकारेश्वर जंगल में एक तेंदुए ने 10 वर्षीय रुक्मा पर हमला कर दिया। जिसके बाद पिता सियाराम ने साहस दिखाते हुए तेंदुए से भिड़कर बेटी को बचाया। घायल बच्ची का इलाज जारी है। 

Omkareshwar: Father Rescues Daughter from the Jaws of a Leopard Risks His Own Life to Save Hers News in hindi
घायल बच्ची का इलाज करते डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की पुनासा तहसील स्थित ओंकारेश्वर क्षेत्र के जंगलों से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। इस घटना ने न केवल एक पिता के अदम्य साहस को उजागर किया, बल्कि क्षेत्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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महुआ बीनने गई बच्ची पर तेंदुए का हमला
घटना धावड़िया के डाबर गांव के समीप रामफल जंगल क्षेत्र की है। आदिवासी अंचल में इन दिनों महुआ संग्रहण का समय चल रहा है, जो ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख साधन है। इसी क्रम में 10 वर्षीय रुक्मा अपने पिता के साथ जंगल में महुआ बीनने गई थी। सुबह के समय अचानक झाड़ियों से एक तेंदुआ निकला और उसने बच्ची पर हमला कर दिया। तेंदुए ने बच्ची के सिर को अपने जबड़ों में दबोच लिया और उसे घसीटते हुए जंगल के भीतर ले जाने लगा। यह दृश्य बेहद भयावह था।
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पिता का साहस: तेंदुए से भिड़ गए सियाराम
अपनी बेटी को तेंदुए के जबड़ों में फंसा देख पिता सियाराम ने बिना अपनी जान की परवाह किए सीधे तेंदुए पर हमला कर दिया। उन्होंने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया और तेंदुए से भिड़ गए। यह एक ऐसा क्षण था, जहां एक ओर जंगली जानवर की ताकत थी, तो दूसरी ओर एक पिता का प्रेम और साहस।

ग्रामीणों की एकजुटता से बची बच्ची की जान
सियाराम की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और शोर मचाते हुए तेंदुए को खदेड़ दिया। घबराकर तेंदुआ बच्ची को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। गंभीर रूप से घायल रुक्मा को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची अब खतरे से बाहर है।

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बढ़ता वन्यजीव संकट, डर में जी रहे ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि ओंकारेश्वर और पुनासा क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से तेंदुओं की गतिविधियां बढ़ी हैं। उनका आरोप है कि अन्य क्षेत्रों से पकड़े गए तेंदुओं को यहां के जंगलों में छोड़ा जा रहा है, जिससे खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मी के मौसम में जंगलों में शिकार की कमी के कारण तेंदुए आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करते हैं। वहीं महुआ बीनने के दौरान ग्रामीण सुबह-सुबह जंगलों में जाते हैं, जो वन्यजीवों की सक्रियता का समय होता है।

वन विभाग की चेतावनी, लेकिन सवाल बरकरार
घटना के बाद वन विभाग ने लोगों को सतर्क रहने, समूह में जंगल जाने और बच्चों को साथ न ले जाने की सलाह दी है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि केवल चेतावनी देना पर्याप्त नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जंगलों में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए, संवेदनशील क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, तेंदुओं के पुनर्वास की प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। 

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