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Panna News: होली की तीज पर सखी रूप में दर्शन देते हैं भगवान जुगल किशोर, साल में एक बार होता है अद्भुत शृंगार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना
Published by: पन्ना ब्यूरो
Updated Fri, 06 Mar 2026 12:49 PM IST
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सार
होली की तीज पर पन्ना का जुगल किशोर मंदिर आस्था और परंपरा का केंद्र बन जाता है। इस दिन भगवान जुगल किशोर सखी रूप धारण कर भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
भगवान जुगल किशोर का सखी स्वरूप में किया शृंगार
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विस्तार
होली के पर्व के दौरान पन्ना में आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां स्थित प्राचीन जुगल किशोर मंदिर में होली की तीज के अवसर पर भगवान जुगल किशोर सखी रूप धारण करते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इस दिन भगवान के दुर्लभ दर्शन करने के लिए दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।
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साल में एक दिन होते हैं सखी रूप के दर्शन
होली की तीज के दिन भगवान जुगल किशोर को सखी यानी स्त्री स्वरूप में सजाया जाता है। विशेष शृंगार के साथ भगवान को सखी के रूप में तैयार किया जाता है और राधा जी की छड़ी से उनके दोनों हाथ प्रतीकात्मक रूप से बांध दिए जाते हैं। मंदिर में होने वाला यह अद्भुत और अनोखा शृंगार श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र बन जाता है।
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प्राचीन परंपरा का आज भी होता है निर्वहन
इस परंपरा के पीछे एक प्राचीन धार्मिक मान्यता भी जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार एक बार होली के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण ने सखियों के साथ खूब होली खेली और उन्हें इतना रंग लगा दिया कि सखियां परेशान हो गईं। इसके बाद सभी सखियां राधाजी के पास शिकायत लेकर पहुंचीं। सखियों की बात सुनकर राधाजी नाराज हो गईं और उन्होंने भगवान कृष्ण को ही सखी का रूप धारण करने का दंड दे दिया।
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इसी घटना की स्मृति में पन्ना के जुगल किशोर मंदिर में होली की तीज के दिन भगवान को सखी स्वरूप में सजाया जाता है। इस दिन भगवान के दोनों हाथ राधाजी की छड़ी से बांध दिए जाते हैं, जो उस पौराणिक कथा का प्रतीक माना जाता है। साल में केवल एक बार होने वाले इन दुर्लभ दर्शनों को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर में उमड़ती है।
गुलाल का मिलता है प्रसाद
भक्तों का विश्वास है कि इस विशेष दिन भगवान जुगल किशोर के सखी रूप के दर्शन करने से हर मनोकामना पूरी होती है। श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति और आस्था का वातावरण बना रहता है।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में गुलाल भी वितरित किया जाता है, जिसे लोग श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं। होली के रंग और भक्ति की भावना से सराबोर यह अनूठी परंपरा पन्ना की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाती है। भगवान जुगल किशोर के इस सखी रूप के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास होते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान के दर्शन कर सच्चे मन से मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है।
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