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Sagar: अभ्यारण्य में तेंदुए की मौत, ग्रामीणों ने रेंजर पर मढ़े लापरवाही के आरोप; सवालों से क्यों बना रहे दूरी?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: सागर ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2026 08:13 AM IST
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सार
सागर के बरायठा जंगल में गांव से महज एक किलोमीटर दूर तेंदुए का शव मिलने से सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि वन विभाग ने पोस्टमार्टम के जरिए मौत के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
तेंदुए का शव।
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विस्तार
सागर के उत्तर वन मंडल शाहगढ़ के अंतर्गत आने वाले डॉ. आंबेडकर अभ्यारण्य के बरायठा जंगल में एक तेंदुए का शव मिलने से हड़कंप मच गया। तेंदुआ गांव से महज एक किलोमीटर दूर मृत अवस्था में पाया गया। इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने शाहगढ़ रेंजर पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
तेंदूपत्ता बीनने गए ग्रामीणों ने देखा शव
मिली जानकारी के अनुसार, सुबह जब कुछ ग्रामीण बरायठा जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गए थे, तब उनकी नजर मृत तेंदुए पर पड़ी। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
बीमार था तेंदुआ, विभाग को दी थी जानकारी
इस घटना को लेकर ग्रामीणों ने शाहगढ़ रेंजर सर्वेश सोनी पर सीधे तौर पर लापरवाही का आरोप मढ़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ पिछले कुछ दिनों से बीमार था और वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। इसकी जानकारी समय रहते वन विभाग को दे दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद विभाग ने तेंदुए की सुध नहीं ली और न ही उसके रेस्क्यू या इलाज की कोई व्यवस्था की। अगर समय पर उसे इलाज मिल जाता, तो तेंदुए की जान बचाई जा सकती थी।
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ये भी पढ़ें- Ujjain: त्रिपुंड, त्रिनेत्र व चंद्रमा से सजा बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप, भांग से श्रृंगार कर दिए दिव्य दर्शन
सवाल सुनते ही रेंजर ने काट दिया फोन
मीडया ने जब ग्रामीणों के इन गंभीर आरोपों पर शाहगढ़ रेंजर सर्वेश सोनी का पक्ष जानने का प्रयास किया, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। रेंजर ने मामले से जुड़े सवालों को सुनते ही उनसे बचते हुए बीच में ही कॉल समाप्त कर दी (फोन काट दिया)। अधिकारी का इस तरह सवालों से भागना वन विभाग की भूमिका को और अधिक संदिग्ध बना रहा है।
जांच में जुटी वन विभाग की टीम
फिलहाल, वन विभाग की टीम घटनास्थल के आसपास के इलाके की सर्चिंग कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि मामले में कोई शिकार या अन्य संदिग्ध गतिविधि तो शामिल नहीं थी। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा और उसी के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि वन्यजीव संरक्षण में इतनी बड़ी लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर उच्च अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।
तेंदूपत्ता बीनने गए ग्रामीणों ने देखा शव
मिली जानकारी के अनुसार, सुबह जब कुछ ग्रामीण बरायठा जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गए थे, तब उनकी नजर मृत तेंदुए पर पड़ी। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
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बीमार था तेंदुआ, विभाग को दी थी जानकारी
इस घटना को लेकर ग्रामीणों ने शाहगढ़ रेंजर सर्वेश सोनी पर सीधे तौर पर लापरवाही का आरोप मढ़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ पिछले कुछ दिनों से बीमार था और वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। इसकी जानकारी समय रहते वन विभाग को दे दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद विभाग ने तेंदुए की सुध नहीं ली और न ही उसके रेस्क्यू या इलाज की कोई व्यवस्था की। अगर समय पर उसे इलाज मिल जाता, तो तेंदुए की जान बचाई जा सकती थी।
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सवाल सुनते ही रेंजर ने काट दिया फोन
मीडया ने जब ग्रामीणों के इन गंभीर आरोपों पर शाहगढ़ रेंजर सर्वेश सोनी का पक्ष जानने का प्रयास किया, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। रेंजर ने मामले से जुड़े सवालों को सुनते ही उनसे बचते हुए बीच में ही कॉल समाप्त कर दी (फोन काट दिया)। अधिकारी का इस तरह सवालों से भागना वन विभाग की भूमिका को और अधिक संदिग्ध बना रहा है।
जांच में जुटी वन विभाग की टीम
फिलहाल, वन विभाग की टीम घटनास्थल के आसपास के इलाके की सर्चिंग कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि मामले में कोई शिकार या अन्य संदिग्ध गतिविधि तो शामिल नहीं थी। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा और उसी के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि वन्यजीव संरक्षण में इतनी बड़ी लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर उच्च अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।
