{"_id":"68b8fe07991ea7cbd50c0afd","slug":"this-is-the-first-temple-in-the-country-where-the-eight-forms-of-lord-ganesha-are-present-at-one-place-sagar-news-c-1-1-noi1338-3364039-2025-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान गणेश: इस मंदिर में आठ स्वरूप में विराजमान हैं गणपति, भक्तों की हर मनोकामना होता है पूरी; जानें कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान गणेश: इस मंदिर में आठ स्वरूप में विराजमान हैं गणपति, भक्तों की हर मनोकामना होता है पूरी; जानें कहानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: सागर ब्यूरो
Updated Thu, 04 Sep 2025 10:04 AM IST
विज्ञापन
सार
सागर में भगवान गणेश की अष्टविनायक प्रतिमाएं विराजमान हैं। यहां गणपति मयूरेश्वर, सिद्धिविनायक, विघ्नहर, गिरिजात्मज, चिंतामणि, बल्लाळेश्वर, वरदविनायक और महागणपति के रूप में दर्शन देकर भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
आठ स्वरूप में भगवान गणेश।
विज्ञापन
विस्तार
सागर जिले के गढ़ाकोटा नगर का ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल गणेश घाट इस समय श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां स्थित प्राचीन गणेश मंदिर में भगवान गणेश की आठ अलग-अलग प्रतिमाएं अष्टविनायक स्वरूप में विशिष्ट मुद्राओं में स्थापित हैं, जिनके दर्शन से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होता है। यह स्थान संभवत देश का पहला ऐसा मंदिर है, जहां एक ही मंदिर में रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश की अष्ट स्वरूप में प्रतिमाएं हैं।
पीपल घाट मंदिर परिसर में भगवान गणेश
मयूरेश्वर, सिद्धिविनायक, विघ्नहर, गिरिजात्मज, चिंतामणि, बल्लाळेश्वर, वरदविनायक और महागणपति स्वरूप में विराजमान हैं। मयूरेश्वर गणेश जी के दर्शन से शत्रु बाधा और भय दूर होता है, साथ ही जीवन में साहस और विजय की प्राप्त होती है। सिद्धिविनायक गणेश जी की पूजा से सिद्धियां और सफलता प्राप्त होती हैं। विघ्नहर स्वरूप के दर्शन से जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और कार्य सिद्ध होते हैं। गिरिजात्मज गणेश जी के दर्शन से संतान सुख की प्राप्ति होती है और पुत्र-पौत्र की दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। चिंतामणि गणेश जी के दर्शन से मन की चिंताएं समाप्त होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
बल्लाळेश्वर गणेश जी के सच्चे मन से दर्शन करने पर भक्ति और अटूट विश्वास की शक्ति प्राप्त होती है, जिससे पारिवारिक जीवन सुखमय होता है। वरदविनायक गणेश जी भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और धन-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। महागणपति गणेश जी के दर्शन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और भक्त शक्ति एवं पराक्रम से परिपूर्ण होता है। धार्मिक मान्यता है कि अष्टविनायक के एक साथ दर्शन करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसी कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान गणेश की आराधना करते हैं।
गणेशोत्सव के दौरान विशेष आयोजन
गणेशोत्सव पर्व के अवसर पर पीपल घाट मंदिर में भव्य सजावट की गई है। यहां संचालित गणेश संस्कृत विद्यालय के बटुक ब्राह्मण प्रतिदिन प्रातः, दोपहर और सायं विशेष पूजन-अर्चन, आरती एवं भजन संध्या का आयोजन कर रहे हैं। दर्शनार्थियों को भगवान के विभिन्न स्वरूपों के बारे में मार्गदर्शन दिया जा रहा है। नगर सहित आस-पास के ग्रामीण अंचलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर अष्टविनायक के दर्शन कर रहे हैं। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि गणेशोत्सव पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। घाट परिसर में प्रकाश व्यवस्था, जलपान की व्यवस्था तथा सुरक्षा प्रबंधन भी किया गया है।
प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार की कहानी
पं. गोपाल भार्गव बताते हैं कि किशोरावस्था में नगर में पानी की बड़ी समस्या रहती थी। उस समय पीने का पानी कुओं और ट्यूबवेल से लाते थे, लेकिन कपड़े धोने और नहाने के लिए सुनार नदी के पीपल घाट पर जाना पड़ता था। किशोरावस्था में वे नदी में नहाते थे और उसी घाट पर स्थित प्राचीन जीर्ण-शीर्ण गणेश जी के मंदिर में जाकर जल अर्पण कर प्रार्थना करते थे। भगवान की असीम कृपा से प्रार्थना स्वीकार हुई और कुछ समय बाद वे आर्थिक रूप से सक्षम हुए। सिनेमा खोला और आय होने पर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। आज यह मंदिर एक तीर्थ स्थल के रूप में स्थापित है। वर्तमान में भी पं. भार्गव नित्य प्रति दिन सुबह-शाम भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं। गढ़ाकोटा स्थित निवास स्थान पर भी विघ्नहर्ता गणेश की प्रतिमा स्थापित है।
ये भी पढ़ें: इस बार कम बारिश, क्या सितंबर बुझाएगा इंदौर की प्यास? अश्विन मास से 14 इंच बरसात की आस
कानपुर के विशेष पत्थरों से निर्मित अष्ट स्वरूप प्रतिमाएं
बताया गया कि जिन शिलाओं से अयोध्या में भगवान राम जी की प्रतिमा का निर्माण हुआ है, उन्हीं शिलाओं से पीपल घाट मंदिर में स्थापित भगवान गणोश की प्रतिमाओं को बनाया गया है। कानपुर से पत्थर लाकर उन्हें जयपुर में लगभग आठ महीने में भगवान गणेश के आठ रूपों का स्वरूप दिया गया। इन प्रतिमाओं का स्वरूप हूबहू महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों पर विराजमान अष्टविनायक गणेश जी की प्रतिमाओं जैसा ही है।
ये भी पढ़ें: 26 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, आठ इंच तक गिर सकता है पानी, आगे कैसा रहेगा मौसम?
पद्मश्री आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने निकाला मुहूर्त, कराई प्राणप्रतिष्ठा
मूर्तियां बनकर तैयार होने के बाद उनकी प्राणप्रतिष्ठा के लिए विशेष विचार-विमर्श किया गया। प्रतिमाओं का निर्माण करना और उनकी पूजा-अर्चना करना अपेक्षाकृत सरल है, लेकिन उनकी विधिवत प्राणप्रतिष्ठा करना अत्यंत कठिन और महत्वपूर्ण कार्य होता है। यहां आठ प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा होनी थी। इसके लिए काशी के प्रसिद्ध विद्वान आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राणप्रतिष्ठा व काशी विश्वनाथ मंदिर के नव्य-भव्य धाम के लोकार्पण का मुहूर्त भी निकाला था। केंद्र सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है। उनके निर्देशन में आठ दिवसीय प्राणप्रतिष्ठा संपन्न हुई।
Trending Videos
पीपल घाट मंदिर परिसर में भगवान गणेश
मयूरेश्वर, सिद्धिविनायक, विघ्नहर, गिरिजात्मज, चिंतामणि, बल्लाळेश्वर, वरदविनायक और महागणपति स्वरूप में विराजमान हैं। मयूरेश्वर गणेश जी के दर्शन से शत्रु बाधा और भय दूर होता है, साथ ही जीवन में साहस और विजय की प्राप्त होती है। सिद्धिविनायक गणेश जी की पूजा से सिद्धियां और सफलता प्राप्त होती हैं। विघ्नहर स्वरूप के दर्शन से जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और कार्य सिद्ध होते हैं। गिरिजात्मज गणेश जी के दर्शन से संतान सुख की प्राप्ति होती है और पुत्र-पौत्र की दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। चिंतामणि गणेश जी के दर्शन से मन की चिंताएं समाप्त होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बल्लाळेश्वर गणेश जी के सच्चे मन से दर्शन करने पर भक्ति और अटूट विश्वास की शक्ति प्राप्त होती है, जिससे पारिवारिक जीवन सुखमय होता है। वरदविनायक गणेश जी भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और धन-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। महागणपति गणेश जी के दर्शन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और भक्त शक्ति एवं पराक्रम से परिपूर्ण होता है। धार्मिक मान्यता है कि अष्टविनायक के एक साथ दर्शन करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसी कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान गणेश की आराधना करते हैं।
गणेशोत्सव के दौरान विशेष आयोजन
गणेशोत्सव पर्व के अवसर पर पीपल घाट मंदिर में भव्य सजावट की गई है। यहां संचालित गणेश संस्कृत विद्यालय के बटुक ब्राह्मण प्रतिदिन प्रातः, दोपहर और सायं विशेष पूजन-अर्चन, आरती एवं भजन संध्या का आयोजन कर रहे हैं। दर्शनार्थियों को भगवान के विभिन्न स्वरूपों के बारे में मार्गदर्शन दिया जा रहा है। नगर सहित आस-पास के ग्रामीण अंचलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर अष्टविनायक के दर्शन कर रहे हैं। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि गणेशोत्सव पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। घाट परिसर में प्रकाश व्यवस्था, जलपान की व्यवस्था तथा सुरक्षा प्रबंधन भी किया गया है।
प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार की कहानी
पं. गोपाल भार्गव बताते हैं कि किशोरावस्था में नगर में पानी की बड़ी समस्या रहती थी। उस समय पीने का पानी कुओं और ट्यूबवेल से लाते थे, लेकिन कपड़े धोने और नहाने के लिए सुनार नदी के पीपल घाट पर जाना पड़ता था। किशोरावस्था में वे नदी में नहाते थे और उसी घाट पर स्थित प्राचीन जीर्ण-शीर्ण गणेश जी के मंदिर में जाकर जल अर्पण कर प्रार्थना करते थे। भगवान की असीम कृपा से प्रार्थना स्वीकार हुई और कुछ समय बाद वे आर्थिक रूप से सक्षम हुए। सिनेमा खोला और आय होने पर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। आज यह मंदिर एक तीर्थ स्थल के रूप में स्थापित है। वर्तमान में भी पं. भार्गव नित्य प्रति दिन सुबह-शाम भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं। गढ़ाकोटा स्थित निवास स्थान पर भी विघ्नहर्ता गणेश की प्रतिमा स्थापित है।
ये भी पढ़ें: इस बार कम बारिश, क्या सितंबर बुझाएगा इंदौर की प्यास? अश्विन मास से 14 इंच बरसात की आस
कानपुर के विशेष पत्थरों से निर्मित अष्ट स्वरूप प्रतिमाएं
बताया गया कि जिन शिलाओं से अयोध्या में भगवान राम जी की प्रतिमा का निर्माण हुआ है, उन्हीं शिलाओं से पीपल घाट मंदिर में स्थापित भगवान गणोश की प्रतिमाओं को बनाया गया है। कानपुर से पत्थर लाकर उन्हें जयपुर में लगभग आठ महीने में भगवान गणेश के आठ रूपों का स्वरूप दिया गया। इन प्रतिमाओं का स्वरूप हूबहू महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों पर विराजमान अष्टविनायक गणेश जी की प्रतिमाओं जैसा ही है।
ये भी पढ़ें: 26 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, आठ इंच तक गिर सकता है पानी, आगे कैसा रहेगा मौसम?
पद्मश्री आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने निकाला मुहूर्त, कराई प्राणप्रतिष्ठा
मूर्तियां बनकर तैयार होने के बाद उनकी प्राणप्रतिष्ठा के लिए विशेष विचार-विमर्श किया गया। प्रतिमाओं का निर्माण करना और उनकी पूजा-अर्चना करना अपेक्षाकृत सरल है, लेकिन उनकी विधिवत प्राणप्रतिष्ठा करना अत्यंत कठिन और महत्वपूर्ण कार्य होता है। यहां आठ प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा होनी थी। इसके लिए काशी के प्रसिद्ध विद्वान आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राणप्रतिष्ठा व काशी विश्वनाथ मंदिर के नव्य-भव्य धाम के लोकार्पण का मुहूर्त भी निकाला था। केंद्र सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है। उनके निर्देशन में आठ दिवसीय प्राणप्रतिष्ठा संपन्न हुई।




कमेंट
कमेंट X