Mahashivratri 2026: सतना के गैवीनाथ धाम में खंडित शिवलिंग अनोखी आस्था का केंद्र, बड़ी तादाद में पहुंचे भक्त
Mahashivratri 2026: सतना के बिरसिंहपुर स्थित गैवीनाथ धाम में खंडित शिवलिंग की पूजा होती है। इसे महाकालेश्वर का उपलिंग माना जाता है। सावन और महाशिवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर आस्था, मान्यता और ऐतिहासिक कथा से जुड़ा प्रमुख धार्मिक केंद्र है।
विस्तार
मध्य प्रदेश के सतना जिले से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित बिरसिंहपुर कस्बे में भगवान शिव का एक अनोखा और चमत्कारी मंदिर स्थापित है, जिसे गैवीनाथ धाम के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर अपनी विशेषता के कारण पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां खंडित (टूटी हुई) शिवलिंग की पूजा-अर्चना की जाती है।
मान्यता है कि यह शिवलिंग स्वयंभू है और इसे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का उपलिंग माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां चारों धाम का जल अर्पित करने से चारधाम यात्रा का पुण्य प्राप्त होता है।
खंडित शिवलिंग की पूजा क्यों?
स्थानीय किवदंती के अनुसार वर्ष 1602 ईस्वी में मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर पर आक्रमण कर शिवलिंग को खंडित कर दिया था। किंतु शिवभक्तों की आस्था कभी कम नहीं हुई। आज भी उसी खंडित स्वरूप में भगवान शिव की पूजा होती है। भक्तों का मानना है कि भगवान भोलेनाथ खंडित रूप में भी अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि प्रत्येक सोमवार को यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भीड़
सावन माह और महाशिवरात्रि के अवसर पर गैवीनाथ धाम में विशेष रौनक देखने को मिलती है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और विशेष पूजन करते हैं। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहता है।
पौराणिक कथा और मंदिर की स्थापना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान महाकाल ने राजा वीर सिंह को स्वप्न में दर्शन देकर देवपुर में प्रकट होने की बात कही थी। उसी दौरान बिरसिंहपुर निवासी गैवी यादव के घर एक चमत्कारी घटना घटित हुई, जहां चूल्हे से शिवलिंग का स्वरूप प्रकट होता था। राजा को जब यह बात ज्ञात हुई तो उन्होंने उस स्थान को खाली करवाकर भव्य मंदिर का निर्माण कराया। भगवान की आज्ञा अनुसार मंदिर का नाम गैवीनाथ धाम रखा गया। तभी से भगवान शिव यहां गैवीनाथ के नाम से पूजे जाते हैं।
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मंदिर परिसर की विशेषताएं
एक ओर खंडित शिवलिंग विराजमान है, दूसरी ओर माता पार्वती का मंदिर स्थित है। दोनों मंदिरों के मध्य एक पवित्र तालाब मौजूद है। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु “गठजोड़” की परंपरा निभाते हैं।
गैवीनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और चमत्कार का प्रतीक है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु अपने मन में श्रद्धा और विश्वास लेकर आता है और भगवान शिव की कृपा से संतुष्ट होकर लौटता है। सतना जिले की धार्मिक पहचान में गैवीनाथ धाम का विशेष स्थान है, जो खंडित शिवलिंग की अनूठी पूजा परंपरा के कारण आज भी श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
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