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Rudraksh Mahotsav: कुबेरेश्वर धाम पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री, बोले- गुरु का कर्ज नहीं रखा जाता, भावुक हुए श्रद्ध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Tue, 17 Feb 2026 09:26 PM IST
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सार
सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में शिव महापुराण कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और पंडित प्रदीप मिश्रा एक मंच पर नजर आए। दोनों संतों ने सनातन धर्म, गुरु-शिष्य परंपरा और भक्ति का संदेश दिया। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में धाम आस्था और उत्साह से गुंजायमान रहा।
दो संतों का ऐतिहासिक मिलन
- फोटो : credit
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विस्तार
सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में मंगलवार को आध्यात्मिक इतिहास का एक अविस्मरणीय क्षण देखने को मिला, जब बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा में शामिल हुए। दोनों संतों के मिलन ने श्रद्धालुओं के दिलों को भक्ति से भर दिया।
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कुबेरेश्वर धाम इन दिनों मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। शिव महापुराण कथा के चलते यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। हर दिशा से “हर-हर महादेव” और “जय श्रीराम” के उद्घोष गूंज रहे हैं। दूर-दूर से आए भक्त नंगे पांव धाम की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं, मानो हर कदम शिव की ओर समर्पण हो। इस भव्य आयोजन का सबसे भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण तब आया, जब मंच पर एक साथ दिखाई दिए पंडित प्रदीप मिश्रा और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री। जैसे ही धीरेंद्र शास्त्री मंच पर पहुंचे, पूरा पंडाल तालियों, जयकारों और शंखनाद से गूंज उठा। श्रद्धालुओं को ऐसा लगा मानो दो युगपुरुषों का मिलन हो रहा हो।
“मैं गुरु का कर्ज उतारने आया हूं”
धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से कहा कि मैं आज यहां अपना कर्ज उतारने आया हूं। महाराज जी हमारे बागेश्वर धाम आए थे, आज हम उनके धाम आ गए। हम संत लोग कर्ज रखते नहीं, और गुरु का कर्ज तो कभी रख ही नहीं सकते। इन शब्दों ने पूरे पंडाल को भावनाओं से भर दिया। लोग इस दृश्य को गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल बता रहे थे। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कुबेरेश्वर धाम की भूमि अत्यंत पावन है और यहां आकर उनकी आत्मा प्रसन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि गुरु जी की कथा अपने शहर में सुनना सौभाग्य है, लेकिन कुबेरेश्वर धाम आकर सुनना परम सौभाग्य है। उन्होंने भक्तों को हनुमान और शिव भक्ति का मार्ग दिखाया।
सनातन धर्म को बचाने का आह्वान
पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने उद्बोधन में समाज को चेताते हुए कहा कि आज का युवा वर्ग मोबाइल और सोशल मीडिया में इतना उलझ गया है कि वह अपने ही धर्मग्रंथों से दूर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले टीवी कम थे, पुस्तकें ज्यादा थीं। आज मोबाइल ज्यादा हैं, पुस्तकें कम हैं। हम अपने वेद, उपनिषद और शास्त्र छोड़कर दूसरों की किताबों के पीछे भाग रहे हैं, जो हमारे अस्तित्व के लिए खतरा है। कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने शिव-सती प्रसंग सुनाते हुए बताया कि शिव से रिश्ता केवल एक जन्म का नहीं, बल्कि जन्मों-जन्मों का है। उन्होंने कहा कि महादेव ने सती के 88 लाख जन्म देखे हैं, जो यह सिद्ध करता है कि शिव से जुड़ाव अमर है। सांसारिक रिश्ते मृत्यु के साथ समाप्त हो जाते हैं, लेकिन शिव से रिश्ता कभी समाप्त नहीं होता।
ये भी पढ़ें- 'अंजाम पता था फिर भी बच्चों को बांटा जहर, राहत दी तो उठ जाएगा भरोसा', हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
रात्रि का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
उन्होंने शिवरात्रि और नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रात्रि का अर्थ केवल अंधकार नहीं, बल्कि आशा का संकेत है। जैसे रात के बाद सवेरा तय है, वैसे ही जीवन के संघर्षों के बाद सुख भी निश्चित है। यह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जीवन का वैज्ञानिक सत्य भी है। पंडित जी ने आधुनिक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि तितली के पंख फड़फड़ाने से दुनिया प्रभावित हो सकती है, तो श्रद्धा से चढ़ाया गया एक लोटा जल भी जीवन बदल सकता है। उन्होंने कहा कि भक्ति में छोटा प्रयास भी बड़ा फल देता है, बस उसमें विश्वास होना चाहिए।
पुस्तकों का महत्व और युवाओं से अपील
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर ज्ञानवर्धक पुस्तकों को पढ़ें। “ग्रंथों में वह शक्ति है जो पीढ़ियों को दिशा देती है। सोशल मीडिया क्षणिक आनंद देता है, लेकिन पुस्तकें जीवन भर का प्रकाश देती हैं।” भक्ति की शक्ति समझाने के लिए पंडित मिश्रा ने धनिया नामक भक्त की कथा सुनाई, जिसे भोलेनाथ ने उसकी निष्काम भक्ति के कारण मंदिर की सीढ़ियों पर ही दर्शन दे दिए थे। वहीं मुद्गल ऋषि की कथा से उन्होंने दान और अतिथि सत्कार का महत्व बताया, जहां स्वयं शिव ने परीक्षा लेकर पूरे परिवार को अमर कर दिया।
अखण्ड हिन्द फौज का सम्मान
कुबेरेश्वर धाम में सेवा कार्य में जुटे अखण्ड हिन्द फौज के 500 कैडेटों को मंच से सम्मानित किया गया। सभी को जैकेट भेंट की गई। महानिदेशक राजेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि यह सम्मान सेवा की भावना को और मजबूत करेगा।
फूलरा दूज पर होगा विशेष शृंगार
मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि फूलरा दूज के अवसर पर रुद्राक्ष शिवलिंग का भव्य शृंगार किया जाएगा। सुबह विशेष आरती और शाम को महाआरती होगी। लाखों श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भोजन, चिकित्सा और विश्राम की भव्य व्यवस्था की गई है। कुबेरेश्वर धाम में हुआ यह संत मिलन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत तस्वीर बन गया। गुरु-शिष्य परंपरा, भक्ति, विश्वास और सेवा का यह संगम आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश दे गया कि सच्ची शक्ति धन में नहीं, बल्कि श्रद्धा और संस्कारों में है।
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“मैं गुरु का कर्ज उतारने आया हूं”
धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से कहा कि मैं आज यहां अपना कर्ज उतारने आया हूं। महाराज जी हमारे बागेश्वर धाम आए थे, आज हम उनके धाम आ गए। हम संत लोग कर्ज रखते नहीं, और गुरु का कर्ज तो कभी रख ही नहीं सकते। इन शब्दों ने पूरे पंडाल को भावनाओं से भर दिया। लोग इस दृश्य को गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल बता रहे थे। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कुबेरेश्वर धाम की भूमि अत्यंत पावन है और यहां आकर उनकी आत्मा प्रसन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि गुरु जी की कथा अपने शहर में सुनना सौभाग्य है, लेकिन कुबेरेश्वर धाम आकर सुनना परम सौभाग्य है। उन्होंने भक्तों को हनुमान और शिव भक्ति का मार्ग दिखाया।
सनातन धर्म को बचाने का आह्वान
पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने उद्बोधन में समाज को चेताते हुए कहा कि आज का युवा वर्ग मोबाइल और सोशल मीडिया में इतना उलझ गया है कि वह अपने ही धर्मग्रंथों से दूर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले टीवी कम थे, पुस्तकें ज्यादा थीं। आज मोबाइल ज्यादा हैं, पुस्तकें कम हैं। हम अपने वेद, उपनिषद और शास्त्र छोड़कर दूसरों की किताबों के पीछे भाग रहे हैं, जो हमारे अस्तित्व के लिए खतरा है। कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने शिव-सती प्रसंग सुनाते हुए बताया कि शिव से रिश्ता केवल एक जन्म का नहीं, बल्कि जन्मों-जन्मों का है। उन्होंने कहा कि महादेव ने सती के 88 लाख जन्म देखे हैं, जो यह सिद्ध करता है कि शिव से जुड़ाव अमर है। सांसारिक रिश्ते मृत्यु के साथ समाप्त हो जाते हैं, लेकिन शिव से रिश्ता कभी समाप्त नहीं होता।
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रात्रि का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
उन्होंने शिवरात्रि और नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रात्रि का अर्थ केवल अंधकार नहीं, बल्कि आशा का संकेत है। जैसे रात के बाद सवेरा तय है, वैसे ही जीवन के संघर्षों के बाद सुख भी निश्चित है। यह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जीवन का वैज्ञानिक सत्य भी है। पंडित जी ने आधुनिक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि तितली के पंख फड़फड़ाने से दुनिया प्रभावित हो सकती है, तो श्रद्धा से चढ़ाया गया एक लोटा जल भी जीवन बदल सकता है। उन्होंने कहा कि भक्ति में छोटा प्रयास भी बड़ा फल देता है, बस उसमें विश्वास होना चाहिए।
पुस्तकों का महत्व और युवाओं से अपील
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर ज्ञानवर्धक पुस्तकों को पढ़ें। “ग्रंथों में वह शक्ति है जो पीढ़ियों को दिशा देती है। सोशल मीडिया क्षणिक आनंद देता है, लेकिन पुस्तकें जीवन भर का प्रकाश देती हैं।” भक्ति की शक्ति समझाने के लिए पंडित मिश्रा ने धनिया नामक भक्त की कथा सुनाई, जिसे भोलेनाथ ने उसकी निष्काम भक्ति के कारण मंदिर की सीढ़ियों पर ही दर्शन दे दिए थे। वहीं मुद्गल ऋषि की कथा से उन्होंने दान और अतिथि सत्कार का महत्व बताया, जहां स्वयं शिव ने परीक्षा लेकर पूरे परिवार को अमर कर दिया।
अखण्ड हिन्द फौज का सम्मान
कुबेरेश्वर धाम में सेवा कार्य में जुटे अखण्ड हिन्द फौज के 500 कैडेटों को मंच से सम्मानित किया गया। सभी को जैकेट भेंट की गई। महानिदेशक राजेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि यह सम्मान सेवा की भावना को और मजबूत करेगा।
फूलरा दूज पर होगा विशेष शृंगार
मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि फूलरा दूज के अवसर पर रुद्राक्ष शिवलिंग का भव्य शृंगार किया जाएगा। सुबह विशेष आरती और शाम को महाआरती होगी। लाखों श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भोजन, चिकित्सा और विश्राम की भव्य व्यवस्था की गई है। कुबेरेश्वर धाम में हुआ यह संत मिलन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत तस्वीर बन गया। गुरु-शिष्य परंपरा, भक्ति, विश्वास और सेवा का यह संगम आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश दे गया कि सच्ची शक्ति धन में नहीं, बल्कि श्रद्धा और संस्कारों में है।

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