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Sehore News: 11 हजार लीटर दूध से नर्मदा का अभिषेक, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, आस्था पर उठे सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2026 04:17 PM IST
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सार
सातदेव गांव में भव्य महायज्ञ समापन कार्यक्रम के बाद नर्मदा मैया के अभिषेक का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल है। टैंकरों से दूध अर्पित किए जाने के इस वीडियो पर अब कई लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
महायज्ञ के समापन पर नर्मदा का 11 हजार लीटर दूध से अभिषेक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले के भैरूंदा क्षेत्र के सातदेव गांव में आयोजित भव्य महायज्ञ का समापन हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी और 11 हजार लीटर दूध के अभिषेक के साथ हुआ। जहां एक ओर इस आयोजन में आस्था का ज्वार उमड़ा, वहीं दूसरी ओर संसाधनों के उपयोग को लेकर बहस भी छिड़ गई है।
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सातदेव स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर में 21 दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन का समापन बेहद भव्य तरीके से किया गया। अंतिम दिन टैंकरों के माध्यम से 11,000 लीटर दूध लाया गया, जिसे मंत्रोच्चार के बीच नर्मदा नदी में अर्पित किया गया। आयोजकों के अनुसार यह अभिषेक नर्मदा माता की आराधना और क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए किया गया।
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इस पूरे आयोजन के दौरान सातदेव गांव आस्था का केंद्र बना रहा। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचे, जबकि समापन के दिन यह संख्या 30 हजार से अधिक बताई गई। शाम की महाआरती और भंडारे में भी भारी भीड़ उमड़ी।
महायज्ञ की भव्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 21 दिनों में करीब 41 टन हवन सामग्री का उपयोग हुआ। प्रतिदिन 21 क्विंटल सामग्री से हवन किया गया, जिसमें जड़ी-बूटियां, सूखे मेवे और सोना-चांदी तक की आहुति दी गई। समापन समारोह का मुख्य आकर्षण 21 हजार दीपों से सजी महाआरती रही। करीब 5 एकड़ में बने पांडाल में दीपों की रोशनी ने अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर इसमें शामिल हुए।
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ड्रोन वीडियो ने छेड़ी सोशल मीडिया पर बहस
इस भव्य समापन आयोजन का ड्रोन वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें टैंकरों के जरिये हजारों लीटर दूध नर्मदा में बहाए जाने के दृश्य दिखाई दिए। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे आस्था का प्रतीक बताया तो कई लोगों ने इसे दूध की बर्बादी बताते हुए तीखे सवाल दागे।
दादा जी बाबा के सान्निध्य में आयोजन
यह आयोजन श्री धूनीवाले दादाजी महाराज के सान्निध्य में हुआ, जिसमें 21 दिनों तक प्रतिदिन 1108 लीटर दूध से अभिषेक किया गया, जबकि समापन पर इसे बढ़ाकर 11 हजार लीटर कर दिया गया। आयोजकों का कहना है कि बरसों से यह परंपरा चली आ रही है।
पातालेश्वर महादेव मंदिर की मान्यता
बता दें कि सातदेव क्षेत्र को प्राचीनकाल से सप्त ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है। मान्यता है कि यहां सप्तऋषियों की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव पातालेश्वर महादेव के रूप में प्रकट हुए। मंदिर में स्थित शिवलिंग की गहराई आज भी रहस्य बनी हुई है, जो इस स्थान की धार्मिक आस्था को और गहरा बनाती है।

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