Sehore News: डीजल का काला खेल बेनकाब, 2640 किलो अवैध भंडारण जब्त; इधर गुस्सा उतारने सड़क पर उतर रहे किसान
सीहोर जिले के छीपानेर गांव में प्रशासन ने एक घर से 2640 किलोग्राम डीजल का अवैध भंडारण जब्त किया है। कार्रवाई के बीच जिले में डीजल संकट से परेशान किसानों ने भैरूंदा-रेहटी मार्ग पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, सोशल मीडिया पर पेट्रोल पंपों से केनों में डीजल वितरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
सीहोर जिले के छीपानेर गांव में प्रशासन ने एक घर से 2640 किलोग्राम डीजल का अवैध भंडारण जब्त किया है। कार्रवाई के बीच जिले में डीजल संकट से परेशान किसानों ने भैरूंदा-रेहटी मार्ग पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, सोशल मीडिया पर पेट्रोल पंपों से केनों में डीजल वितरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
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सीहोर जिले में डीजल की किल्लत अब सिर्फ आपूर्ति का मामला नहीं रह गया है। यह अवैध कारोबार, प्रशासनिक कार्रवाई और किसानों के बढ़ते आक्रोश का बड़ा मुद्दा बन चुका है। भैरूंदा क्षेत्र के ग्राम छीपानेर में प्रशासन ने रविवार रात को एक घर से 2640 किलोग्राम डीजल का अवैध भंडारण जब्त किया है। इस कार्रवाई ने जहां डीजल के काले कारोबार पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर बोवनी की तैयारी में जुटे किसानों का गुस्सा भी सड़कों पर फूटने लगा है।
भैरूंदा एसडीएम सुधीर कुशवाहा ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि ग्राम छीपानेर में एक मकान में बड़ी मात्रा में डीजल का अवैध भंडारण किया गया है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने तत्काल जांच के निर्देश दिए। इसके बाद नायब तहसीलदार आरती सोलंकी, राजस्व निरीक्षक गोपालपुर और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। जांच शुरू होते ही टीम के सामने जो तस्वीर आई, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया। मकान के भीतर एक-दो नहीं बल्कि 12 बड़ी टंकियों में डीजल भरा हुआ मिला। प्रत्येक टंकी में करीब 220 किलोग्राम डीजल था। कुल मिलाकर 2640 किलोग्राम डीजल का भंडारण पाया गया।
पूछताछ में खुला डीजल सप्लाई का राज
मौके पर मौजूद शिवम गंधवाने पिता रामचन्द्र गंधवाने से पूछताछ की गई। प्रारंभिक पूछताछ में उसने बताया कि डीजल सीहोर स्थित GRIL इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से खरीदा गया था और इसे ग्राहकों को बेचने के उद्देश्य से रखा गया था। प्रशासन ने इसे नियमों के विरुद्ध माना और पूरे डीजल को जब्त कर लिया। जब्त डीजल को सुरक्षित रखने के लिए छीपानेर किसान सेवा केन्द्र की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और आगे कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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डीजल संकट के बीच किसानों का सब्र टूटा
उधर जिले में डीजल की कमी से परेशान किसानों का गुस्सा भी चरम पर पहुंच गया। बोवनी का समय शुरू होने के कारण खेतों में ट्रैक्टर, पंप और कृषि उपकरणों की मांग बढ़ गई है। ऐसे समय पर डीजल की कमी किसानों के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। शनिवार को कई किसान सुबह से ही पेट्रोल पंपों पर डीजल लेने पहुंचे थे। आरोप है कि पूरे दिन इंतजार के बावजूद पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिला। इससे नाराज किसान शाम को रेहटी-भैरूंदा मार्ग पर कृषि फार्म के सामने एकत्र हो गए और सड़क जाम कर दी।
सड़क पर लगी वाहनों की लंबी कतार
किसानों के चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई यात्री घंटों तक फंसे रहे। प्रदर्शनकारी किसानों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जब खेती का सबसे महत्वपूर्ण समय चल रहा है, तब उन्हें डीजल के लिए भटकना पड़ रहा है। किसानों का कहना था कि यदि समय पर डीजल नहीं मिला तो बोवनी प्रभावित होगी और इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा। उनकी मांग थी कि किसानों के लिए डीजल की अलग व्यवस्था की जाए और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। चक्काजाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। बुदनी एसडीओपी रवि शर्मा ने किसानों से चर्चा कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया।
सोशल मीडिया पर पेट्रोल पंप पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के बीच रविवार रात बिजोरी की पूर्व सरपंच दीपेश राठौर ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें साझा कर नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीहोर के एक पेट्रोल पंप पर बड़ी संख्या में केनों में डीजल दिया जा रहा था, जबकि किसानों को सीमित मात्रा में डीजल देने का हवाला देकर टाल दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने स्वयं एक पिकअप वाहन में 100 से अधिक केन भरकर ले जाते हुए देखे। उनके इस आरोप के बाद डीजल वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

सीहोर में डीजल की कालाबाजारी का पर्दाफाश

इन टंकियों में भरा था डीजल

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