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Shahdol: डेढ़ महीने तक दहशत फैलाने वाला दंतैल हाथी का आखिरकार रेस्क्यू, छत्तीसगढ़ से पहुंचा था; जानें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल Published by: शहडोल ब्यूरो Updated Sat, 23 May 2026 06:04 PM IST
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सार

छतरपुर की महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में बीएसएफ जवान की जगह उसका भाई बीएड परीक्षा देता पकड़ा गया। आरोपी पहले तीन पेपर भी दे चुका था। चौथे पेपर में खुलासे के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, जबकि छात्रों ने प्रदर्शन किया।

The tusker that terrorized the elephant for a month and a half has finally been rescued and sent Bandhavgarh
रेस्क्यू करते वन विभाग के अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अनूपपुर और शहडोल जिले के ग्रामीण इलाकों में पिछले करीब डेढ़ महीने से दहशत का कारण बना बिगड़ैल दंतैल हाथी आखिरकार वन विभाग की पकड़ में आ गया। शनिवार को केशवाही वन परिक्षेत्र के बेलिया और रामपुर जंगल क्षेत्र में चले विशेष अभियान के दौरान बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम ने हाथी को सफलतापूर्वक काबू कर लिया। और उसे बांधवगढ़ ले जाया गया है।



रेस्क्यू ऑपरेशन में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और संजय गांधी टाइगर रिजर्व की संयुक्त टीम शामिल रही। अभियान के दौरान सीसीएफ, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, डीएफओ सहित वन विभाग के कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। टीम के साथ चार प्रशिक्षित हाथियों की भी मदद ली गई, जिनमें रामा, लक्ष्मण और सूर्या प्रमुख रहे।
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एक दिन पहले तोड़ दिया था पिंजरा
गौरतलब है कि शुक्रवार को रेस्क्यू अभियान के दौरान दंतैल हाथी ने पिंजरे को पलट दिया था और बाहर निकलकर जंगल की ओर भाग गया था। इसके बाद वन विभाग ने पूरी रात निगरानी रखी और शनिवार को दोबारा अभियान चलाकर हाथी को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की। वन विभाग के अनुसार यह हाथी पिछले डेढ़ महीने से लगातार गांवों में घुसकर उत्पात मचा रहा था। हाथी के हमले में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 पालतू मवेशी भी मारे गए। दो बच्चों समेत तीन लोग घायल हुए हैं। रात के समय हाथी गांवों में पहुंचकर फसलों और घरों के आसपास नुकसान पहुंचाता था, जिससे ग्रामीण रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर थे। हाथी के आतंक से करीब 25 गांव प्रभावित थे।
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छत्तीसगढ़ से पहुंचा था मध्यप्रदेश
वन अधिकारियों के मुताबिक 18 से 22 वर्ष उम्र का यह दंतैल हाथी मूल रूप से छत्तीसगढ़ के कटघोरा वन क्षेत्र के हाथियों के दल का हिस्सा था। माना जा रहा है कि झुंड से अलग होने के बाद वह मरवाही होते हुए 2 अप्रैल को मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में दाखिल हुआ और फिर जैतहरी, अमलाई व केशवाही वन क्षेत्रों में लगातार विचरण करता रहा। लगातार दहशत और हमलों के बीच ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ था। हाथी के पकड़े जाने के बाद अब प्रभावित गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है।

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