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MP में तोप चोरी मामला: हथियारबंद बदमाशों की कहानी निकली गलत, चौकीदार ने बदला बयान; जांच में सामने आया नया सच
Fri, 17 Jul 2026 03:35 PM IST
शिवपुरी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
Published by: शिवपुरी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 03:35 PM IST
सार
नरवर किले से 16वीं शताब्दी की एक दुर्लभ तोप चोरी होने के मामले में नया मोड़ आ गया है। शुरुआती तौर पर हथियारबंद बदमाशों द्वारा लूट की बात कही गई थी, लेकिन पुलिस जांच में यह दावा सही नहीं पाया गया। चौकीदार के बदले बयान के बाद अब पुलिस चोरी के पूरे घटनाक्रम की नए सिरे से जांच कर रही है।
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शिवपुरी में तोप चोरी का मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एतिहासिक नरवर किले से 16वीं शताब्दी की एक दुर्लभ तोप चोरी होने का मामला सामने आया है। शुरुआती जांच में जिस तरह की कहानी सामने आई थी, वह बाद में पूरी तरह बदल गई। पहले दावा किया गया था कि 25 से 30 हथियारबंद बदमाश चौकीदार को धमकाकर तोप लूटकर ले गए, लेकिन पुलिस जांच में यह दावा सही नहीं पाया गया।
जानकारी के मुताबिक, भगवान राम के पुत्र कुश की राजधानी और राजा नल-दमयंती की पावन स्थली माने जाने वाले नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की 14 एतिहासिक तोपें रखी थीं। इनमें से एक तोप चोरी हो गई है, जबकि बाकी 13 तोपें सुरक्षित हैं।
चौकीदार बाल किशन ने अपना बयान बदला
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब चौकीदार बाल किशन ने अपना बयान बदल दिया। उसने पुलिस और पुरातत्व विभाग को बताया कि पांच जुलाई को कुछ अज्ञात लोगों ने तोप को उसके स्थान से नीचे गिरा दिया था। इसकी सूचना उसने तत्काल विभाग को दे दी थी। इसके बाद 15 जुलाई की रात करीब आठ बजे वह किला छोड़कर अपने घर चला गया। इसी दौरान अज्ञात चोर नीचे पड़ी तोप उठाकर ले गए।
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'शिकायत नरवर थाने में दर्ज'
राज्य पुरातत्व विभाग के उपसंचालक पी.सी. महोबिया ने बताया कि घटना के समय चौकीदार ड्यूटी पर मौजूद नहीं था, जिससे चोरी की वारदात हो सकी। उन्होंने कहा कि 5 जुलाई को तोप नीचे गिराए जाने की सूचना मिलने के बाद विभाग अपनी ओर से कार्रवाई कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही चोरी हो गई। मामले की शिकायत नरवर थाने में दर्ज करा दी गई है।
ये भी पढ़ें- भोजशाला: जुम्मे की नमाज के लिए मुस्लिम पक्ष को नहीं मिली जगह; हिंदू पक्ष ने कहा- 300 मीटर के बाहर मिले अनुमति
पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही
शुक्रवार को शिवपुरी पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पुलिस को मौके से रजाई, गद्दा, पाइप और तोप को ले जाने के निशान मिले हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।
पुरातत्व विभाग ने समीक्षा शुरू कर दी
बताया जा रहा है कि चोरी हुई तोप अष्टधातु के विशेष मिश्रण से बनी थी। उस पर राजचिह्न के साथ फारसी और देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित थे, जिससे उसका एतिहासिक महत्व और बढ़ जाता है। इस घटना के बाद पुरातत्व विभाग ने नरवर किले की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। वहीं, पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों का पता लगाकर ऐतिहासिक धरोहर को बरामद करने का प्रयास किया जाएगा।
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जानकारी के मुताबिक, भगवान राम के पुत्र कुश की राजधानी और राजा नल-दमयंती की पावन स्थली माने जाने वाले नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की 14 एतिहासिक तोपें रखी थीं। इनमें से एक तोप चोरी हो गई है, जबकि बाकी 13 तोपें सुरक्षित हैं।
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चौकीदार बाल किशन ने अपना बयान बदला
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब चौकीदार बाल किशन ने अपना बयान बदल दिया। उसने पुलिस और पुरातत्व विभाग को बताया कि पांच जुलाई को कुछ अज्ञात लोगों ने तोप को उसके स्थान से नीचे गिरा दिया था। इसकी सूचना उसने तत्काल विभाग को दे दी थी। इसके बाद 15 जुलाई की रात करीब आठ बजे वह किला छोड़कर अपने घर चला गया। इसी दौरान अज्ञात चोर नीचे पड़ी तोप उठाकर ले गए।
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'शिकायत नरवर थाने में दर्ज'
राज्य पुरातत्व विभाग के उपसंचालक पी.सी. महोबिया ने बताया कि घटना के समय चौकीदार ड्यूटी पर मौजूद नहीं था, जिससे चोरी की वारदात हो सकी। उन्होंने कहा कि 5 जुलाई को तोप नीचे गिराए जाने की सूचना मिलने के बाद विभाग अपनी ओर से कार्रवाई कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही चोरी हो गई। मामले की शिकायत नरवर थाने में दर्ज करा दी गई है।
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पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही
शुक्रवार को शिवपुरी पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पुलिस को मौके से रजाई, गद्दा, पाइप और तोप को ले जाने के निशान मिले हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।
पुरातत्व विभाग ने समीक्षा शुरू कर दी
बताया जा रहा है कि चोरी हुई तोप अष्टधातु के विशेष मिश्रण से बनी थी। उस पर राजचिह्न के साथ फारसी और देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित थे, जिससे उसका एतिहासिक महत्व और बढ़ जाता है। इस घटना के बाद पुरातत्व विभाग ने नरवर किले की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। वहीं, पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों का पता लगाकर ऐतिहासिक धरोहर को बरामद करने का प्रयास किया जाएगा।
