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शिवपुरी थार प्रकरण: नोटिस के तीन दिन, सियासत के कई सवाल, क्या लोधी पर गिरेगी गाज या फिर वोट बैंक देगा बचाव?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
Published by: Sabahat Husain
Updated Thu, 23 Apr 2026 06:16 PM IST
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सार
भाजपा विधायक प्रीतम लोधी आईपीएस से विवाद के बाद नोटिस झेल रहे हैं। इधर, मजबूत लोधी वोट बैंक के कारण भाजपा के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं। क्योंकि 30 साल बाद पार्टी पिछोर विधानसभा सीट जीती है। आइये जानते हैं समीकरण।
प्रीतम लोधी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शिवपुरी जिले के पिछोर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी करैरा में पदस्थ एक आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ से विवाद के बाद चर्चा में हैं। आईपीएस आयुष जाखड़ के घर में गोबर के कंड़े भरे जाने के बयान के बाद प्रीतम लोधी को भाजपा ने नोटिस जारी कर दिया है। पार्टी अनुशासन समिति ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। तीन दिन में विधायक प्रीतम लोधी को अपना जवाब देना है। अब पार्टी द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद यह मामला और तूल पकड़ गया है।
एक बड़े वर्ग की नाराजगी पड़ सकती है भारी
शिवपुरी के करैरा में 16 अप्रैल को आईपीएस और करैरा में पदस्थ एसडीओपी आयुष जाखड़ को कथित तौर पर धमकी देने के बाद लोधी फिर विवादों में घिर गए हैं। पार्टी अनुशासन समिति ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगे की कार्रवाई इतनी आसान नहीं होगी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पिछोर विधायक प्रीतम लोधी का अपना एक मजबूत लोधी वोट बैंक है, जो शिवपुरी-गुना क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाता है। इसी वोट बैंक के चलते भाजपा अब तक पिछोर विधायक प्रीतम लोधी पर कड़ी कार्रवाई करने से बचती रही है। पार्टी को डर है कि कार्रवाई से एक बड़े वर्ग की नाराजगी मोल लेनी पड़ सकती है, जिसका असर आगामी चुनावों पर पड़ेगा।
25 विधानसभा क्षेत्र लोधी बाहुल्य
बता दें कि मध्य प्रदेश की 25 विधानसभा क्षेत्र लोधी बाहुल्य मानी जाती है। खासकर ग्वालियर चंबल संभाग और बुंदेलखंड की लगभग 25 विधानसभा सीटें ऐसी हैं। यहां पर लोधी वोट बैंक बड़ी संख्या में है और यहां पर लोधी वोट निर्णायक भूमिका में रहता है। शिवपुरी जिले की चार विधानसभा सीटें ही लोधी बाहुल्य हैं, इसलिए भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व भी इस वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए बड़ी कार्रवाई से बचता रहा है।
पढ़ें: भाजपा का विधायक प्रीतम लोधी को कारण बताओ नोटिस, पार्टी अनुशासन के उल्लंघन पर तीन दिन में मांगा जवाब
30 साल बाद जीती है भाजपा पिछोर विधानसभा सीट
शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट की बात की जाए तो जहां से वर्तमान में पिछोर विधायक प्रीतम लोधी विधायक हैं। इस सीट पर भाजपा ने वर्ष 2023 में 30 साल बाद जीती है। पूर्व में यहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता केपी सिंह जीतते हुए आ रहे थे। लेकिन इस बार भाजपा ने यहां लोधी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए प्रीतम लोधी को टिकट दिया।
भाजपा ने एक रणनीति के तौर पर विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से दो महीने पहले ही यहां पर प्रीतम लोधी को मैदान में उतारकर अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था। इस रणनीति के कारण कांग्रेस के दिग्गज नेता केपी सिंह को अपनी सीट बदलनी पड़ी और वह पिछोर से चुनाव लड़ने की वजह शिवपुरी से लड़े। लेकिन शिवपुरी से भी केपी सिंह बुरी तरह हारे। जबकि प्रीतम लोधी ने कांग्रेस के प्रत्याशी अरविंद लोधी को हराया। इस तरह 30 साल बाद भाजपा पिछोर में जीत दर्ज करा पाई।
नोटिस के जवाब पर टिकी सबकी निगाहें
आईपीएस से विवाद के अलावा यह पहला मौका नहीं है जब प्रीतम लोधी अपने बयानों से पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर चुके हों। इससे पहले वे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ टिप्पणी कर भारी विवाद में फंस चुके हैं। तब भी पार्टी ने केवल नोटिस देकर मामला शांत कर दिया था। उनके बयानों से कई बार संगठन को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है, लेकिन हर बार वे कार्रवाई से बच निकलते हैं। फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रीतम लोधी नोटिस का क्या जवाब देते हैं।
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शिवपुरी के करैरा में 16 अप्रैल को आईपीएस और करैरा में पदस्थ एसडीओपी आयुष जाखड़ को कथित तौर पर धमकी देने के बाद लोधी फिर विवादों में घिर गए हैं। पार्टी अनुशासन समिति ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगे की कार्रवाई इतनी आसान नहीं होगी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पिछोर विधायक प्रीतम लोधी का अपना एक मजबूत लोधी वोट बैंक है, जो शिवपुरी-गुना क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाता है। इसी वोट बैंक के चलते भाजपा अब तक पिछोर विधायक प्रीतम लोधी पर कड़ी कार्रवाई करने से बचती रही है। पार्टी को डर है कि कार्रवाई से एक बड़े वर्ग की नाराजगी मोल लेनी पड़ सकती है, जिसका असर आगामी चुनावों पर पड़ेगा।
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25 विधानसभा क्षेत्र लोधी बाहुल्य
बता दें कि मध्य प्रदेश की 25 विधानसभा क्षेत्र लोधी बाहुल्य मानी जाती है। खासकर ग्वालियर चंबल संभाग और बुंदेलखंड की लगभग 25 विधानसभा सीटें ऐसी हैं। यहां पर लोधी वोट बैंक बड़ी संख्या में है और यहां पर लोधी वोट निर्णायक भूमिका में रहता है। शिवपुरी जिले की चार विधानसभा सीटें ही लोधी बाहुल्य हैं, इसलिए भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व भी इस वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए बड़ी कार्रवाई से बचता रहा है।
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30 साल बाद जीती है भाजपा पिछोर विधानसभा सीट
शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट की बात की जाए तो जहां से वर्तमान में पिछोर विधायक प्रीतम लोधी विधायक हैं। इस सीट पर भाजपा ने वर्ष 2023 में 30 साल बाद जीती है। पूर्व में यहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता केपी सिंह जीतते हुए आ रहे थे। लेकिन इस बार भाजपा ने यहां लोधी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए प्रीतम लोधी को टिकट दिया।
भाजपा ने एक रणनीति के तौर पर विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से दो महीने पहले ही यहां पर प्रीतम लोधी को मैदान में उतारकर अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था। इस रणनीति के कारण कांग्रेस के दिग्गज नेता केपी सिंह को अपनी सीट बदलनी पड़ी और वह पिछोर से चुनाव लड़ने की वजह शिवपुरी से लड़े। लेकिन शिवपुरी से भी केपी सिंह बुरी तरह हारे। जबकि प्रीतम लोधी ने कांग्रेस के प्रत्याशी अरविंद लोधी को हराया। इस तरह 30 साल बाद भाजपा पिछोर में जीत दर्ज करा पाई।
नोटिस के जवाब पर टिकी सबकी निगाहें
आईपीएस से विवाद के अलावा यह पहला मौका नहीं है जब प्रीतम लोधी अपने बयानों से पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर चुके हों। इससे पहले वे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ टिप्पणी कर भारी विवाद में फंस चुके हैं। तब भी पार्टी ने केवल नोटिस देकर मामला शांत कर दिया था। उनके बयानों से कई बार संगठन को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है, लेकिन हर बार वे कार्रवाई से बच निकलते हैं। फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रीतम लोधी नोटिस का क्या जवाब देते हैं।

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