{"_id":"6a7687ac319c5029aa022600","slug":"mla-issues-warning-over-damoh-collectors-sons-claim-to-the-amar-shaheed-narayan-das-khare-martyrdom-site-tikamgarh-news-c-1-1-noi1349-4589159-2026-08-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीकमगढ़ में शहीद स्थली की जमीन पर विवाद: सीमांकन में बाउंड्रीवाल-भवन का हिस्सा निजी भूमि पर निकला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टीकमगढ़ में शहीद स्थली की जमीन पर विवाद: सीमांकन में बाउंड्रीवाल-भवन का हिस्सा निजी भूमि पर निकला
Sat, 08 Aug 2026 08:16 AM IST
टीकमगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़
Published by: टीकमगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 08:16 AM IST
सार
टीकमगढ़ में अमर शहीद नारायणदास खरे की शहीद स्थली और मेला ग्राउंड की जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राजस्व विभाग के सीमांकन में शहीद स्थल की बाउंड्रीवाल और सामुदायिक भवन का एक हिस्सा निजी भूमि पर अतिक्रमण बताया गया है।
विज्ञापन
शहीद नारायणदास खरे की स्मृति स्थल पर जमीन का पेच।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
टीकमगढ़ के एकमात्र अमर शहीद नारायणदास खरे की शहीद स्थली और मेला ग्राउंड की भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। राजस्व विभाग द्वारा हाल ही में किए गए सीमांकन में शहीद स्थल की बाउंड्रीवाल और सामुदायिक भवन के एक हिस्से को निजी भूमि पर अतिक्रमण बताया गया है।
विवादित भूमि वर्तमान में दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के पुत्र अभिषेक यादव के नाम दर्ज बताई जा रही है। सीमांकन के बाद क्षेत्र में लोगों में नाराजगी व्याप्त है, वहीं कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जमीन के स्वामित्व की जांच कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद नारायणदास खरे की 1 दिसंबर 1947 को नरोसा नाला के पास हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उनकी स्मृति में यहां शहीद स्थल विकसित किया गया और वर्षों से मेला आयोजित होता आ रहा है। बाद में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमृतलाल फणींद्र की समाधि भी इसी परिसर में बनाई गई। शासन द्वारा इस भूमि को मेला ग्राउंड के रूप में आवंटित किए जाने के बाद यहां बाउंड्रीवाल तथा सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया था।
विज्ञापन
भूमि वर्तमान में अभिषेक यादव के नाम दर्ज
बताया गया है कि 22 जुलाई को दो पटवारियों द्वारा किए गए सीमांकन में खसरा नंबर 137/1 के एक हिस्से पर 97×45, 15×5 तथा 14.5×15.5 फीट क्षेत्र में अतिक्रमण दर्ज किया गया। राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह भूमि वर्तमान में अभिषेक यादव के नाम दर्ज है, जबकि पहले यह उनके पिता प्रताप नारायण यादव के नाम थी।
कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने आरोप लगाया कि संबंधित भूमि वर्ष 1974 में कथित रूप से फर्जी बेचनामे के आधार पर दर्ज हुई थी। उनका कहना है कि उस समय खरीदी गई जमीन की कीमत 90 रुपये से अधिक होने पर स्टांप अनिवार्य था, लेकिन अभिलेखों में इसकी स्थिति संदिग्ध दिखाई देती है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, कार्रवाई रोकने तथा मामले से मुख्यमंत्री को अवगत कराने की बात कही है। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि शहीद स्थल से कोई छेड़छाड़ हुई तो कांग्रेस आंदोलन करेगी और बड़ागांव तथा टीकमगढ़ बंद कराने पर भी विचार करेगी।
ये भी पढ़ें- Ujjain: सूर्य, चंद्रमा, त्रिपुंड, त्रिशूल व त्रिनेत्र से हुआ बाबा श्री महाकाल का शृंगार, दिए दिव्य दर्शन
दमोह कलेक्टर का बयान
इस बीच ग्राम अंतौरा के सरपंच पर भी भूमि खाली कराने का दबाव बनाए जाने की चर्चा है। हालांकि बड़ागांव धसान के तहसीलदार सत्यप्रकाश शुक्ला ने कहा कि सीमांकन का प्रतिवेदन अभी उनके सामने नहीं आया है और रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि विवादित भूमि उनकी पैतृक संपत्ति है और बिना अनुमति वहां बाउंड्री का निर्माण किया गया है।
ये भी पढ़ें- Ujjain: सूर्य, चंद्रमा, त्रिपुंड, त्रिशूल व त्रिनेत्र से हुआ बाबा श्री महाकाल का शृंगार, दिए दिव्य दर्शन
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का वे पूरा सम्मान करते हैं तथा अपनी भूमि के बदले पास की खाली सरकारी भूमि देने का सुझाव प्रशासन को दिया है। अब यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
विज्ञापन
विवादित भूमि वर्तमान में दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के पुत्र अभिषेक यादव के नाम दर्ज बताई जा रही है। सीमांकन के बाद क्षेत्र में लोगों में नाराजगी व्याप्त है, वहीं कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जमीन के स्वामित्व की जांच कराने की मांग की है।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद नारायणदास खरे की 1 दिसंबर 1947 को नरोसा नाला के पास हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उनकी स्मृति में यहां शहीद स्थल विकसित किया गया और वर्षों से मेला आयोजित होता आ रहा है। बाद में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमृतलाल फणींद्र की समाधि भी इसी परिसर में बनाई गई। शासन द्वारा इस भूमि को मेला ग्राउंड के रूप में आवंटित किए जाने के बाद यहां बाउंड्रीवाल तथा सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया था।
विज्ञापन
भूमि वर्तमान में अभिषेक यादव के नाम दर्ज
बताया गया है कि 22 जुलाई को दो पटवारियों द्वारा किए गए सीमांकन में खसरा नंबर 137/1 के एक हिस्से पर 97×45, 15×5 तथा 14.5×15.5 फीट क्षेत्र में अतिक्रमण दर्ज किया गया। राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह भूमि वर्तमान में अभिषेक यादव के नाम दर्ज है, जबकि पहले यह उनके पिता प्रताप नारायण यादव के नाम थी।
कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने आरोप लगाया कि संबंधित भूमि वर्ष 1974 में कथित रूप से फर्जी बेचनामे के आधार पर दर्ज हुई थी। उनका कहना है कि उस समय खरीदी गई जमीन की कीमत 90 रुपये से अधिक होने पर स्टांप अनिवार्य था, लेकिन अभिलेखों में इसकी स्थिति संदिग्ध दिखाई देती है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, कार्रवाई रोकने तथा मामले से मुख्यमंत्री को अवगत कराने की बात कही है। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि शहीद स्थल से कोई छेड़छाड़ हुई तो कांग्रेस आंदोलन करेगी और बड़ागांव तथा टीकमगढ़ बंद कराने पर भी विचार करेगी।
ये भी पढ़ें- Ujjain: सूर्य, चंद्रमा, त्रिपुंड, त्रिशूल व त्रिनेत्र से हुआ बाबा श्री महाकाल का शृंगार, दिए दिव्य दर्शन
दमोह कलेक्टर का बयान
इस बीच ग्राम अंतौरा के सरपंच पर भी भूमि खाली कराने का दबाव बनाए जाने की चर्चा है। हालांकि बड़ागांव धसान के तहसीलदार सत्यप्रकाश शुक्ला ने कहा कि सीमांकन का प्रतिवेदन अभी उनके सामने नहीं आया है और रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि विवादित भूमि उनकी पैतृक संपत्ति है और बिना अनुमति वहां बाउंड्री का निर्माण किया गया है।
ये भी पढ़ें- Ujjain: सूर्य, चंद्रमा, त्रिपुंड, त्रिशूल व त्रिनेत्र से हुआ बाबा श्री महाकाल का शृंगार, दिए दिव्य दर्शन
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का वे पूरा सम्मान करते हैं तथा अपनी भूमि के बदले पास की खाली सरकारी भूमि देने का सुझाव प्रशासन को दिया है। अब यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
