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Ujjain News : तंत्र-मंत्र के नाम पर करोड़ों का हेरफेर, महिला खुद को उज्जैन का बताकर बेचती थी वन्यजीव अवशेष
Mon, 06 Jul 2026 06:11 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jul 2026 06:11 PM IST
सार
बाबा महाकाल के नाम पर सोशल मीडिया के जरिए वन्यजीवों के अवशेष बेचने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। वन विभाग की जांच में महिला दिल्ली की रहने वाली निकली, जबकि उसके खातों में छह महीने में करीब चार करोड़ रुपये के लेन-देन की जानकारी सामने आई है।
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वन्यजीवों के दांत और नाखून
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शादी में आ रही परेशानी हो, किसी को वशीकरण कराना हो या रोजगार से जुड़ी कोई समस्या.... इंस्टाग्राम पर एक महिला खुद को उज्जैन निवासी बताकर और बाबा महाकाल का नाम लेकर वन्यजीवों के अवशेषों के माध्यम से हर समस्या का समाधान करने का दावा कर रही थी। महिला का दावा था कि इन तथाकथित सिद्ध वन्यजीव अवशेषों से लोगों की समस्याएं दूर होने के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी मिलता है।
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मामला वन्यजीवों के अवशेषों से जुड़ा होने के कारण इसकी शिकायत वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, भोपाल से की गई। शिकायत के बाद उज्जैन वन मंडल के डीएफओ अनुराग तिवारी ने पूरे मामले की जांच कराई। जांच में सामने आया कि महिला का उज्जैन से कोई संबंध नहीं है। वह दिल्ली में रहती है और लोगों का विश्वास जीतने के लिए लगातार बाबा महाकाल और उज्जैन का नाम इस्तेमाल करती है।
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जांच में पता यह भी चला कि महिला सोशल मीडिया पर वन्यजीवों के अवशेष, जैसे दांत, बाल, हड्डियां, सींग, नाखून और पंजों को तंत्र-मंत्र से सिद्ध बताकर बेचने का दावा करती थी। वह इन्हें हर प्रकार की समस्या का समाधान बताकर लोगों से मोटी रकम वसूलती थी।
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डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया कि जांच के दौरान वन विभाग की टीम ने ग्राहक बनकर महिला से संपर्क किया। बातचीत में स्पष्ट हुआ कि वह उज्जैन की रहने वाली नहीं है, बल्कि दिल्ली में रहती है। वह केवल अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए बाबा महाकाल और उज्जैन का नाम इस्तेमाल कर रही थी। जांच में यह भी सामने आया कि जिन बैंक खातों में लोगों से पैसे जमा कराए जा रहे थे, वे सभी केवाईसी के अनुसार दिल्ली के हैं। उन्होंने बताया कि मामले से संबंधित सभी दस्तावेज और जांच रिपोर्ट वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, भोपाल को भेज दी गई है। वहां से यह पूरा प्रकरण आगे की कार्रवाई के लिए दिल्ली भेजा जाएगा, जहां संबंधित एजेंसियां विस्तृत जांच करेंगी।
जांच में यह भी सामने आया कि महिला अपनी इंस्टाग्राम आईडी पर नियमित रूप से बाबा महाकाल की भस्म आरती, उज्जैन के मंदिरों तथा स्वयं के वहां मौजूद होने जैसे फोटो और वीडियो साझा करती थी, ताकि लोगों को विश्वास हो सके कि वह उज्जैन की रहने वाली है। इसके अलावा वह सोशल मीडिया पर ऐसे कथित स्क्रीनशॉट भी पोस्ट करती थी, जिनमें लोग इन वन्यजीव अवशेषों से लाभ मिलने का दावा करते दिखाई देते हैं। इन्हीं माध्यमों से वह नए लोगों को अपने झांसे में लेने का प्रयास करती थी।
वन विभाग की जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि जिन बैंक खातों का संचालन दिल्ली से किया जा रहा था, उनमें पिछले लगभग छह महीनों में करीब चार करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। यह राशि छोटे-छोटे ट्रांजेक्शनों के माध्यम से खातों में जमा हुई। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कहीं यह रकम वन्यजीवों के अवशेषों की कथित बिक्री या उससे जुड़े किसी अवैध कारोबार से तो प्राप्त नहीं हुई। इस पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।
