Ujjain News: सिंहस्थ 2028 की तैयारी में उजागर हुआ उज्जैन का प्राचीन सतीगेट द्वार, पुरातत्व विभाग करेगा जांच
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सतीगेट मार्ग चौड़ीकरण के दौरान प्राचीन सती माता मंदिर का छिपा हुआ द्वार सामने आया। नगर निगम इसे संरक्षित करने की तैयारी में है, जबकि पुरातत्व विभाग मंदिर और द्वार के ऐतिहासिक महत्व की जांच करेगा।
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सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए शहर में विकास और सड़क चौड़ीकरण के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सतीगेट मार्ग चौड़ीकरण के दौरान एक प्राचीन धरोहर फिर सामने आई है। कार्रवाई के दौरान अतिप्राचीन सती माता मंदिर का एक और द्वार दिखाई दिया, जो वर्षों से एक निर्माण के भीतर दबा हुआ था। बताया जा रहा है कि सतीगेट के एक पिलर को पड़ोसी निर्माण में समेट लिया गया था और उसके सामने स्थायी दुकान संचालित की जा रही थी।
क्षेत्रीय पार्षद रजत मेहता ने बताया कि कंठाल से खड़े हनुमान मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का कार्य लगातार जारी है। नगर निगम की टीम के साथ क्षेत्रवासी भी सहयोग कर रहे हैं। सतीगेट के दोनों ओर 11 फीट तक चौड़ीकरण का प्रस्ताव है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है। नए द्वार के सामने आने से श्रद्धालुओं को मंदिर में आने-जाने में सुविधा होगी। पहले मंदिर तक पहुंचने के लिए एक ही रास्ता था और रस्सी की सहायता से ऊपर जाकर दर्शन करने पड़ते थे।
शनिवार को हुई एमआईसी बैठक में जल कार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा ने सतीगेट चौड़ीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के अनुसार सड़क को सतीगेट के सेंटर से दोनों ओर 15 मीटर तक चौड़ा किया जाना चाहिए। अधिकारियों से प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।
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दरअसल, कोयला फाटक से छत्री चौक तक 15 मीटर चौड़ीकरण परियोजना के तहत सतीगेट क्षेत्र में तोड़फोड़ की कार्रवाई जारी है। इस परियोजना की जद में 500 से अधिक दुकानें और मकान आ रहे हैं। प्रभावित व्यापारियों और रहवासियों ने हाल ही में महापौर, निगम आयुक्त और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि जिन परिवारों ने 1930 के दशक में मार्ग चौड़ीकरण के लिए अपनी जमीन छोड़ी थी, आज सबसे अधिक नुकसान उन्हीं को उठाना पड़ रहा है।
महापौर मुकेश टटवाल ने बताया कि चौड़ीकरण कार्य के दौरान उज्जैन की एक ऐतिहासिक धरोहर पुनः सामने आई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्राचीन सतीगेट द्वार को उसके मूल स्वरूप में संरक्षित और विकसित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां शहर की ऐतिहासिक विरासत से परिचित हो सकें।
पुरातत्व विभाग की टीम से भी संपर्क किया जा रहा है। विभाग यह अध्ययन करेगा कि मंदिर और द्वार कितना प्राचीन है, उसका ऐतिहासिक महत्व क्या है और नए द्वार का उपयोग किस प्रकार किया जाए, जिससे धरोहर का वैभव भी बना रहे और श्रद्धालुओं को सुविधा भी मिल सके।

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