MP Politics: कांग्रेस की लिस्ट में किसने लिखा भाजपा पदाधिकारी का नाम? सियासी विवाद के बाद अब हो रही किरकिरी
उमरिया में कांग्रेस की नई सूची में भाजपा नेता अनुज सेन का नाम शामिल होने से सियासी विवाद खड़ा हो गया। खुद अनुज सेन ने कांग्रेस से कोई संबंध होने से इनकार किया है।
विस्तार
उमरिया की सियासत में एक बार फिर अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसने कांग्रेस संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस केश कला शिल्पी प्रकोष्ठ की प्रदेश स्तरीय नव-नियुक्त प्रबंध समिति की सूची जारी होते ही विवाद खड़ा हो गया, जब उसमें उमरिया निवासी अनुज सेन का नाम प्रदेश सचिव के रूप में शामिल पाया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अनुज सेन खुद को भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता बताते हैं और वर्तमान में भाजपा नगर मंडल उमरिया में मंत्री पद पर हैं। ऐसे में कांग्रेस की सूची में उनका नाम सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।
क्या ये सोची-समझी साजिश है या फिर कुछ और
अनुज सेन ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि उनका कांग्रेस पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से भाजपा से जुड़े हुए हैं और आगे भी उसी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। सेन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने बिना उनकी जानकारी और सहमति के उनका नाम अपनी सूची में जोड़ दिया, जो न सिर्फ गलत है बल्कि एक सोची-समझी साजिश भी हो सकती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि करीब 8 वर्ष पहले ही उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था और तब से भाजपा के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस की सूची में उनका नाम शामिल होना कई सवाल खड़े करता है कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।
कांग्रेस संगठन की किरकिरी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस संगठन की किरकिरी होना तय है। विपक्षी दल भाजपा को भी बैठे-बिठाए कांग्रेस पर हमला करने का मुद्दा मिल गया है। वहीं कांग्रेस के अंदर भी इस तरह की लापरवाही को लेकर असंतोष पनप सकता है।
मामले को बढ़ता देख कांग्रेस संगठन के महासचिव एडवोकेट पुष्पराज सिंह ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि अनुज सेन पहले कांग्रेस में थे, लेकिन बाद में पार्टी छोड़ चुके हैं। सूची तैयार करते समय त्रुटिवश उनका नाम शामिल हो गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस गलती को जल्द ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के माध्यम से सुधारा जाएगा।
हालांकि, इस सफाई के बाद भी सवाल जस के तस बने हुए हैं। क्या कांग्रेस अपनी ही सूची तैयार करने में इतनी लापरवाह हो गई है कि वर्तमान में विपक्षी दल के पदाधिकारी को अपना नेता घोषित कर दे? या फिर यह अंदरूनी गुटबाजी और कमजोर संगठनात्मक पकड़ का नतीजा है?
उमरिया की यह घटना अब सिर्फ एक नाम की गलती भर नहीं रह गई है, बल्कि कांग्रेस की संगठनात्मक साख पर सीधा सवाल बनकर सामने आई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस विवाद से कैसे उबरती है और क्या वाकई सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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