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Carbon Fiber: कार्बन फाइबर पर यूरोप का बैन प्रस्ताव, क्या आने वाली कारों से गायब हो जाएगी ये मजबूत चीज?
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 15 Apr 2025 09:58 PM IST
सार
कार्बन फाइबर आजकल सिर्फ फॉर्मूला 1 जैसी रेसिंग कारों में ही नहीं, बल्कि रोड पर चलने वाली स्पोर्ट्स कारों और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) में भी जमकर इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन ईयू एक ऐसा कानून लाने की तैयारी में है, जिसमें कार्बन फाइबर को 'खतरनाक पदार्थ' घोषित किया जा सकता है।
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Koenigsegg Sports Car
- फोटो : Koenigsegg
कार्बन फाइबर आजकल सिर्फ फॉर्मूला 1 जैसी रेसिंग कारों में ही नहीं, बल्कि रोड पर चलने वाली स्पोर्ट्स कारों और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) में भी जमकर इस्तेमाल हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि ये बेहद हल्का और बहुत मजबूत होता है। यही वजह है कि कार बनाने वाली कंपनियां इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती हैं।
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Hyundai Car
- फोटो : Hyundai
'खतरनाक पदार्थों' की लिस्ट में जुड़ सकता है नाम
यूरोपीय संसद ने एक संशोधन पेश किया है, जिसके तहत कार्बन फाइबर को उस लिस्ट में डाला जाएगा जिसमें पहले से लेड, कैडमियम, मरकरी और हेक्सावैलेन्ट क्रोमियम जैसे जहरीले तत्व शामिल हैं। ये सभी मटेरियल्स अभी भी थोड़े-बहुत मात्रा में कार और हवाई जहाज बनाने में इस्तेमाल होते हैं।
ये संशोधन ईयू के "एंड ऑफ लाइफ व्हीकल्स डायरेक्टिव" के रिविजन में जोड़ा गया है। सरकार का मानना है कि कार्बन फाइबर के महीन रेशे अगर हवा में फैल जाएं और इंसान की त्वचा से टकराएं, तो नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह दुनिया में पहली बार होगा जब कोई सरकार कार्बन फाइबर को खतरनाक मान रही है।
यह भी पढ़ें - Car AC Gas: क्या आपकी कार की एसी ठंडी हवा नहीं दे रही? जानिए कौन सी गैस है इसके लिए सही
यूरोपीय संसद ने एक संशोधन पेश किया है, जिसके तहत कार्बन फाइबर को उस लिस्ट में डाला जाएगा जिसमें पहले से लेड, कैडमियम, मरकरी और हेक्सावैलेन्ट क्रोमियम जैसे जहरीले तत्व शामिल हैं। ये सभी मटेरियल्स अभी भी थोड़े-बहुत मात्रा में कार और हवाई जहाज बनाने में इस्तेमाल होते हैं।
ये संशोधन ईयू के "एंड ऑफ लाइफ व्हीकल्स डायरेक्टिव" के रिविजन में जोड़ा गया है। सरकार का मानना है कि कार्बन फाइबर के महीन रेशे अगर हवा में फैल जाएं और इंसान की त्वचा से टकराएं, तो नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह दुनिया में पहली बार होगा जब कोई सरकार कार्बन फाइबर को खतरनाक मान रही है।
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Koenigsegg Car Parts
- फोटो : Koenigsegg
अगर पास हुआ प्रस्ताव, तो 2029 से लागू होगा बैन
अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो 2029 से यूरोप में कार्बन फाइबर का इस्तेमाल बंद करना होगा। कंपनियों को इसे धीरे-धीरे अपने उत्पादन से हटाना पड़ेगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि दुनियाभर में जितना कार्बन फाइबर इस्तेमाल होता है, उसका 20 प्रतिशत सिर्फ ऑटो इंडस्ट्री में होता है।
यह भी पढ़ें - Nitin Gadkari: मुंबई-गोवा हाईवे जून तक हो जाएगा पूरा, नितिन गडकरी का एलान- 15 दिनों में नई टोल नीति भी
अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो 2029 से यूरोप में कार्बन फाइबर का इस्तेमाल बंद करना होगा। कंपनियों को इसे धीरे-धीरे अपने उत्पादन से हटाना पड़ेगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि दुनियाभर में जितना कार्बन फाइबर इस्तेमाल होता है, उसका 20 प्रतिशत सिर्फ ऑटो इंडस्ट्री में होता है।
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BMW XM Label Red
- फोटो : BMW
जापान को लग सकता है बड़ा झटका
इस बैन का सबसे बड़ा असर जापान पर पड़ेगा, क्योंकि दुनिया का 54 प्रतिशत कार्बन फाइबर उत्पादन सिर्फ जापान करता है। जैसे ही यूरोप ने यह प्रस्ताव रखा, जापानी कंपनियों के शेयर धड़ाम से गिर गए। यूरोप खुद भी कार्बन फाइबर बनाने में आगे है, इसलिए वहां की कंपनियां भी प्रभावित होंगी।
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Tesla Car
- फोटो : Tesla
किन कंपनियों को होगा सबसे ज्यादा नुकसान
इस बैन से स्पोर्ट्स कार और सुपरकार बनाने वाली कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। क्योंकि ये कारें हल्के वजन और तेज रफ्तार के लिए पूरी तरह कार्बन फाइबर पर निर्भर होती हैं। ईवी बनाने वाली वाहन निर्माता कंपनियां जैसे BMW (बीएमडब्ल्यू), Hyundai (ह्यूंदै), Lucid (ल्यूसिड) और Tesla (टेस्ला) भी इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल करती हैं।
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इस बैन से स्पोर्ट्स कार और सुपरकार बनाने वाली कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। क्योंकि ये कारें हल्के वजन और तेज रफ्तार के लिए पूरी तरह कार्बन फाइबर पर निर्भर होती हैं। ईवी बनाने वाली वाहन निर्माता कंपनियां जैसे BMW (बीएमडब्ल्यू), Hyundai (ह्यूंदै), Lucid (ल्यूसिड) और Tesla (टेस्ला) भी इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल करती हैं।
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