Bihar: मुजफ्फरपुर के धोबौली घाट पर पुल निर्माण को लेकर ग्रामीण करेंगे आंदोलन, CM नीतीश की घोषणा भी रह गई अधूरी
Bihar: मुजफ्फरपुर के धोबौली घाट पर पुल निर्माण को लेकर ग्रामीण करेंगे आंदोलन, CM नीतीश की घोषणा भी रह गई अधूरी
Muzaffarpur: Villagers will protest for construction of bridge on Dhobauli Ghat, CM Nitish Kumar announcement
पुल की मांग और अधूरी घोषणाएं
गौरतलब है कि धोबौली घाट पर पुल निर्माण की मांग कोई नई नहीं है। इस पुल की जरूरत और महत्व को 1980 के दशक में ही महसूस किया गया था। 1996 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और मुजफ्फरपुर के पूर्व सांसद दिवंगत कैप्टन जयनारायण निषाद ने यहां पुल निर्माण की नींव रखी थी, लेकिन वह परियोजना अधूरी रह गई। समय के साथ उस योजना को भुला दिया गया।
पिछले कई वर्षों में इस मुद्दे पर कई चुनावी वादे किए गए। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने चुनावी भाषण में पुल निर्माण की घोषणा की थी। उन्होंने एनडीए के उम्मीदवार अजय निषाद के पक्ष में प्रचार करते हुए कहा था कि पुल का निर्माण जल्द ही कराया जाएगा, जिससे क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी। बावजूद इसके, आज तक पुल का निर्माण शुरू नहीं हो पाया।
ग्रामीणों ने की आंदोलन की तैयारी
गांव के लोग अब नेताओं की घोषणाओं से निराश हो चुके हैं। उन्होंने इस बार आंदोलन करने का मन बना लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में पुल निर्माण का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव के बाद इसे भुला दिया जाता है। अब गांव के लोग खुद सड़कों पर उतरकर सरकार को अपनी मजबूरी दिखाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द ही पुल का निर्माण नहीं हुआ, तो वे बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेंगे और तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती।
पुल का सामरिक और सामाजिक महत्व
जानकारी के मुताबिक, धोबौली घाट पर पुल का निर्माण सिर्फ आवागमन की सुविधा के लिए ही नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह पुल बनने से गायघाट, बंदरा और बोचहा प्रखंड के ग्रामीण सीधे दरभंगा-मुजफ्फरपुर फोर-लेन से जुड़ सकेंगे। इससे न सिर्फ गांवों के बीच की दूरी घटेगी, बल्कि व्यापार और शिक्षा के अवसर भी बढ़ेंगे।
अभी हालात ऐसे हैं कि गांव के बच्चों को हाई स्कूल जाने के लिए नाव से नदी पार करनी पड़ती है, जो बारिश के मौसम में और भी खतरनाक हो जाता है। बीते साल बेनीबाद के मदुरपट्टी गांव में नाव दुर्घटना के बाद यहां के लोग और ज्यादा चिंतित हो गए हैं। हादसे के बाद सरकार ने नाव से नदी पार करने वाले क्षेत्रों में पुल निर्माण की योजना बनाने की बात कही थी, लेकिन धोबौली घाट अब भी इस सूची में शामिल नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों का बढ़ा आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि नेता सिर्फ वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद काम नहीं करते। अब वे खुद इस मुद्दे को लेकर संघर्ष करेंगे। उनके अनुसार, पुल बनने से रोजमर्रा के काम, व्यापार और बच्चों की शिक्षा में सुविधा होगी। साथ ही यह पुल समस्तीपुर जिले से भी कनेक्टिविटी बढ़ाएगा, जिससे दूरी 15 किलोमीटर कम हो जाएगी।