अजब-गजब: क्या सच में इंसान से संपर्क करना चाहते हैं एलियंस? वैज्ञानिकों ने इस बड़े रहस्य से उठाया पर्दा

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Sat, 08 Jan 2022 08:38 PM IST
क्या सच में इंसान से संपर्क करना चाहते हैं एलियंस?
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अमेरिकी अतंरिक्ष एजेंसी नासा ब्रह्मांड के रहस्यों के बारे में जानने की कोशिश में लगा हुआ है। अब इस बीच वैज्ञानिकों ने नासा के सैटेलाइट से एक रहस्य से पर्दा उठाया है। अंतरिक्ष में स्थित स्टार से रहस्यमयी सिग्नल आ रहे थे जिसको लेकर कई बातें कही जा रही थीं। यह भी कहा जा रहा था कि यह सिग्नल कहीं एलियन तो नहीं भेज रहे हैं। यह बड़ा सवाल था कि क्या एलियन इंसान से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं? वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश में लगे हुए थे कि आखिर ये सिग्नल कहां से आ रहे थे। 

नासा के ट्रांसिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS ) ने इस रहस्य का पता लगाने में वैज्ञानिकों की मदद की है। वैज्ञानिकों ने नासा की सैटेलाइट TESS से अतंरिक्ष से आ रही रहस्यमयी सिंग्नल के स्त्रोत के बारे में पता लगा लिया है। वैज्ञानिकों ने सिग्नल जिस जगह से आ रहा था उसे TIC400799224 नाम दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस धुंधली जगह से रहस्यमयी आवाज आ रही है वो दो बाइनरी स्टार हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने बताया है कि यहां पर दो तारों का एक सिस्टम होने की संभावना है। इन तारों को धूल के घने बादलों ने घेरा हुआ है। 
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हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स ने इसको लेकर बयान जारी किया है। इस बयान में गया है कि बड़े एस्टेरॉयड के टूटने से घने बादल बने होंगे जो दो तारों के सिस्टम के बीच मौजूद हैं। इनके अंदर सिग्नल को पकड़ना कठिन था, लेकिन वैज्ञानिकों ने TESS की सहायता से यह काम कर दिया। 
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साल 2019 के शुरुआती महीनों में वैज्ञानिकों ने TESS के डेटा की जांच की थी। उस समय TIC400799224 कुछ ही घंटों में 25 प्रतिशत कम रोशनी छोड़ता था, लेकिन कभी-कभी तेज रोशनी निकलने लगती थी। वैज्ञानिकों ने रोशनी, अंधेरे और धुंधले बादलों के बीच के तालमेल को दो साल में समझा है। 
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TESS के डेटा को ऑल-स्काई ऑटोमेटेड सर्वे फॉर सुपरनोवे और ला कंब्रे ऑब्जरवेटरी के डेटा से मिलाया गया। इन डेटा को मिलाने के बाद कई बड़े खुलासे हुए। जाच में सामने आया कि दोनों तारे एक दूसरे की परिक्रमा कर रहे हैं। इनमें एक तारा हर 19.77 दिन पर एक पल्स भेज रहा था। तारों के चारों ओर मौजूद बादलों के घेरे के कारण यह पल्स पैदा हो रही थी। 
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6 साल पहले TIC400799224 से पहली बार सिग्नल मिलने का पता चला था। वैज्ञानिकों को समझ में नहीं आ रहा था कि यह सिग्नल कहां से आ रहा है। अब जाकर पता चला है कि इस सिग्नल का स्रोत अंधेरे और रोशनी का एक अनोखा पैटर्न है। 
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