Chandrayaan-3: भारतीय अंतरिक्ष एजेंजी(इसरो) का बहुप्रतीक्षित चंद्रयान-3 मिशन 23 अगस्त की शाम छह बजकर चार मिनट चांद की सतह पर उतरेगा। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 लैंड करेगा, जो दुनियाभर के वैज्ञानिकों के लिए अभी तक एक रहस्य है। अगर यहां पर चंद्रयान सफलतापूर्वक उतर जाता है, तो यह भारतीय वैज्ञानिकों के लिए बड़ी कामयाबी होगी। आज हम आपको भारत के 10 वैज्ञानिकों के बारे में बताते हैं, जिनको पूरी दुनिया सलाम करती है।
Chandrayaan-3: भारत के 10 सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक, जिन्होंने दुनिया में रौशन किया हिंदुस्तान का नाम
सी एन आर राव
चिंतामणि नागेश रामचन्द्र राव का जन्म 30 जून 1934 को वर्तमान कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में हुआ था। उन्होंने संरचनात्मक रसायनशास्त्र पर मुख्य रूप से काम किया है। वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, आईआईटी कानपुर, भारतीय विज्ञान संस्थान, ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय आदि से जुड़े रहे। उनको पद्म पुरस्कार एवं भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है। 45 वैज्ञानिक पुस्तकों और 1500 शोध पत्रों को लिखने वाले राव को 60 विश्वविद्यालयों ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी है।
जी माधवन नायर
इसरो के पूर्व चीफ जी. माधवन नायर का नाम भारतीय वैज्ञानिकों में प्रमुखता से लिया जाता है। 31 अक्टूबर 1943 को केरल के तिरुवनंतपुरम में जन्में नायर छह साल तक इसरो के साथ जुड़े रहे हैं। उनके कार्यकाल में भारत ने 25 सफल मिशन पूरे किये हैं, जिनमें चंद्रयान-1 भी शामिल है। वह इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। उनको पद्म भूषण (1998), पद्म विभूषण (2009), लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, मैन ऑफ द ईयर से सम्मानित किया जा चुका है।
राकेश के जैन
राकेश के जैन भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक हैं। ट्यूमर बायोलॉजी में जैन को महारत हासिल है। उन्होंने 600 से अधिक शोधों में अपना योगदान दिया है। राकेश के जैन को रसोली रक्त वाहिकाओं के बीच संबंध तथा कीमोथैरेपी एवं विकिरण उपचार के क्षेत्र में कार्य की वजह से 2016 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रति बराक ओबामा ने नेशनल मैडल ऑफ साइंस पुरुस्कार से सम्मानित किया था। यह पुरुस्कार अमेरिका का सर्वोच्च विज्ञान सम्मान है।
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डॉ के राधाकृष्णन
29 अगस्त 1949 को केरल में जन्में डॉ के राधाकृष्णन भारत के महान वैज्ञानिकों में से एक हैं। वह मूलरूप से एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक हैं। उन्होंने साल 1970 में केरल विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली थी। इसके बाद उन्होंने 1971 में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से अपने करियर की शुरुआत की थी। डॉ के राधाकृष्णन ने इसरो के अध्यक्ष रहने के दौरान GSLV के लिए स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन और मंगल यान को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया। अंतरिक्ष विज्ञान में योगदान के लिए उनको पद्म भूषण (2014) पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। डॉ के राधाकृष्णन की देखरेख में भारत ने चंद्रयान और मंगलयान अन्तरिक्ष में भेजे थे।
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