सर्दी-जुकाम-खांसी को लेकर एक नई स्टडी में बड़ी जानकारी सामने आई है। इस स्टडी से पता चला है कि सर्दी-जुकाम-खांसी कोई नई बीमारी नहीं है बल्कि यह करोड़ों साल पुरानी है। शोधकर्ता का कहना है कि 15 करोड़ साल पहले डायनासोर भी इस बीमारी से पीड़ित रहते थे। वह भी छींकते-खांसते थे और उनको फेफड़ों का संक्रमण (रेस्पिरेटरी संक्रमण) भी होता था। इस बात के पहली बार सबूत मिले हैं।
New Study: करोड़ों साल से है 'सर्दी-जुकाम' की बीमारी, डायनासोर को भी आती थी छींक और खांसी
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डॉ. कैरी और उनकी टीम ने जब स्टडी की शुरुआत तो, डॉली की गर्दन की हड्डियों में गोल आकृति नजर आई। डॉ. कैरी वुडरफ ने अपनी टीम के साथ मिलकर डॉली की गर्दन की गहन जांच की। उन्होंने बताया है कि आकृतियां गोभी जैसी हैं जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया था। वुडरफ ने आकृतियों की तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और लोगों से पूछा कि आखिर यह क्या है? इसके बाद वैज्ञानिकों ने बताया कि यह लक्षण सर्दी-जुकाम या फेफड़ों के संक्रमण की वजह से नजर आता है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, नए पक्षियों की गर्दन का बारीक सीटी स्कैन से किया जाता है, तो उनके अंदर भी ऐसी आकृतियां नजर आती हैं। सांस लेने वाली प्रणाली के नजदीक यह आकृतियां नजर आईं और डायनासोर के फेफड़े यहीं से शुरू होते थे। रेस्पिरेटरी सिस्टम के शुरू होते ही गोभी जैसी आकृतियां हड्डियों पर बन गई थीं।
डॉ. कैरी वुडरफ का कहना है कि डॉली डायनासोर भी किसी बीमार इंसान की तरह खांसता होगा। वह छींक भी रहा होगा और बुखार से भी पीड़ित रहा होगा। इंसान में भी सर्दी जुकाम होने पर आमतौर पर यही लक्षण दिखाई देता है। डॉ. कैरी का कहना है कि वह अन्य जीवाश्म के साथ डॉली जैसा अपनापन नजर आता है, क्योंकि वह सर्दी जुकाम से पीड़ित था।
डॉ. कैरी वुडरफ का कहना है कि एसपरजिलोसिस (Aspergillosis) नाम के मोल्ड कणों को सूंघने से डॉली डायनासोर को सर्दी जुकाम हुआ था। वर्तमान समय में पक्षी एसपरजिलोसिस संक्रमण शिकार होता है और कभी-कभी वह जानलेवा साबित हो सकता है। उनका कहना है कि अगर डॉली डायनासोर एसपरजिलोसिस संक्रमण से पीड़ित था, तो वह बेहद कमजोर रहा होगा या अकेला होगा। वह शिकारियों के निशाने पर आने की वजह से इतना लाचार रहा होगा। Scientific Reports जर्नल में यह स्टडी प्रकाशित की गई है।