El Nino Alert: ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से दुनियाभर में तापमान बढ़ रहा है। भारत समेत दुनिया के कई देश इन दिनों भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। इस बीच वैज्ञानिकों ने बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि साल 2026 अभी तक के सबसे गर्म वर्षों में से एक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने यह चेतावनी उस समय दी है जब संभावित अल नीनो के बीच उत्तरी गोलार्ध में गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: कहीं पड़ेगा सूखा, तो कहीं चलेगी लू, जानिए भारत पर क्या होगा अल नीनो का असर?
El Nino Alert: वैज्ञानिकों ने अलनीनो को लेकर चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि मध्य रेखा पर प्रशांत इलाके में समुद्र की सतह तेजी से गर्म हो रही है। इसके कारण दुनियाभर का मौसम प्रभावित होगा।
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इन देशों में सूखा
वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान लगाया है कि अल नीनो की स्थिति बनती है, तो दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में ज्यादा नमी की संभावना है, तो वहीं ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वैज्ञानिकों की चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अल नीनो का प्रभाव और भी तेज हो सकता है।
यूरोप में चलेगी लू
यूरोपीय यूनियन की कॉपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा ने साल 2026 के शुरुआत में ही कहा था कि अटलांटिक और भूमध्य सागर के कुछ इलाकों में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म हो रहा है, जिसके कारण यूरोप में लू की संभावना बढ़ गई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के उप सचिव को बैरेट ने बताया कि तापमान में वृद्धि से जलवायु जोखिम बढ़ रहे हैं। इसके कारण यह चेतावनी महत्वपूर्ण है।
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क्या भारत पर होगा असर?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा था अल नीनो का सीधा असर मॉनसून की बारिश पर पड़ेगा। इससे देश में सूखे का खतरा और बढ़ जाएगा। इसके साथ ही भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है। अनुमान के मुताबिक, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से थोड़ा कम रहने की संभावना है।
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अल नीनो क्या है?
अल नीनो की वजह से प्रशांत महासागर में समुद्र का पानी असमान्य रूप से गर्म होता है। इससे हवा का पैटर्न बदल जाता है। इसके असर से दुनियाभर में बारिश के चक्र में बदलाव आता है। अल नीनो के कारण कहीं सूखा पड़ता है, तो कहीं मूसलाधार बारिश और बाढ़ आती है। अगर अल नीनो एक्टिव होगा, प्रशांत महासागर से भारत आने वाली मानसूनी हवाओं को रोकेगा, जिससे बारिश पर असर होगा।