UN New Report on Heatwave: भारत समेत दुनिया के ज्यादातर देश इन दिनों भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। अब इस बीच संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट सामने आई, जिसमें दुनिया को एक बार फिर चेतवानी दी गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आने पांच वर्षों (2026 से 2030) में धरती का तापमान और भी तेजी से बढ़ेगा और गर्मी के नए रिकॉर्ड बनेंगे। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की इस रिपोर्ट से पता चलता है कि इंसानी गतिविधियों के कारण निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों की वजह से मौसम चरम रूप धारण कर रहा है।
Heatwave: प्रचंड गर्मी पर UN की सबसे बड़ी चेतावनी, 5 साल में ऐसा होगा मौसम, भारत पर क्या होगा असर?
UN New Report on Heatwave: संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में गर्मी को लेकर चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले पांच साल और अधिक गर्म होंगे।
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तेजी से गर्म हो रहा आर्कटिक क्षेत्र
इस रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली बात यह है कि आर्कटिक क्षेत्र का तापमान बाकी दुनिया की तुलना में करीब 3.5 गुना तेजी बढ़ रहा है। 2026 से 2030 तक आर्कटिक के तापमान में औसतन 1.66 डिग्री सेल्सियस की और वृद्धि हो सकती है। बर्फ कम होने से सूरज की किरणों को समुद्र ज्यादा सोखता है जिससे गर्मी बढ़ती है। यह एक साइकिल बनता जा रहा है। सर्दियों में आर्कटिक पहले से भी अधिक गर्म रहेगा, जिससे पूरी दुनिया का मौसन प्रभावित होगा।
1.5 डिग्री की सीमा को पार करना दुनिया के लिए खतरनाक
पृथ्वी का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय वन अमेजन कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने का काम करता है और मौसम को नियंत्रित करता है। आने वाले पांच साल में अमेजन में असामान्य सूखा हो सकता है। इससे आग लगने का खतरा बढ़ेगा। अगर अमेजन सूख गया और जल गया, तो वो खुद कार्बन छोड़ने लगेगा। इससे ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ेगी। इसके कारण स्थानीय लोगों को पानी की समस्या उत्पन्न होगी।
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गर्मी बढ़ने की वजह से मौसम का चरम रूप देखने को मिल रहा है। बाढ़, सूखा, लू और तूफान अधिक आएंगे। यूरोप में मई के महीने भीषण गर्मी पड़ रही है। भारत समेत कई देशों में लू कहर बरपा रहा है। वैज्ञानिकों ने कहा कि 0.1 डिग्री गर्मी से प्रभाव ज्यादा गंभीर होता है। लेकिन 1.5 डिग्री से ऊपर जाना खतरनाक होगा, जिससे कोरल रीफ, ग्लेशियर और कई पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो सकते हैं।
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क्या होगा भारत पर असर?
भारत उन देशों में शामिल है, जो भीषण गर्मी का सामना करते हैं। आने वाले वर्षों में लू की घटनाओं में वृद्धि होगी। रात का तापमना अधिक होगा। इससे कृषि, स्वास्थ्य और पानी की समस्या बढ़ेगी। यूएन की यह रिपोर्ट पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है।