Kolar Gold Fields: साउथ की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल केजीएफ 2 (KGF 2) के ट्रेलर ने धमाल मचा दिया है। बेसब्री से इस फिल्म का लोग इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म की कहानी एक सोने की खदान से जुड़ी हुई है जिसका इतिहास 121 साल पुराना है। यह फिल्म रियल लाइफ की घटनाओं पर आधारित है। केजीएफ यानी कोलार गोल्ड फ़ील्ड्स की कहानी बिल्कुल फिल्म की तरह खूनी है। कर्नाटक के दक्षिण पूर्व इलाके में कोलार गोल्ड फील्ड्स स्थित है।
Kolar Gold Fields: इस सोने की खदान पर बनी है फिल्म केजीएफ, जानिए इसकी अनसुनी कहानी
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क्या है केजीएफ का इतिहास
रिपोर्ट्स के मुताबिक, केजीएफ से इन सालों में 900 टन सोना निकाला जा चुका है। ब्रिटिश सरकार के लेफ्टिनेंट जॉन वॉरेन ने इस खान के बारे में लेख लिखा था। उन्होंने अपने इस आर्टिकल में बताया था कि साल 1799 में श्रीरंगपट्टनम की लड़ाई में अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान को मार दिया। इसके बाद उन्होंने कोलार और आसपास के इलाकों को कब्जा लिया। हालांकि कुछ सालों बाद यह जमीन मैसूर राज्य को सौंप दी गई, लेकिन सर्वे का अधिकार अंग्रेजों के पास ही रहा।
हाथों से निकाला जाता था सोना
इसे लेख में बताया गया था कि उस दौरान कोलार में चोल साम्राज्य का शासन था। सबसे हैरान वाली बात यह है कि यहां पर लोग हाथ से खोदकर सोना निकाल लेते थे। वॉरेन ने घोषणा की कि सोना निकालने वालों को इनाम दिया जाएगा। इसके बाद जब लोगों ने सोना निकाला तो करीब 56 किलो मिट्टी में थोड़ा सा ही सोना निकला। इसके बाद तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
अंग्रेजों ने 1804 से लेकर 1860 तक सोना निकालने के लिए खतरनाक एक्सपेरिमेंट किए़, लेकिन उनके हाथ कोई कामयाबी नहीं लगी बल्कि कई मजदूरों की मौत हो गई। इसके बाद अंग्रेजों ने खुदाई पर रोक लगा दी।
इसके बाद लेवेली के मन में रिसर्च करने का ख्याल आया है और कोलार पहुंच गए। मैसूर के महाराज साल 1873 में लेवेली को कोलार में खुदाई की इजाजत दी। 1875 में फिर से खुदाई शुरू की गई। रोशनी के लिए यहां पर बिजली का इंतजाम किया गया। कोलार भारत का पहला शहर है जहां पर सबसे पहले बिजली पहुंची थी। लेवेली की कोशिशों के बाद 1902 में केजीएफ में 95 प्रतिशत सोना निकाले जाने लगा। साल 1930 तक इस खान में 30 हजार मजूदर खुदाई करने लगे थे।
केजीएफ में लग गया अंग्रेजों का जमावड़ा
अंग्रेजों की सबसे पसंदीदा जगह बन गई कोलार गोल्ड फील्ड्स। ब्रिटिश अधिकारियों और इंजीनियर्स ने यहां पर अपना-अपना घर बनाना शुरू कर दिया। ठंडा होने की वजह से यह एक वैकेशन स्पॉट की तरह था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक समय केजीएफ को छोटा इंग्लैंड कहा जाता था।