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12 साल में सिर्फ एक बार ही क्यों आता है कुंभ, बड़ी रहस्यमयी है इसकी वजह

फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: सोनू शर्मा Updated Wed, 23 Jan 2019 06:15 PM IST
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Kumbh 2019 Why Kumbh comes after 12 years in prayagraj
kumbh photo 2019

ये तो सब जानते हैं कि प्रयागराज कुंभ 15 जनवरी से 4 मार्च तक चलेगा। इसके बाद फिर 12 साल बाद फिर यहां कुंभ का आयोजन किया जाएगा। लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि आखिर 12 साल में सिर्फ एक बार ही कुंभ क्यों आता है? इसकी वजह क्या है?

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Kumbh 2019 Why Kumbh comes after 12 years in prayagraj
Kumbh 2019

माना जाता है कि कुंभ मेले का इतिहास कम से कम 850 साल पुराना है। कहते हैं कि आदि शंकराचार्य ने इसकी शुरुआत की थी, लेकिन कुछ कथाओं के अनुसार कुंभ की शुरुआत समुद्र मंथन के आदिकाल से ही हो गई थी। हालांकि कुछ विद्वान गुप्त काल में कुंभ के सुव्यवस्थित होने की बात करते हैं, लेकिन प्रमाणित तथ्य सम्राट शिलादित्य हर्षवर्धन (617-647 ई.) के समय से प्राप्त होते हैं। बाद में जगतगुरु शंकराचार्य और उनके शिष्य सुरेश्वराचार्य ने दसनामी संन्यासी अखाड़ों के लिए संगम तट पर स्नान की व्यवस्था की। 

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समुद्र मंथन

कहते हैं कि सागर मंथन से जब अमृत कलश प्राप्त हुआ, तब अमृत घट को लेकर देवताओं और असुरों में खींचातानी शुरू हो गई। ऐसे में अमृत कलश से छलक कर अमृत की बूंद जहां पर गिरी, वहां पर कुंभ का आयोजन किया गया। अमृत की खींचातानी के समय चंद्रमा ने अमृत को बहने से बचाया। गुरू ने कलश को छुपा कर रखा। सूर्य देव ने कलश को फूटने से बचाया और शनि देव ने इंद्र के कोप से रक्षा की। इसलिए जब इन ग्रहों का संयोग एक राशि में होता है, तब कुंभ का आयोजन होता है। क्योंकि इन चार ग्रहों के सहयोग से ही अमृत की रक्षा हुई थी। 

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kumbh photo 2019

कहा जाता है कि गुरू एक राशि में लगभग एक वर्ष तक रहते हैं। इस तरह बारह राशि में भ्रमण करते हुए उन्हें 12 वर्ष का समय लगता है। इसलिए हर बारह साल बाद फिर उसी स्थान पर कुंभ का आयोजन होता है। लेकिन कुंभ के लिए निर्धारित चार स्थानों में अलग-अलग स्थान पर हर तीसरे वर्ष कुंभ का आयोजन होता है। कुंभ के लिए निर्धारित चारों स्थानों में प्रयाग के कुंभ का विशेष महत्व है। हर 144 वर्ष बाद यहां महाकुंभ का आयोजन होता है।   

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kumbh

शास्त्रों में बताया गया है कि पृथ्वी का एक वर्ष देवताओं का एक दिन होता है, इसलिए हर बारह वर्ष पर एक स्थान पर पुनः कुंभ का आयोजन होता है। देवताओं का बारह वर्ष पृथ्वी लोक के 144 वर्ष के बाद आता है। ऐसी मान्यता है कि 144 वर्ष के बाद स्वर्ग में भी कुंभ का आयोजन होता है, इसलिए उस वर्ष पृथ्वी पर महाकुंभ का आयोजन होता है। महाकुंभ के लिए निर्धारित स्थान प्रयाग को माना गया है। 

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