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परशुराम ने क्यों किया था 21 बार क्षत्रियों का संहार? इसके पीछे छुपा है एक गहरा रहस्य

फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: सोनू शर्मा Updated Wed, 13 Feb 2019 05:37 PM IST
Lord Parashurama killed Kshatriyas 21 times but why
Lord Parshuram - फोटो : Social media

भगवान परशुराम को कौन नहीं जानता है। उन्हें जगत के पालनहार भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। कहते हैं कि परशुराम ने 21 बार समस्त क्षत्रिय वंशों का संहार कर भूमि को क्षत्रिय विहिन कर दिया था। इसका उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान परशुराम ने ऐसा क्यों किया था? 

Lord Parashurama killed Kshatriyas 21 times but why
Sahastrarjun - फोटो : Social media

भगवान परशुराम द्वारा 21 बार क्षत्रियों के संहार के पीछे एक रोचक कहानी है। दरअसल, महिष्मती नगर के राजा सहस्त्रार्जुन क्षत्रिय समाज के हैहय वंश के राजा कार्तवीर्य और रानी कौशिक के पुत्र थे। सहस्त्रार्जुन का वास्तविक नाम अर्जुन था। कहते हैं कि उन्होंने भगवान दत्तात्रेय को अपनी तपस्या द्वारा प्रसन्न करके उनसे 10,000 हाथों का आशीर्वाद प्राप्त किया था।  इसके बाद से ही अर्जुन का नाम सहस्त्रार्जुन पड़ा। 

Lord Parashurama killed Kshatriyas 21 times but why
Sahastrarjun - फोटो : Social media

कहा जाता है महिष्मती सम्राट सहस्त्रार्जुन अपने घमंड में चूर होकर धर्म की सभी सीमाओं को लांघ चूका था। उसके अत्याचारों से जनता त्रस्त हो चुकी थी। वेद-पुराण और धार्मिक ग्रंथों को मिथ्या बताकर ब्राह्मण का अपमान करना, ऋषियों के आश्रम को नष्ट करना, उनका अकारण वध करना, प्रजा पर निरंतर अत्याचार करना, यहां तक कि उसने अपने मनोरंजन के लिए मदिरा के नशे में चूर होकर स्त्रियों के सतीत्व को भी नष्ट करना शुरू कर दिया था। 

Lord Parashurama killed Kshatriyas 21 times but why
Rishi Jamdagni - फोटो : Social media

ऐसे ही एक बार सहस्त्रार्जुन अपनी पूरी सेना के साथ जंगलों से होता हुआ जमदग्नि ऋषि के आश्रम में विश्राम करने के लिए पहुंचा। महर्षि जमदग्रि ने भी सहस्त्रार्जुन को अपने आश्रम का मेहमान समझकर खूब स्वागत सत्कार किया। कहते हैं ऋषि जमदग्रि के पास देवराज इंद्र से प्राप्त दिव्य गुणों वाली कामधेनु नामक चमत्कारी गाय थी। 

Lord Parashurama killed Kshatriyas 21 times but why
Kamdhenu - फोटो : Social media

जमदग्नि ऋषि ने कामधेनु गाय के मदद से देखते ही देखते कुछ ही पलों में सहस्त्रार्जुन की पूरी सेना के लिए भोजन का प्रबंध कर दिया। कामधेनु गाय की ऐसी अद्भुत शक्तियों को देखकर सहस्त्रार्जुन के मन में उसे पाने की इच्छा जाग उठी। उसने ऋषि जमदग्नि से कामधेनु को मांगा, लेकिन उन्होंने ये कहकर उसे देने से इनकार कर दिया कि यह गाय ही उनके जीवन के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया है। लेकिन सहस्त्रार्जुन कहां मानने वाला था। 

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