NASA: जानिए कितने साले में दूसरे ग्रहों पर रहने लगेंगे इंसान, नासा के वैज्ञानिक ने बताया
क्या होता है कार्दाशेव स्केल
सोवियत खगोलशास्त्री निकोलाई कार्दाशेव ने साल 1964 में बुद्धिमान प्रजाति की तकनीकी क्षमता के बारे में जानकारी हासिल करन के लिए एक मेजरमेंट योजना के बारे में बताया था। इसके बाद कार्ल सागन ने इसमें संशोधन किया था। इनके अनुसार, कार्दाशेव टाइप-I द्वारा अपने ग्रह पर मौजूद सभी प्रकार के ऊर्जा का प्रयोग किया जा सकता है जबकि टाइप-II सभ्यताओं द्वारा ऊर्जा की मात्रा का 10 गुना प्रयोग किया जा सकता है। टाइप-III प्रजाती पूरी आकाशगंगा की अधिक से अधिक ऊर्जा को खर्च कर सकती है। उन्होंने मानव प्रजाति को टाइप-I से भी बहुत नीचे बताया है। उनका कहना है कि इसके बावजूद हर साल ऊर्जा के खर्च में बढ़ोत्तरी हो रही है।
वैज्ञानिक जोनाथन जियांग ने कहा है कि हमारी गैलेक्सी अरबों साल पुरानी है। उनका कहना है कि किसी न किसी जगह इंसानों से बेहतर कोई होगा। उन्होंने कहा है कि धरती कोई खास नहीं है। इसके अलावा उन्होंने जीवन और बुद्धि के विकास को भी अनोखा नहीं बताया है।
उनका कहना है कि हमारी गैलेक्सी बहुत पुरानी है। इसलिए अभी तक किसी को तो जरूर टाइप III स्टेज में पहुंच जाना चाहिए था। उन्होंने गंभीरता से गैलैक्सी की खोज शुरू करने पर जोर दिया है। उनका मानना है कि इंसान अकेले हैं इसलिए लगता है कि बुद्धिमान जीवन बेहद दुर्लभ है। उनका कहना है कि प्रजाति के तौर पर इंसान आत्म-विनाश कर सकता है और वह अभी कार्दाशेव पैमाने के पहले पायदान पर नहीं पहुंच पाया है।
जर्नल प्रीप्रिंट सर्वर पर पब्लिश पेपर में जियांग और उनकी टीम ने टाइप I स्थिति तक पहुंचने के लिए एक तरीके की खोज की है जो सबसे अच्छा है। इंसान को जीवमंडल को नुकसान न पहुंचे इसलिए तेजी से ऊर्जा आपूर्ति को परमाणु और नवीकरणीय विकल्पों में बदलना होगा। अगर इंसान ऐसा नहीं करता है, तो जीवमंडल को नुकसान होता रहेगा। टीम की तरफ से कहा गया है कि अगर वर्तमान दर से ऊर्जा खर्च जारी रहा है, तो इंसान साल 2371 तक टाइप I स्टेज में पहुंच जाएगा।