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देश में पहली बार किन्नरों के लिए बड़ी घोषणा, पढ़िए लाइफ का एक कड़वा सच
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 27 Oct 2017 09:16 AM IST
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किन्नरों के साथ DJ पर थिरके स्टूडेंट्स
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देश में पहली बार किन्नरों के लिए बड़ी घोषणा की गई है, उन्हें एक नई पहचान दी गई है। लेकिन इनकी जिंदगी वो कड़वा सच है, जान लेंगे तो कहेंगे ओह माई गॉड।
किन्नरों के साथ DJ पर थिरके स्टूडेंट्स
दरअसल, चंडीगढ़ में अब ट्रांसजेंडर्स के नाम के आगे एम एक्स लिखा जाएगा। 14 सदस्यीय ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के गठन के साथ ही यह अहम फैसला लिया गया है। ट्रांसजेंडर्स के साथ किसी भी प्रकार कोई भेदभाव न हो, इस पर भी बोर्ड से समय- समय पर सुझाव मांगे जाएंगे। ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की बैठक में ट्रांसजेंडर समुदाय की ओर से भी दो नुमाइंदे शामिल हुए। ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी ने हाल में ट्रांसजेंडर की पहचान दर्शाने के लिए रूल 3 का इस्तेमाल किया है।
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ट्रांसजेंडर समुदाय की मांग थी कि आवेदन पत्रों में लिंग या वैवाहिक स्टेटस दर्शाने के लिए सिर्फ तीन विकल्प होते हैं, जबकि ट्रांसजेंडर्स को तीसरे जेंडर में शुमार किया गया है। इसलिए उनके लिए अलग से विकल्प का प्रावधान किया जाना चाहिए। चंडीगढ़ प्रशासन ने इस मांग को स्वीकार करते हुए फैसला लिया कि सरकारी और गैर सरकारी सभी आवेदनपत्रों में अब रूल 3 का चौथा विकल्प भी उपलब्ध होगा। ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के अध्यक्ष और अतिरिक्त जिलाधीश राजीव गुप्ता ने यह जानकारी दी।
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ट्रांसजेंडर्स की लाइफ के बारे में पंजाब यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे एक किन्नर स्टूडेंट धनंजय बताते हैं कि हमें घरों से भगा दिया जाता है। हम कहीं से भी गुजरे लोग हमें ऐसे देखते हैं जैसे हमने कोई गुनाह कर दिया हो। हमें किराए पर रहने के लिए घर नहीं मिलते। मजबूरन में डेरों या सराओं में रहना पड़ता है। धनंजय ने बताया कि भारत में बीस लाख से ज्यादा किन्नर है और निरंतर इनकी संख्या घट रही है। फिर भी हिजड़े को संतान मिल ही जाती है। वे उनका लालन-पालन बड़े अच्छे ढंग से करते हैं।
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धनंजय ने बताया कि जहां तक एक से बच्चे को बिरादरी में सम्मिलित करने की बात है तो बनी प्रथा के अनुसार बालिग होने पर ही रीति संस्कार द्वारा किसी को बिरादरी में शामिल किया जाता है। रीति संस्कार से एक दिन पूर्व नाच गाना होता है तथा सभी का खाना एक ही चुल्हे पर बनता है। अगले दिन जिसे किन्नदर बनना होता है, उसे नहला-धुलाकर अगरबत्ती और इत्र की सुगंध के साथ तिलक किया जाता है।