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प्राइवेट स्कूलों को मात देता ये सरकारी स्कूल, शिक्षा के साथ दे रहा इंसानियत की सीख

कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 05 Feb 2021 05:18 PM IST
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Chandigarh : Government school of Dhanas competes with private schools 
धनास सरकार स्कूल का मिड डे मील का कमरा। - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ में धनास में एक ऐसा सरकारी स्कूल है जो व्यवस्थागत ढांचे और अकादमिक में निजी स्कूलों को भी पछाड़ रहा है। स्कूल में शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सके, इसलिए शिक्षकों के बच्चे भी उन्हीं के स्कूल में पढ़ रहे हैं। गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल धनास की प्राचार्य सीमा रानी बताती हैं कि अभी पांच शिक्षकों के बच्चे इसी स्कूल में ही पढ़ रहे हैं। कुछ शिक्षकों के बच्चे छोटे हैं, उन्हें भी प्रोत्साहित किया जा रहा है कि नर्सरी में दाखिला अपने स्कूल में ही कराया जाए। इस स्कूल में बच्चों को क्रिएटिविटी सिखाने के लिए नए नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। 
Chandigarh : Government school of Dhanas competes with private schools 
स्कूल में बनी टंकी। - फोटो : अमर उजाला
हर्बल गार्डन में पानी देने के लिए बनवाई टंकी 
प्राचार्य सीमा ने बताया कि स्कूल के बाहर ही वाटर वर्क्स है। जब वहां से पानी के टैंकर भरकर जाते थे तो बहुत सारा पानी टैंकर ओवरफ्लो होने के कारण व्यर्थ जाता था। शुरुआत में हम एक पाइप के जरिए व्यर्थ पानी हर्बल गार्डन की सिंचाई के लिए इस्तेमाल करते थे। उसके बाद भी बहुत सारा पानी व्यर्थ हो जाता था, इसलिए स्कूल में सिंचाई के लिए पानी एकत्रित करने के लिए टंकी बनवा ली। अब सारा व्यर्थ पानी टंकी में भर लेते हैं। इस पानी को किचन व हर्बल गार्डन और मैदान की सिंचाई के लिए इस्तेमाल करते हैं। 
 
Chandigarh : Government school of Dhanas competes with private schools 
सरकारी स्कूल का पार्क। - फोटो : अमर उजाला
किड्स पार्क में पुराने टायरों-पाइपों से बनाई सुरंग
ज्यादा से ज्यादा बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिले के लिए आकर्षित करने के लिए यहां किड्स पार्क बनवाया है। किड्स पार्क में झूलों को व्यर्थ सामग्री से बनाया गया है। पार्क में पुराने टायरों और पाइप के माध्यम से बच्चों के खेलने के लिए सुरंग बनाई गई है। इसमें खेलते वक्त बच्चों को फोकस करना पड़ता है जिससे दिमाग और शरीर का संतुलन भी बना रहता है। बच्चों के ध्यान करने के लिए छोटी झोपड़ी भी बनाई गई है। 
 
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स्कूल में लगा फ्रिज। - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में बच्चों के पोषण में आई कमी, बनाया सांझा चूल्हा 
शिक्षकों ने बच्चों से लॉकडाउन में उनके खानपान को लेकर चर्चा की। इस दौरान सामने आया कि कई बच्चों के परिवार का रोजगार छीनने पर वे दिन में एक ही समय खाना खाते थे। मिड डे मील भी बंद था। शिक्षकों ने मिलकर सांझा चूल्हा बनाने का फैसला लिया। नवंबर में स्कूल खुलने के बाद शिक्षकों ने एक फ्रीज रखा, उसमें सब अपने घर से फल, ओट्स, गुड़, अंकुरित दालें आदि लाकर रखते हैं। जब फ्रिज खाली हो जाता है तो शिक्षक आपस में मिलकर मौसमी फल ले आते हैं। जिन बच्चों की आर्थिक हालत अभी खराब है उन्हें सूखा राशन भी देते हैं। कक्षा में बातचीत के आधार पर और घर में उसकी डाइट के अनुसार शिक्षक बच्चों को फल खाने के लिए देते हैं। 
 
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स्कूल में लगी हेल्प डेस्क। - फोटो : अमर उजाला
बच्चों और शिक्षकों ने बनाई हेल्प डेस्क 
स्कूल की गैलरी में बच्चों और शिक्षकों के परस्पर सहयोग से हेल्प डेस्क बनाई गई है। इसमें किताबें, पेन, पेंसिल, रंग इत्यादि रखा जाता है। कोई भी विद्यार्थी वहां से जरूरत के अनुसार किताब और रंग लेते हैं। पढ़ने और काम करने के बाद उसे वापस डेस्क पर रख दिया जाता है, जिससे वह अन्य बच्चों के भी काम आ सके। इस डेस्क को बनाने का उद्देश्य विद्यार्थियों में बांटकर वस्तुएं इस्तेमाल करने की भावना विकसित करना था। इस डेस्क की मैनेजमेंट भी बच्चे ही करते हैं जिससे विद्यार्थियों में अनुशासन और ईमानदारी को विकसित किया जा सके। 

 
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