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Amarinder Singh: इन पांच बिदुंओं पर कैप्टन व भाजपा की सोच अलग, क्या आसान होगी डगर, टिकी सबकी नजर

Mon, 19 Sep 2022 09:12 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Mon, 19 Sep 2022 09:12 PM IST
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Differences in views of BJP and Capt Amarinder Singh on many issues
पीएम मोदी, कैप्टन अमरिंदर सिंह और साथ में रणइंदर सिंह। - फोटो : फाइल

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। उनकी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का भी भाजपा में विलय हो गया। इससे पहले उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। अमरिंदर सिंह के पार्टी में शामिल होने पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कैप्टन के पार्टी में आने के मायने हैं। वह शांति और सुरक्षा के पक्षधर हैं। कैप्टन के लिए देश सर्वोपरि है।



मगर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बेशक अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का भाजपा में विलय कर दिया है लेकिन कैप्टन के लिए भाजपा में डगर आसान नहीं होगी।

Differences in views of BJP and Capt Amarinder Singh on many issues
कैप्टन अमरिंदर सिंह। - फोटो : एएनआई

पंजाब में कांग्रेस का पर्याय रहे कैप्टन
कैप्टन अमरिंदर सिंह के कारण ही कांग्रेस पंजाब में 2002 और 2017 में दो बार सरकार बना सकी। ऑपरेशन ब्लू स्टार और 1984 में दिल्ली में सिख विरोधी दंगों के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस 2007 और 2012 में हारने के बाद भी एक मजबूत राजनीतिक ताकत में रही। हार के बावजूद उसका मतदान प्रतिशत लगभग विजयी अकाली-भाजपा गठबंधन के बराबर था लेकिन 2022 के चुनाव में कैप्टन के बगैर पंजाब कांग्रेस 82 सीटों से घटकर केवल 18 पर सिमट गई।

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कैप्टन अमरिंदर सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर। - फोटो : @BJP4India

कैप्टन के आगे चुनौती
1. कैप्टन अमरिंदर सिंह दो बार कांग्रेस से पंजाब के मुख्यमंत्री रहे हैं लेकिन तमाम नेताओं की निगाह इस तरफ है कि भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी क्या भूमिका रहने वाली है। कैप्टन 80 साल के हैं और भाजपा ने चुनाव लड़ने के लिए अपने नेताओं की 75 साल की उम्र सीमा तय कर रखी है। 75 साल से ऊपर के नेताओं को भाजपा टिकट नहीं देती है। ऐसे में कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए सियासी डगर थोड़ी मुश्किल हो सकती है। ऐसा नहीं है कि भाजपा में नियम पक्के हैं, भाजपा ने केरल में श्रीधरन को सीएम का चेहरा बनाकर उम्र सीमा की लिमिट को तोड़ चुकी है। कैप्टन को क्या जिम्मेदारी दी जाती है, सबका ध्यान इस तरफ टिका है।

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कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : ANI

2. पंजाब विधानसभा चुनाव में अमरिंदर सिंह की पार्टी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। महज आधा फीसदी वोट कैप्टन की पार्टी को पड़े थे। पंजाब में एक बड़ा चेहरा होने के बावजूद अमरिंदर ने जिन 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, उन सभी को हार मिली। खुद अमरिंदर भी चुनाव हार गए। ऐसे में भाजपा पंजाब के कद्दावर नेता उनको क्या सम्मान देते हैं, सबकी नजर टिकी हुई है।

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गृह मंत्री अमित शाह और पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह। - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

3. कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के मुद्दों को लेकर हमेशा केंद्र के खिलाफ रहे हैं। पानी के मुद्दे पर उन्होंने सीएम रहते केंद्र में अपनी पार्टी की डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के खिलाफ आवाज उठाकर बिल रद्द कर दिया था। जिस कारण उनको पंजाब के पानी का राखा कहा जाता है, ऐसे में पंजाब के पानी का विवाद हरियाणा के साथ लगातार है। कैप्टन के लिए आसान नहीं होगा कि वह हरियाणा के साथ मिलकर चलें, जहां पर भाजपा की सरकार है।

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