पंजाब के अमृतसर में हुए दिल दहला देने वाले बम धमाके के बारे में प्रत्यक्षदर्थियों ने बताया। पूरी वारदात रोंगटे खड़े कर देने वाली थी। कई लोगों ने कहा जब तक कुछ समझ पते तब तक चीख पुकार मच चुकी थी।
अमृतसर में आंतकी हमले की कहानी चश्मदीदों की जुबानी, बोले- जोर का धमाका हुआ, छा गया अंधेरा
अमृतसर के राजासांसी रोड पर गावं अदलीवाल लिंक रोड पर स्थित निरंकारी भवन में हुए हमले में घायल गुरुनानक देव अस्पताल में इलाज करवा रहे हरजोत सिंह ने बताया कि जब आतंकी भवन में घुसे, तब वह सत्संग कर रहा था। जैसे ही बम गिरा, उसने पीछे मुड़कर देखा। एक आतंकी उससे कुछ ही दूरी पर खड़ा था। लगा, उसने गुरु पर कोई पथर फेंका है। मैं उसे पकड़ने के लिए उठा कि धमाका हो गया। धमाके के बाद उसने देखा कि उसके पिता कुलदीप सिंह जख्मी हो गए हैं।
उसके भाई आशु की टांगों से खून बह रहा था। मां और बहन सुरक्षित थीं। इलाज करवा रही राजवंत कौर ने कहा कि उसे लगा कि किसी ने कोई बड़ा पथर मंच पर फेंका है। मैं सत्संग में पहली कतार में बैठी थी। पहले ऐसा लगा कि मुझे करंट लग रहा है। आसपास नजर गई तो कई श्रद्धालु खून से लथपथ दिखे। संगत बाहर दौड़ रही थी। थोड़ी देर बाद एहसास हुआ कि मेरी टांगों से खून रिस रहा है। चेहरे पर हाथ लगाया तो लगा कि खून निकल रहा है।
निर्मल कौर ने बताया कि धमाके की आवाज सुनकर उसका तो दिमाग ही सुन्न हो गया था। वह छेहरटा से सत्संग सुनने के लिए हर हफ्ते यहां आती हैं। राजप्रीत कौर के अनुसार उसका बेटा इस आतंकी हमले में बाल-बाल बच गया। वह सत्संग के बीच में ही उठ कर चला गया था। वह भी पहली पंक्ति में बैठा था। गुरुनानक देश अस्पताल में सिमरन जीत कौर, आकाशदीप सिंह, जसबीर कौर, लाल बिहारी, हरविंदर सिंह, कुलदीप सिंह, निर्मल कौर, सुरजीत कौर, कुलविंदर कौर, गगनदीप सिंह और हरजोत सिंह का इलाज चल रहा है।
भवन के बाहर खड़े सेवादार श्रद्धालुओं को भवन के भीतर जाने के लिए रास्ता बता रहे थे। एक घंटे के सत्संग के बाद दो नौजवान मोटर साइकिल में भवन के बाहर पहुंचे। सेवादारों ने हाथ जोड़कर उनका अभिनंदन किया। गर्म लोइयां लपेटे दोनों नौजवानों को मोटर साइकिल एक तरफ पार्किंग करने के लिए कहा गया। दोनों ने अपना मुंह लोई से ढका था। अचानक एक युवक मोटर साइकिल से उतरा और उसने सेवादार की कमर पर पिस्तौल लगाकर उसे चुप रहने की धमकी दी।
दूसरा आतंकी मोटर साइकिल से तेजी से नीचे उतरा और सत्संग भवन की तरफ दौड़ा। अंदर जाकर मंच पर सत्संग कर रहे देशा सिंह के पास खड़ा हो गया। इसके बाद उसने अपनी लोई में छिपाए हैंड ग्रेनेड की पिन निकाली और मंच पर ग्रेनेड फेंककर भाग गया। बाहर सेवादारों पर पिस्तौल ताने खड़ा आतंकी धमाके के आवाज के साथ चौकन्ना हो गया। जैसे ही अंदर से आतंकी बाहर आया और दोनों बाइक पर बैठकर गांव अदलीवाल की तरफ भाग गए।
गगनदीप की जुबानी, हमले की पूरी कहानी...
गगनदीप सेवादार ही ऐसा शख्स है, जिसने आतंकवादियों को पहले देखा और उनके साथ करीब 15 मिनट बिताए। गगनदीप सिंह ने पूरी घटना के बारे में विस्तार से
बताया कि किस तरह से हमलावर आए और किस तरह से हाल के भीतर ग्रेनेड फेंका। गगनदीप ने बताया कि वह गेट पर सेवा के लिए खड़ा हुआ था। इस दौरान एक घड़ूका (सवारी ढोने वाला आटो) आया, जिसमें संगत बैठी हुयी थी। दो लोग बाइक पर साथ ही आ गये।
एक व्यक्ति संगत के साथ हाल में सत्संग में चला गया। दूसरा व्यक्ति मेरे पास खड़ा हो गया और पिस्टल मेरे पर रख दी पूछने लगा कि यहां क्या हो रहा है ? मेरा साथ खड़ा दूसरा सेवादार बताने लगा कि अंदर सत्संग हाल है, सत्संग हो रहा है। पिस्टल वाला व्यक्ति मेरे और साथी सेवादार को एक तरफ ले गया। हमें टायलेट की तरफ ले गए और स्कूटर स्टैंड पर खड़े सेवादार लखबीर सिंह को भी इशारा कर बुला लिया।
संगत के साथ अंदर गए व्यक्ति ने हाल के भीतर ग्रेनेड फेंक दिया। ग्रेनेड फेंकने वाला भागकर हाल से बाहर निकला और दौड़ता हुआ दरवाजे की तरफ आया तो पिस्टल वाला आतंकी भी उसके साथ भाग गया। करीब 15 मिनट आतंकी सत्संग घर में रहे, चेहरा छिपाने के लिए उन्होंने कपड़ा लपेटा हुआ था, जिसको पंजाबी में परना कहते हैं। धमाके की आवाज के बाद भगदड़ मच गयी और संगत जख्मियों को उठाने लगी। एक श्रद्धालु ईंट मारने लगा था लेकिन तब तक दोनों भाग निकले।
