तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाने और कानून बनाकर कृषि उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने की मांग को लेकर चल रहा किसान आंदोलन बेहद व्यवस्थित है। आंदोलन में भारतीय किसान यूनियन (एकता) डकौंदा समर्थक किसानों की व्यवस्था को देखने से सेना की याद आती है। इसका श्रेय किसान महापुरुषों से मिलने वाली प्रेरणा को देते हैं।
किसान आंदोलन : बिरसा मुंडा, शहीद भगत सिंह बने किसानों की प्रेरणा, सेना की तरह संभाला जा रहा मोर्चा
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बहादुरगढ़ में दिल्ली-रोहतक बाईपास पर पकौड़ा चौक के निकट निर्माणाधीन ऑटो मार्केट का विशाल मैदान है। इसी मैदान में नजर आती हैं किसानों के ट्रैक्टर-ट्रालियों की बस्ती। इस पड़ाव को आंदोलकारियों ने बीबी गुलाब कौर नगर नाम दिया है। बताया गया है कि गुलाब कौर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रही। वह अंग्रेजों से टक्कर लेने वाले क्रांतिकारियों को हथियार उपलब्ध करवाती थी।
किसान बलजिंदर सिंह ने बताया कि वे जीत के लिए आए हैं। जीत से पहले पीछे न हटने का संकल्प पक्का है। 26 नवंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन के पहले ही हफ्ते में भारती किसान यूनियन (एकता) डकौंदा से जुड़े सैकड़ों किसान टीकरी बार्डर-बहादुरगढ़ पहुंच गए थे। जो किसान नेतृत्व के कहने तक बीबी गुलाब कौर नगर में रहेंगे। समय लंबा भी हो सकता है। इसलिए अनुशासन और व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा गया है।