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ग्राउंड रिपोर्ट: हर ट्रैक्टर के साथ सिलिंडर-चूल्हा, लगातार चल रहा खीर-पूरी का लंगर, ऐसा है शंभू का नजारा
रिंपी गुप्ता/सुदेश तनेजा, अमर उजाला/संवाद, पटियाला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 17 Feb 2024 03:24 PM IST
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किसान आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
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Shambhu Border News: शंभू बॉर्डर पर पिछले पांच दिन से किसान आंदोलन जारी है। पंजाब के हजारों किसान अलग-अलग शहरों व गांवों से पंजाब-हरियाणा के बॉर्डर पर आकर डट गए हैं। केंद्र के साथ तीन दौर की वार्ता बेनतीजा रही है। रविवार को चौथे दौर की बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं। इस बीच शंभू पर एक अस्थायी शहर बस गया है।
किसान आंदोलन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पांच किलोमीटर तक बसा अस्थायी खबर
किसानों ने अपना आशियाना ट्रैक्टर-ट्रालियों व खुले आसमान को बना लिया है। हर ट्रैक्टर ट्राली के पास गैस सिलेंडर चूल्हे के साथ राशन की भी व्यवस्था की गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग के पांच किलोमीटर एरिया में अस्थायी तौर पर नगर बसाया गया है। किसानों के लिए पानी के टैंकरों की व्यवस्था की गई है। किसान सड़क पर ही नहाकर अपनी-अपनी ट्राली में तैयार होकर धरने में शामिल हो रहे हैं।
किसानों ने अपना आशियाना ट्रैक्टर-ट्रालियों व खुले आसमान को बना लिया है। हर ट्रैक्टर ट्राली के पास गैस सिलेंडर चूल्हे के साथ राशन की भी व्यवस्था की गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग के पांच किलोमीटर एरिया में अस्थायी तौर पर नगर बसाया गया है। किसानों के लिए पानी के टैंकरों की व्यवस्था की गई है। किसान सड़क पर ही नहाकर अपनी-अपनी ट्राली में तैयार होकर धरने में शामिल हो रहे हैं।
किसान आंदोलन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लगातार चल रहा लंगर
बड़े स्तर पर दूध, खीर, जलेबी, पूरी छोले, पेय पदार्थ के अलावा दाल रोटी का लंगर सारा दिन चलता रहता है इसके लिए महिलाएं भी पूरी तरह डटी हुई हैं। रात को ज्यादातर किसान अपने वाहनों में सोते हैं और बाकी बिस्तर लगाकर सड़कों पर ही लेट जाते हैं।
बड़े स्तर पर दूध, खीर, जलेबी, पूरी छोले, पेय पदार्थ के अलावा दाल रोटी का लंगर सारा दिन चलता रहता है इसके लिए महिलाएं भी पूरी तरह डटी हुई हैं। रात को ज्यादातर किसान अपने वाहनों में सोते हैं और बाकी बिस्तर लगाकर सड़कों पर ही लेट जाते हैं।
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किसान आंदोलन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रात को पहरा देता है सिक्योरिटी विंग
किसानों का एक सिक्योरिटी विंग भी बनाया गया है जो दिन में सफाई व्यवस्था देखते हैं वहीं रात को पहरा देते हैं।
किसानों का एक सिक्योरिटी विंग भी बनाया गया है जो दिन में सफाई व्यवस्था देखते हैं वहीं रात को पहरा देते हैं।
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किसान आंदोलन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अस्थायी क्लीनिक बनाए
शंभू बार्डर पर ही अस्थायी क्लीनिक तैयार किए गए हैं जिसमें हर सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। अगर किसी भी किसान की तबियत ज्यादा खराब होती है तो वहां पर 10 से ज्यादा एंबुलेंस मौजूद हैं जो फौरन ही मरीज को किसी बड़े अस्पताल में उपचार के लिए ले जाती है।
शंभू बार्डर पर ही अस्थायी क्लीनिक तैयार किए गए हैं जिसमें हर सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। अगर किसी भी किसान की तबियत ज्यादा खराब होती है तो वहां पर 10 से ज्यादा एंबुलेंस मौजूद हैं जो फौरन ही मरीज को किसी बड़े अस्पताल में उपचार के लिए ले जाती है।