पीजीआई ने पहली बार 110 साल की बुजुर्ग महिला के कूल्हे का प्रत्यारोपण करने में कामयाबी हासिल की है। आमतौर पर इतनी ज्यादा उम्र में कूल्हे का प्रत्यारोपण नहीं होता। इस उम्र में कई रिस्क होते हैं। सर्जरी के भी और सर्जरी नहीं कराने के। पीजीआई ने इस रिस्क को लिया और सर्जरी करने में सफलता हासिल की। पीजीआई के आरथोपीडिक्स डिपार्टमेंट का दावा है कि भारत में इससे पहले इतनी उम्र की महिला का कूल्हा प्रत्यारोपण नहीं हुआ है
दावा: देश में पहली बार डॉक्टरों का कमाल, 110 वर्षीय महिला के कूल्हे बदलने में रहे कामयाब
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दिल्ली के एक अस्पताल में 105 वर्षीय महिला की सर्जरी हो चुकी है, जबकि गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के मुताबिक सबसे उम्रदराज महिला का कूल्हा प्रत्यारोपण 112 साल की उम्र में हुआ था। इस हिसाब से भारत का रिकॉर्ड पीजीआई के नाम जाता है। इस रिकॉर्ड के बारे में पीजीआई ने काफी खोजबीन करने के बाद ही मीडिया में जारी किया है। पीजीआई के आरथोपीडिक्स डिपार्टमेंट की मरीज मौलीजागरां कालोनी निवासी मंजौकी की उम्र 110 साल है। जब वह उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में थी, तो गिरने से उनके कूल्हे में फ्रैक्चर आ गया। 29 दिसंबर को इस बारे में पीजीआई को जानकारी मिली।
चार जनवरी को उन्हें दाखिल किया और आठ जनवरी को मात्र आधे घंटे में सर्जरी कर दी गई। सर्जरी की टीम में प्रोफेसर विजय गोनी, डॉ. तनवीर समारा, डॉ. दीपक, डॉ. करन, डॉ. प्रदीप और डॉ. सुमित शामिल रहे। डॉ. गोनी ने बताया कि फ्रैक्चर होने से पहले जिस तरह बुजुर्ग महिला चल रही थीं, सर्जरी के बाद ठीक वैसे चल रही हैं। फ्रैक्चर होने के बाद वह बेड पर आ गई थीं। बिल्कुल भी चल नहीं पा रही थी।
मरीज का दोनों तरह से रिस्क था
डॉ. गोनी ने बताया कि मरीज को दोनों तरफ से रिस्क था। यदि वह सर्जरी नहीं कराती तो उन्हें बेडशोर, रक्त संचार में रुकावट और हार्ट ब्लॉक हो सकता था। सर्जरी के दौरान भी रिस्क था। इतनी उम्र में मरीज को एनेस्थीसिया देना, सर्जरी करना, सर्जरी के दौरान रिस्क रहता है। कूल्हा प्रत्यारोपण के साथ सीमेंट का इस्तेमाल होता है, इसका एक रिस्क है। इसलिए मरीज को दोनों तरह से रिस्क था।
ऐसे मरीजों की सर्जरी के दौरान एनेस्थेटिस्ट और इंटेंसिविस्ट सहित एक कुशल बैकअप टीम की आवश्यकता होती है। सर्जरी के दौरान कई जटिलताएं आती हैं। कई बार सर्जरी के दौरान केस बिगड़ जाते हैं। इस केस को डॉ. तनवीर ने बहुत ही कुशलता से प्रबंधित किया। पीजीआई में 102 साल की महिला के कूल्हे का प्रत्यारोपण हो चुका है। अब तक इतनी उम्र का कोई मरीज पीजीआई में नहीं आया था।
फ्रैक्चर का रहता है रिस्क, हड्डियों को मजबूत बनाएं
- रोजाना 30 से 45 मिनट की एक्सरसाइज जरूर करें।
- कैल्शियम के लिए दूध से बनी चीजें खाएं।
- विटामिन डी की कमी न होनें दें। धूप में 30 मिनट बैठें।
- वजन को कंट्रोल में रखें। न कम होने दें और न ही ज्यादा
- हड्डियों में दिक्कत आने पर आरथोपीडिक्स को दिखाएं।
ऑनलाइन जो रिकॉर्ड उपलब्ध है, उसके मुताबिक यह भारत ही नहीं बल्कि एशिया का पहला केस है। 110 साल की उम्र में कूल्हे का प्रत्यारोपण करना आसान नहीं होता। सर्जरी के कई रिस्क होते हैं। इन सभी रिस्क को पीजीआई की टीम ने बहुत अच्छी तरह से मैनेज किया है। -डॉ. विजय गोनी, प्रोफेसर आरथोपीडिक्स डिपार्टमेंट पीजीआई