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Women's Day: उम्र 74 साल, करती हैं वो काम, लोग उड़ाते थे मजाक...अब पीएम मोदी देंगे अवार्ड

Fri, 08 Mar 2019 12:56 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Fri, 08 Mar 2019 12:56 PM IST
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International Women's Day, Success Story of Old Lady who will awarded by PM Modi
सुदर्शना, महिला दिवस
इंटरनेशनल वूमेन्स डे के मौके पर हम आपको सुना रहे हैं, 74 वर्षीय महिला के गजब के जज्बे की कहानी। कभी लोग इनका मजाक उड़ाते थे, और अब इन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक विशेष अवार्ड देकर सम्मानित करेंगे।
International Women's Day, Success Story of Old Lady who will awarded by PM Modi
सुदर्शना, महिला दिवस
पंजाब के पठानकोट जिला के नीम पहाड़ी क्षेत्र धार कलां के गांव हाड़ा की सुदर्शना जब भी किसान मेले में जाती थीं, तो लोग उनका मजाक उड़ाते थे। कहते थे थैला उठाकर कहीं भी चली जाती हैं। वही सुदर्शना आज उन्हीं लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। यही नहीं, सुदर्शना को राष्ट्रीय स्तर पर दिए जाने वाले महिला किसान अवार्ड के लिए चुना गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें सम्मानित करेंगे।

 
International Women's Day, Success Story of Old Lady who will awarded by PM Modi
सुदर्शना, महिला दिवस
देश भर से चुनी गईं 114 महिलाओं में से एक सुदर्शना को सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाकर अपने बगीचों के आम, आंवले और बांस से बने उत्पाद ऑनलाइन बेचने व लाखों रुपये की कमाई करके महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनने के लिए यह अवार्ड दिया जा रहा है। सुदर्शना आज विश्वविख्यात कंपनी डाबर की थोक सप्लायर भी हैं। उन्हीं के ग्रुप से आंवला और अन्य सामान डाबर को सप्लाई किया जाता है।
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सुदर्शना, महिला दिवस
सुदर्शना ने सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाकर इसे आमदनी का जरिया बनाया। बेहद कम पढ़ी लिखी सुदर्शना व्हाट्सएप चलाना भी जानती हैं और काफी तेजी से टाइप करती हैं। सुदर्शना द्वारा तैयार की गईं आंवला कैंडी, आंवला अचार, अमचूर, आम पापड़ और बड़ियों की मेक इन पंजाब की वेबसाइट पर धूम है। 74 साल की सुदर्शना बताती हैं कि वे पहले घर में खाने के लिए अचार बनाती थीं। उनके गांव के राजपूत परिवारों में महिलाओं को बाहर निकलने की आजादी कम थी।

 
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सुदर्शना, महिला दिवस
लेकिन जब उनके बच्चे अपनी-अपनी जिंदगी में बस गए, तो 2002 में उन्होंने अपने हुनर को अगले मुकाम पर ले जाने की सोची और सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाया। इसमें उन्हें परिवार का भी साथ मिला।  फिर उन्होंने गांव की महिलाओं के साथ बाग से आम, आंवला, गलगल, नींबू, पीठा, कढ़ी पत्ता लेकर आना। उन्हें छांटना, सुखाना और उबालकर उनसे हर्बल चीजें तैयार करना शुरू किया। उन्हें लेकर वह 65 किमी दूर गुरदासपुर और लुधियाना एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के किसान मेलों में जाने लगीं।
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