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5 बेटियां, 'चीन हो या पाकिस्तान, लड़ेंगी तब तक, जब तक है जान'

Wed, 20 Jan 2016 11:21 AM IST
Updated Wed, 20 Jan 2016 11:21 AM IST
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5 बेटियां, 'चीन हो या पाकिस्तान, लड़ेंगी तब तक, जब तक है जान'

ITBP Female Soldiers rubina khatoon, amandeep kaur, ekta ratoori, anushree pathak, poonam bisht prof
आईटीबीपी पंचकूला में 44 सप्ताह की ट्रेनिंग के बाद रुबीना समेत 5 बेटियां उन 500 बेटियों में से एक हैं, जो बार्डर पर देश की सेवा के लिए तैयार है। देखिए, इनका जज्बा। -रिपोर्ट/अरविंद वाजपेयी।

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पहले बात रूबीना की। एके-47 हो या इंसास या कार्बाइन और पिस्टल। रुबीना खातून की गोली निकलेगी तो सीना चीरती चली जाएगी। यह खातून ऐसी ही है। रुबीना के लिए सिर्फ आईटीबीपी ही एकमात्र विकल्प था, उनके लिए टीचिंग जैसा जॉब भी था और अन्य नौकरी भी पर दबंग रुबीना ने चुना आईटीबीपी को। उत्तराखंड की रहने वाली रुबीना खातून ने बताया कि उन्होंने एमए किया और एसएससी की भर्ती निकली तो अप्लाई किया।

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वर्ष 2014 में उन्होंने आईटीबीपी ज्वाइन कर लिया। रुबीना ने बताया कि उनके पिता जाकिर हुसैन और मां शाहा खातून खुले विचार धारा के हैं। लेकिन बेटी होने के नाते पिता को यह नौकरी नहीं समझ में आ रही थी। जब पिता को उन्होंने समझाया तो पिता राजी हो गए। अब उनकी पोस्टिंग चंडीगढ़ टीपीटी बटालियन में हो गई है। सिर्फ रुबीना ही नहीं उसके जैसी कई वीरांगनाएं हैं, जो देश सीमाओं पर रक्षा के लिए तैयार हैं।
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अमनदीप कौर पंजाब की रहने वाली हैं। वर्ष 2014 में आईटीबीपी में ज्वाइन किया। वह पंजाब की मार्शल कौम से हैं। उनको वर्दी का शौक था। अमनदीप ने बताया कि उनके पापा मेकेनिक हैं और भाई पढ़ाई कर रहा है। एक छोटी बहन है। अमनदीप कौर ने बताया कि उनकी पोस्टिंग लद्दाख में की गई है। पोस्टिंग कहीं हो उनको कोई चिंता नहीं। उन्होंने बताया कि उनके साथ आईटीबीपी भानू के ट्रेनिंग सेंटर से आठ लड़कियां जा रही हैं।
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एकता रतूड़ी उत्तराखंड (देहरादून) की हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता आईटीबीपी में थे। वह असम में पोस्टेड थे। उनको हार्ट की समस्या थी। हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के बाद एकता को आईटीबीपी में नौकरी मिल गई। एकता ने बताया कि अपने पिता को देखकर लगता था कि यह जॉब काफी सम्मान वाली है। वर्ष 2012 में आईटीबीपी में ज्वाइन किया और अब पोस्टिंग मिल गई है।
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