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CourageInKargil: आज भी छलक उठतीं आंखें, लाडले की रूह पूछती है, मां! क्या मुझे सैन्य मेडल मिला

Sun, 26 Jul 2020 01:20 PM IST
ajay kumar नवदीप शर्मा, पठानकोट (पंजाब)
नवदीप शर्मा, पठानकोट (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 26 Jul 2020 01:20 PM IST
सार

  • शहीद सिपाही हरीश पाल शर्मा की मां राजदुलारी कीं व्यथा, कारगिल विजय दिवस हर वर्ष देता है दर्द 
  • गांव में लाइब्रेरी, स्टेडियम व स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखने की घोषणा अभी तक नहीं की पूरी

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Kargil Vijay Diwas 2020: Kargil War Shaheed Jawan Harish Pal Sharma's Family Waiting For Army Medal
शहीद के परिवार को आज भी सैन्य मेडल का इंतजार।

शहादत का जाम पीने वाले 13 जैक राइफल यूनिट के शहीद हरीश पाल शर्मा की मां की आंखें हर वर्ष विजय दिवस पर छलक उठती हैं। मां कहती है कि दुख की बात है कि कारगिल विजय के 21 वर्ष बाद आज भी उनसे लाडले की रूह बहादुरी का मेडल मिलने के बारे में सवाल करती है कि मां क्या उसे सैन्य मेडल मिला। परिवार को आज भी सरकारों से कई शिकायतें हैं।

Kargil Vijay Diwas 2020: Kargil War Shaheed Jawan Harish Pal Sharma's Family Waiting For Army Medal
शहीद की तस्वीर के साथ मां।

मां का कहना है कि बेशक सरकार कारगिल विजय के 21 वर्ष जश्न के तौर पर मना रही है, मगर सरकारी घोषणाओं के पूरा न होने से हर वर्ष उन्हें यह विजय दिवस दर्द देता है। जिले के सीमावर्ती गांव झरौली के शहीद लांसनायक हरीश पाल शर्मा की माता राज दुलारी व भाई सतीश शर्मा ने विजय दिवस की पूर्व संध्या पर दर्द बयां करते हुए बताया कि कारगिल युद्ध छिड़ने पर अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ टाइगर हिल फतेह करते हुए हरीश पाल ने शहादत का जाम पिया था। 

Kargil Vijay Diwas 2020: Kargil War Shaheed Jawan Harish Pal Sharma's Family Waiting For Army Medal
Kargil vijay diwas

शहीद के शौर्य व अदम्य साहस के लिए सरकार ने मरणोपरांत सैन्य मेडल देने की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि गांव के सरकारी स्कूल का नाम उनके शहीद बेटे के नाम पर नहीं हो सका है। ग्राम पंचायत की ओर से जो यादगारी गेट बनाया है, उसकी हालत भी जर्जर होने से उनके बेटे की शहादत की गरिमा को ठेस पहुंच रही है। 

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Kargil Vijay Diwas 2020: Kargil War Shaheed Jawan Harish Pal Sharma's Family Waiting For Army Medal
शहीद के परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

लांस नायक हरीश पाल शर्मा 15 जून 1999 को अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ टाइगर हिल फतेह करते हुए शहीद हुए थे। उनके शौर्य और अदम्य साहस के लिए सरकार ने उन्हें मरणोपरांत सैन्य पदक देने की घोषणा की थी । 21 साल बाद भी परिवार को अभी इसका इंतजार है। मां का कहना है कि वो दो बेटों के साथ घर का गुजारा मुश्किल से चला रही हैं। अभी तक किसी राजनेता और प्रशासन के अधिकारी ने परिवार की कोई सुध नहीं ली है।

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Kargil Vijay Diwas 2020: Kargil War Shaheed Jawan Harish Pal Sharma's Family Waiting For Army Medal

यह शहीदों का अपमान, देश नहीं बर्दाश्त करेगा: विक्की
शहीद के परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने बताया कि शहीद के अंतिम संस्कार पर राजनेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीद की याद में गांव में लाइब्रेरी, स्टेडियम व स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखने की घोषणा की थी, मगर अफसोस शहादत के 21वर्ष बाद भी वादे पूरे नहीं किए गए। अगर शहीदों के परिवार इसी तरह उपेक्षित होते रहे तो यह देश के शहीदों का अपमान होगा और देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।

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