पंजाब के दिग्गज नेता सुनील जाखड़ ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। लंबे समय से कांग्रेस हाईकमान और उनके बीच सबकुछ ठीक नहीं था। लगातार वह पार्टी की नीतियों पर बोल रहे थे। अंत में पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया तो मामला और बढ़ गया। 14 मई को जाखड़ ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। अब गुरुवार को उन्होंने नई दिल्ली में जेपी नड्डा की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम लिया है। आइए जानते हैं कौन हैं सुनील जाखड़...पंजाब में कितना बड़ा राजनीतिक रसूख और कांग्रेस से अनबन की वजह।
Sunil Jakhar joins BJP: जानें कौन हैं सुनील जाखड़, भाजपाई बनने पर जिनकी चर्चा, पंजाब में कितना बड़ा राजनीतिक रसूख
सुनील जाखड़ 2017 से 2021 तक कांग्रेस के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। 2002-2017 तक जाखड़ अबोहर विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक भी रह चुके हैं। 2012-2017 तक पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना के निधन के बाद गुरदासपुर लोकसभा सीट से सुनील जाखड़ ने जीत दर्ज की थी। सुनील जाखड़ के पिता डॉ. बलराम जाखड़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। वह 10 साल तक लोकसभा अध्यक्ष भी रहे थे। बलराम जाखड़ को मध्य प्रदेश का राज्यपाल भी बनाया गया था। जाखड़ परिवार का पंजाब के अबोहर जिले में बड़ा राजनीतिक रसूख है और पड़ोस के जिलों में भी उनकी पकड़ मजबूत है।
वर्ष 1972 में दिवंगत बलराम जाखड़ ने राजनीतिक में कदम रखा था। कांग्रेस के टिकट पर अबोहर से चुनाव लड़े और जीत हासिल की थी। बलराम जाखड़ के बाद उनके बेटे सज्जन जाखड़ फिर सुनील जाखड़ और अब पोता संदीप जाखड़ अबोहर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े। सज्जन जाखड़ अबोहर से विधायक रह चुके हैं। संदीप जाखड़ इस समय कांग्रेस विधायक हैं। आप की प्रचंड लहर के बावजूद जाखड़ परिवार ने अबोहर सीट पर अपनी पकड़ बना रखी है। सुनील जाखड़ पंजाब में बड़ा गैर-सिख चेहरा हैं। उनकी हर वर्ग में अच्छी पकड़ मानी जाती है। जाखड़ को पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी माना जाता है। पंजाब में कांग्रेस का पर्याय रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह के पार्टी छोड़ने के बाद सुनील जाखड़ के पार्टी से नाता तोड़ते ही साफ हो गया था कि पंजाब में पार्टी का किला अब दरकने लगा है।
ऐसे कांग्रेस से बढ़ी सुनील जाखड़ की दूरियां
पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तनातनी के साथ ही समीकरण बदलने लगे थे। पार्टी हाईकमान ने सिद्धू की नाराजगी को अध्यक्ष पद सौंप खत्म कर दिया था। मगर तत्कालीन अध्यक्ष रहे सुनील जाखड़ पार्टी की कलह से नाखुश थे। इस बीच कैप्टन को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। कैप्टन के स्थान पर सुनील जाखड़, अंबिका सोनी, नवजोत सिंह सिद्धू, सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम सीएम पद की रेस में आ गया था। मगर ऐन वक्त पर पार्टी ने चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का मुख्यमंत्री बना दिया था। इसके बाद जाखड़ तत्कालीन चन्नी सरकार को निशाने पर लेते रहे। हालांकि जाखड़ को राहुल गांधी ने डिप्टी सीएम का ऑफर दिया था। मगर उन्होंने इनकार कर दिया था।
जनसभा में सुनाई थी चन्नी के सीएम बनने की कहानी
सुनील जाखड़ ने एक जनसभा में चन्नी के सीएम बनने की कहानी भी बताई थी। उन्होंने कहा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने के बाद नए सीएम के लिए कांग्रेस में वोटिंग हुई थी। 79 विधायकों में से 42 ने मेरे पक्ष में वोटिंग किया था। चरणजीत सिंह चन्नी के साथ सिर्फ दो विधायक थे। इसके बावजूद वह सीएम बन गए। जाखड़ ने कहा कि मेरे बाद सबसे ज्यादा 16 विधायकों ने सुखजिंदर सिंह रंधावा, 12 विधायकों ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर का नाम लिया था। नवजोत सिंह सिद्धू के पक्ष में छह विधायकों ने वोट दिया था। पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद सुनील जाखड़ ने पूर्व सीएम चन्नी को आड़े हाथों लिया था। वह लगातार हाईकमान पर भी सवाल दाग रहे थे। पार्टी की हार पर वह नेतृत्व पर हमलावर थे। अंत में पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया लेकिन सुनील जाखड़ ने इसका जवाब तक नहीं दिया। 14 मई को पार्टी को अलविदा कह सबको चौंका दिया।