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शहीद पंकज सांगवान को अंतिम विदाई, भावुक मां बोलीं-‘बेटे पर नाज, हर मां जन्मे ऐसा लाल’
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 22 Jun 2019 12:37 AM IST
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शहीद पंकज सांगवान को अंतिम विदाई
- फोटो : ANI
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अरुणाचल प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान में शहीद हुए गांव कोहला के वायुसेना कर्मी पंकज का पार्थिव शरीर हादसे के 18 दिन बाद गांव पहुंचा। पार्थिव शरीर के गांव में पहुंचते ही हर ग्रामीण की आंखें नम हो गईं। बेटे का पार्थिव शरीर देखते ही मां सुनीता भावुक हो गई। मां बोली बेटे पर नाज है, हर मां ऐसे लाल को जन्म दे।
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शहीद पंकज सांगवान की मां
- फोटो : अमर उजाला
बाद में राजकीय सम्मान के साथ पंकज के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सांसद रमेश कौशिक, विधायक जगबीर मलिक व मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जैन ने पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित किया। बता दें कि एएन-32 विमान असम के जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरने के बाद 3 जून को अरुणाचल प्रदेश में लापता हो गया था। जिसमें गांव कोहला के वायु सैनिक पंकज सांगवान भी सवार थे।
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चचेरे भाई ने दी मुखाग्नि
- फोटो : अमर उजाला
विमान के साथ इकलौते बेटे पंकज के लापता होने की सूचना 3 जून को रात 8 बजे वायुसेना के अधिकारियों ने दी थी। जिसके बाद से पंकज की मां सुनीता कुमारी और पिता धर्मबीर सांगवान के आंसू नहीं थम रहे थे। पंकज 1 जुलाई 2015 को वायुसेना में भर्ती हुए थे और इन दिनों असम के जोरहाट एयरबेस पर एयरमैन के पद पर तैनात थे। बाद में वायुसेना ने विमान में गए सभी 13 कर्मियों को मृत घोषित कर दिया था। उसके बाद से पंकज के पार्थिव शरीर के गांव में पहुंचने का इंतजार था। शुक्रवार को जब पंकज का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा तो उनकी मां सुनीता भावुक हो गई।
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शहीद को आखिरी सलामी
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि पंकज हमेशा उनके बीच रहेगा। उनकी आंख नम हो गईं और उनकी जुबान से यही निकला कि उसका बेटा पंकज शहीद हो गया है। उसमें देश की रक्षा करने का जज्बा था। वह सदा देश सेवा की बात कहता था। हर मां मेरे बेटे जैसे लाल पैदा करें। वह सदैव मेरे दिल में जीवित रहेगा। गांव के युवा व लोग बाइक, गाड़ी व ट्रैक्टरों पर तिरंगा लगाकर गोहाना पहुंचे और गोहाना से काफिले के साथ पार्थिव शरीर को गांव तक लेकर आए।
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अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान भारत माता की जय के साथ पंकज अमर रहे के नारे लगाते रहे। उनके नारों से हर तरफ देश सेवा का जज्बा दिख रहा है। गांव में पंकज का पार्थिव शरीर दोपहर ढाई बजे पहुंचा। पार्थिव शरीर को वायुसेना कर्मी तीन बजे घर के अंदर लेकर पहुंचे। पार्थिव शरीर पर पंकज का चित्र रखकर मां-पिता के अलावा अन्य परिजनों को अंतिम दर्शन कराए गए। इसके बाद ग्रामीणों की सहमति पर घड़वाल मार्ग के समीप निर्माणधीन पार्क में राजकीय सम्मान के साथ पंकज का अंतिम संस्कार किया गया।
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