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कोरोना काल में मजदूरों का हाल देख भावुक हो जाएंगे आप, क्लिक कर देखें मार्मिक तस्वीरें

Wed, 22 Jul 2020 01:24 AM IST
ajay kumar मोनिका नागर, चंडीगढ़
मोनिका नागर, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 22 Jul 2020 01:24 AM IST
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Story of laborers wandering for employment in Chandigarh
रोजी रोटी की तलाश में मजदूर। - फोटो : अमर उजाला

लॉकडाउन के बाद बेरोजगारी की जो बाढ़ आई है, उसके निशान शहर के लेबर चौकों पर काम के इंतजार में खड़े मजदूरों के चेहरों पर देखे जा सकते हैं। इनकी आंखों में सपनों की जगह मायूसी और निराशा झलक दिख रही है। इन मजदूरों में कोरोना से ज्यादा खौफ बेरोजगारी का है। संक्रमण से बचने के लिए कुछ ने ही मास्क लगाए हैं, बाकी कुछ ने गमछे से जैसे-तैसे अपने मुंह को ढक रखा है जबकि कई बिना मास्क नजर आ रहे हैं। आइए देखते हैं तस्वीरें...

Story of laborers wandering for employment in Chandigarh
बस एक अदद रोजगार की तलाश। - फोटो : अमर उजाला

इन मजदूरों में काम चलाऊ सोशल डिस्टेंसिंग भी है, मगर सबसे जरूरी यह कि सभी काम के इंतजार में बैठे हैं। यह दृश्य है सेक्टर-40/45 के लाइट प्वाइंट और सेक्टर-20/21 की डिवाइडिंग रोड स्थित लेबर चौक का। इसी बीच सेक्टर-40/45 के लाइट प्वाइंट पर अचानक से एक गाड़ी आकर रुकती है और मजदूरों की उम्मीद बढ़ जाती है। 

Story of laborers wandering for employment in Chandigarh
दिहाड़ी के लिए उम्मीद की दौड़। - फोटो : अमर उजाला

मगर काम एक है और मांगने वाले 20 से ज्यादा। इसी आपाधापी में मजदूर अचानक से कार की ओर दौड़ पड़ते हैं। ऐसी भीड़ लगा लेते हैं, जैसे कि कोरोना नाम की कोई चीज ही नहीं है। न तो सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रहता है और न ही मुंह से सरक कर ठुड्डी पर आए मास्क का। इस चक्कर में कार में बैठा व्यक्ति भी खतरे की जद में आ जाता है। इतना सब कुछ किया, लेकिन काम की बात फिर भी नहीं बनी। 

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Story of laborers wandering for employment in Chandigarh
हर किसी को दिहाड़ी की तलाश। - फोटो : अमर उजाला

दूसरी गाड़ी आई, तब भी यही नजारा देखने को मिला। सुबह आठ बजे से शुरू हुआ सिलसिला साढ़े नौ बजे तक ऐसा ही चलता रहा। पूरे डेढ़ घंटे देखकर में यही बात सामने आई कि मजदूरों को कोरोना से बचाव की चिंता तो है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा काम की। काम न मिलने की हताशा की वजह से वे सारे नियमों को तोड़ रहे हैं।

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- फोटो : अमर उजाला

मास्क खरीदने तक के नहीं हैं पैसे, जो है उसी से ढक लेते हैं चेहरा
सेक्टर-45 के लेबर चौक पर खड़े मजदूर शिवपूजन ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से रोजगार बहुत ही कम हो गया है। लॉकडाउन से पहले जिन लोगों के काम रुके थे, वही लोग काम पूरा करने के लिए मजदूर लेने आ रहे हैं। कोई नया काम शुरू नहीं हो रहा है। यहां खड़े हर लेबर को काम की जरूरत है ताकि रोजी-रोटी का जुगाड़ हो सके। ऐसे में किसी भी गाड़ी वाले को देखकर लोग झुंड बनाकर खड़े हो जाते हैं और इसी जुगत में लग जाते हैं कि उनकी बात बन जाए। 

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