भारतीय टेस्ट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज पर हाल के वर्षों में गेंदबाजी आक्रमण का बड़ा दारोमदार रहा है। आंकड़े इस बात को साफ तौर पर दिखाते हैं कि जब सिराज ने अच्छा प्रदर्शन किया है, टीम इंडिया को जीत मिली है, लेकिन जब उनका असर फीका रहा, नतीजे अक्सर निराशाजनक रहे।
Test: क्या सिराज पर बहुत ज्यादा निर्भर है भारत? उनके अच्छे प्रदर्शन से मिलती ही जीत, फेल हुए तो होता है नुकसान
इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में वह दोनों टीमों में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उन्होंने कुल 185.3 ओवर (1113 गेंदें) फेंकी, औसतन 32.43 की दर से विकेट लिए।
जीते हुए टेस्ट में सिराज का जबरदस्त योगदान
सिराज ने अब तक 41 टेस्ट खेले हैं, जिनमें 22 मुकाबले भारत ने जीते, 14 हारे और 5 ड्रॉ रहे। जीत वाले मैचों में सिराज ने 76 विकेट अपने नाम किए हैं, वह भी सिर्फ 22.3 की औसत से, जो किसी भी तेज गेंदबाज के लिए शानदार आंकड़ा है। इन जीतों में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन छह विकेट पर 15 रन रहा है और चार बार उन्होंने पारी में पांच विकेट झटके हैं।
इसके उलट, हार वाले मैचों में उनका औसत 46.2 तक पहुंच जाता है और 14 टेस्ट में उन्हें सिर्फ 32 विकेट मिलते हैं। इस दौरान उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 4/66 रहा है और कोई भी पांच विकेट का कारनामा नहीं आया। ड्रॉ हुए मैचों में भी उनका औसत (43.1) जीत की तुलना में काफी ऊंचा है, हालांकि यहां उन्होंने 5/60 का बेस्ट दिया है और एक बार पारी में पांच विकेट लिए हैं।
इंग्लैंड दौरे पर सिराज ने 23 विकेट लिए और चमके
इंग्लैंड के खिलाफ हालिया सीरीज ने भी यह पैटर्न दोहराया। इंग्लैंड दौरे पर सिराज ने कई मौकों पर भारतीय टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। खासतौर पर एजबेस्टन और ओवल टेस्ट में उनकी गेंदबाजी ने मेजबानों की पारी को जल्दी समेटने में अहम भूमिका निभाई। सीरीज के दौरान उन्होंने कुल मिलाकर 23 विकेट हासिल किए, जो इस बात का सबूत है कि टीम की जीत की संभावनाओं में उनका योगदान कितना अहम है।
इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में वह दोनों टीमों में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उन्होंने कुल 185.3 ओवर (1113 गेंदें) फेंकी, औसतन 32.43 की दर से विकेट लिए। खास तौर पर ओवल में अंतिम टेस्ट में उनका प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा। उन्होंने उस मैच में नौ विकेट लिए, जिससे भारत ने सिर्फ छह रन से जीत दर्ज करते हुए सीरीज ड्रॉ कर ली। इसी अद्भुत खेल के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया और आईसीसी टेस्ट गेंदबाजों की रैंकिंग में अब वह 15वें स्थान पर आ गए हैं।
तो क्या सिराज पर भारत की जरूरत ज्यादा निर्भर हो गई है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि सिराज की गेंदबाजी में आक्रामकता और नई गेंद से स्विंग कराने की क्षमता भारत के लिए बड़ा हथियार है, लेकिन इसी के साथ यह चिंता भी बढ़ रही है कि टीम कहीं उन पर जरूरत से ज्यादा निर्भर तो नहीं हो गई। जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी जैसे सीनियर गेंदबाजों की गैरमौजूदगी या चोट के कारण बाहर रहने की स्थिति में, सिराज को मुख्य आक्रमण की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।
अगर भारत को लगातार सफलता चाहिए, तो गेंदबाजी में संतुलन लाना जरूरी है, ताकि एक खिलाड़ी के ऑफ-डे पर भी टीम का प्रदर्शन प्रभावित न हो। इंग्लैंड सीरीज ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सिराज की लय में भारत जीत की ओर बढ़ता है, लेकिन उनके फ्लॉप होने पर मैच हाथ से निकल सकता है।
इंग्लैंड सीरीज के निर्णायक ओवल टेस्ट में मोहम्मद सिराज की जबरदस्त गेंदबाजी ने वसीम अकरम का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि सिराज अब सिर्फ बुमराह का सहायक गेंदबाज नहीं हैं, बल्कि आक्रमण के नेतृत्वकर्ता बन चुके हैं। अकरम ने विशेष रूप से उनकी जीवटता, मानसिक मजबूती और जुनून की तारीफ की। यह देखकर कि सिराज ने लगभग 186 ओवरों की और थकाऊ सीरीज के बाद भी अंतिम दिन ऊर्जा और आक्रामकता को बरकरार रखा, अकरम ने कहा कि ओवल टेस्ट के आखिरी दिन वह टीवी से चिपके रहे। ओवल टेस्ट के आखिरी दिन इंग्लैंड को सिर्फ 35 रन चाहिए थे, जबकि भारत को जीत के लिए चार विकेट की दरकार थी। सिराज ने तीन अहम विकेट लेकर मैच भारत की झोली में डाल दिया।
अकरम ने कहा कि कैच छूटने जैसी स्थिति के बावजूद सिराज ने ध्यान नहीं खोया और यही एक सच्चे योद्धा की निशानी है। साथ ही उन्होंने बुमराह को अंतिम टेस्ट से आराम देना भी सराहनीय ठहराया। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के पास गहराई है और उन्होंने समझदारी भरा फैसला लिया। यह रणनीति एशिया कप और टी20 विश्व कप जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं के मद्देनजर बहुत मायने रखती है।