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Agnipath Protest: अग्निपथ को लेकर उबाल, हरिद्वार में जुटे देशभर के किसान, राकेश टिकैत के नेतृत्व में निकाला पैदल मार्च

Sun, 19 Jun 2022 01:43 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 19 Jun 2022 01:43 PM IST
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Agnipath Protest, Farmers from across the country gathered in Haridwar, foot march taken out under leadership of Rakesh Tikait
अग्निपथ के विरोध में किसानों का हरिद्वार में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
भारतीय किसान यूनियन टिकैत के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में देशभर से आए किसानों ने केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में पैदल मार्च निकाला। मार्च के दौरान कुछ किसानों ने काली पट्टी बांधी थी तो कुछ ने काली टी शर्ट पहनी थी। किसानों ने योजना को वापस लेने और युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की मांग उठाई।

 
मालूम हो कि हरिद्वार में भाकियू टिकैत का किसान महाकुंभ (चिंतन शिविर) का शनिवार को अंतिम दिन था। किसानों ने अग्निपथ योजना के विरोध में पैदल मार्च निकालने का एलान किया था। शनिवार को लालकोठी से किसानों ने काली पट्टी बांधकर पैदल मार्च की शुरुआत की। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसान यहां से होते हुए हरिद्वार-दिल्ली हाईवे पर पहुंचे।

जहां से वीआईपी घाट पहुंचकर बैराज पुल, गंगा घाट किनारे, सीसीआर होकर रोड़ी बेलवाला मैदान में मार्च खत्म हुआ। इस मौके पर किसानों को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि विधायक, सांसद पूरी जिंदगी चुनाव लड़ेंगे और सभी सुविधाओं का लाभ लेंगे। लेकिन, युवा केवल चार ही साल सेना में नौकरी करेंगे। ये कहां का इंसाफ है। अग्निपथ योजना युवाओं के हित में नहीं है। सरकार को इसे हर हाल में वापस लेना होगा।
 
Agnipath Protest, Farmers from across the country gathered in Haridwar, foot march taken out under leadership of Rakesh Tikait
अग्निपथ के विरोध में किसानों का हरिद्वार में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने कहा कि योजना जब तक वापस नहीं ली जाती, तब तक युवाओं को सरकार की ओर से बेरोजगारी भत्ता दिया जाए। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि आंदोलन करें, लेकिन हिंसा नहीं। शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर अपनी मांग उठाएं। पैदल मार्च के दौरान हाईवे पर यातायात व्यवस्था सुचारु रहे, इसके लिए किसानों के काफिले को वीआईपी घाट से बैराज पुल के रास्ते भेजा गया। पुलिस बल मार्च निकलने तक पूरी तरह मुस्तैद रहा। यातायात पुलिस के साथ ही सीपीयू कर्मियों ने व्यवस्था संभाले रखी। 

Agnipath Protest, Farmers from across the country gathered in Haridwar, foot march taken out under leadership of Rakesh Tikait
अग्निपथ के विरोध में किसानों का हरिद्वार में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

अग्निपथ के विरोध के बाद भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के तीन दिवसीय किसान महाकुंभ (चिंतन शिविर) में अंतिम दिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गारंटी कानून की मांग के साथ 21 प्रस्ताव पारित किए गए। किसानों ने 21 प्रस्तावों का ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा। शनिवार को बारिश के चलते एक घंटे से भी कम समय में महाकुंभ को संपन्न करना पड़ा। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) का किसान महाकुंभ बृहस्पतिवार को वीआईपी घाट पर शुरू हुआ था।

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Agnipath Protest, Farmers from across the country gathered in Haridwar, foot march taken out under leadership of Rakesh Tikait
अग्निपथ के विरोध में किसानों का हरिद्वार में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

शनिवार को अंतिम दिन किसानों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन पिछले 36 सालों से देश-दुनिया के खेती-किसानी के मुद्दे पर आंदोलनरत है। 13 महीने तक दिल्ली बॉर्डर पर चलने वाला दुनिया का सबसे लंबा और विशाल किसान आंदोलन इस बात का सबूत है कि किसान अपनी मांगों को लेकर पहले की तुलना में और ज्यादा सचेत व सजग हुआ है। उन्होंने कहा कि फसलों का सही दाम न मिलने से किसान दुखी हैं। तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के बाद अब किसान एमएसपी गारंटी कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार की बाट जोह रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एमएसपी कमेटी पर बने गतिरोध को तोड़ते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के साथ वार्ता कर सार्थक पहल करें।

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Agnipath Protest, Farmers from across the country gathered in Haridwar, foot march taken out under leadership of Rakesh Tikait
अग्निपथ के विरोध में किसानों का हरिद्वार में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

इन 21 प्रस्तावों को किसान भाकियू ने किया पारित 

  • फसलों के उचित लाभकारी मूल्य के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू 
  •  एमएसपी गारंटी कानून बनाने के मामले में केंद्र सरकार की ओर से जल्द से जल्द कमेटी बने और गतिरोध को तोड़कर एसकेएम प्रतिनिधियों से वार्ता करे।
  • 23 फसलें एमएसपी में शामिल हैं। वो भारत की कुल फसल का एक तिहाई भी नहीं है। बाकी बची फसलों को भी एमएसपी के अंतर्गत लाया जाए। नगदी फसलों के लिए सरकार किसानों को उपयुक्त बाजार भी मुहैया कराए। 
  • देश में एक अलग से किसान आयोग का गठन किया जाए। उसमें देशभर के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
  • केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना से चार साल बाद भर्ती युवा बेरोजगार होंगे। ये न देश हित में है न समाज हित में। ऐसे में या तो केंद्र सरकार ऐसे युवाओं को चार साल बाद रोजगार की गारंटी दे या बेरोजगारी भत्ता।
  • एनजीटी के नियमों में किसानों के लिए ढील देने का काम किया जाए। कृषि में काम आने वाले यंत्रों व साधनों को लेकर विशेष योजना के अंतर्गत समय सीमा में छूट देने का प्रावधान किया जाए। प्राइवेट और कामर्शियल वाहनों को चाहे वह किसान के ही क्यों न हो, अलग-अलग वर्गों में विभाजित कर किलोमीटर के हिसाब से उनकी मियाद की गारंटी को निर्धारित किया जाए।
  • किसानों को आवारा पशुओं से निजात दिलाई जाए। छोड़े गए पशुओं से फसलों की सुरक्षा के साथ ही नुकसान होने पर सरकार इसकी भरपाई करे।
  • पहाड़ी राज्यों में पहाड़ी कृषि नीति के तहत स्थानीय संसाधनों और बाजार व्यवस्था को मजबूत करने का काम किया जाए। वहां के बाशिंदों को ट्रांसपोर्ट सब्सिडी मिले। विलेज टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाए। प्रदूषणरहित उद्योगों को बढ़ावा और हिल अलाउंस की व्यवस्था हो। चकबंदी कर किसानों को राहत दी जाए।
  • खेती को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से अलग किया जाए। खेती व्यापार नहीं है यह भारत की जीवन पद्धति का एक हिस्सा है। इसे व्यापार की वस्तु न बनाया जाए। 
  • युद्ध के कारण गेहूं, उर्वरक और अन्य उत्पादों की किल्लत झेल रहे देशों पर से दबाव कम करना जरूरी है। इसके लिए डब्ल्यूटीओ को खाद्य पदार्थों पर निर्यात पाबंदियों में ढील देनी चाहिए। 
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