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उत्तराखंड में हुआ ऐतिहासिक 'पत्थर युद्ध', इंसानी बलि के बराबर रक्त लेने पर हुआ बंद

Fri, 19 Aug 2016 11:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देवीधुरा (चंपावत)
ब्यूरो/अमर उजाला, देवीधुरा (चंपावत) Updated Fri, 19 Aug 2016 11:34 PM IST
bagwal stone war held in uttarakhand.
bagwal war - फोटो : AmarUjala

देवीधुरा के खोलीखांड दूबाचौड़ा मैदान में बृहस्पतिवार को बारिश के बीच ऐतिहासिक बग्वाल हुई। अपरान्ह 2.17 बजे मंदिर के पंडित कीर्ति बल्लभ शास्त्री और भुवन जोशी की शंखध्वनि के साथ बग्वाल का श्रीगणेश हुआ। बग्वाल महज 7 मिनट चली।

bagwal stone war held in uttarakhand.
bagwal war - फोटो : AmarUjala

यह बग्वाल के न्यूनतम समय का रिकॉर्ड है। इससे पहले 2008 में बग्वाल करीब 8 मिनट तक खेली गई थी। इस रोमांचित करने वाले खूनी युद्ध में 59 बग्वाली वीर सहित कुल 70 लोग चोटिल हुए।

bagwal war

bagwal stone war held in uttarakhand.
bagwal war - फोटो : AmarUjala

पहली बार अलग-अलग रंग के साफे के साथ सजे-धजे बग्वाली वीरों का रंग-रूप देखते ही बनता था। करीब एक लाख लोग बग्वाल के विहंगम नजारे के साक्षी बने।

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bagwal stone war held in uttarakhand.
bagwal war - फोटो : AmarUjala

एक लाख से अधिक लोग खोलीखांड दूबचौड़ा मैदान में खूनी युद्ध के साक्षी बने। एक मानव के रक्त के बराबर खून बहने का एहसास होने पर बग्वाल पर लगता है विराम।

bagwal stone war held in uttarakhand.
bagwal war - फोटो : AmarUjala

मैदान में प्रवेश करने से पहले सभी चारों खामों के योद्धाओं ने मां वज्र बाराही का जयकारा किया। सबसे पहले वालिक खाम के बग्वाली वीरों ने मुखिया बद्री सिंह (60) के नेतृत्व में रणक्षेत्र में दस्तक दी।

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