जिस तरह देश के विभिन्न राज्यों में म्यूटेट कर रहा कोरोना वायरस पहले से ज्यादा खतरनाक हो रहा है, ऐसे में हर साल नई वैक्सीन ईजाद करनी पड़ेगी। यह कहना है कि दवा के निर्माण पर शोध कर रहीं वायरोलॉजिस्ट एवं आईआईटी की वैज्ञानिक डॉ. शैली तोमर का। आईआईटी के बायोटेक डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. तोमर इन दिनों डिपार्टमेंट ऑफ साइंस टेक्नोलॉजी, भारत सरकार की ओर से मिले कोरोना के खिलाफ दवा बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। स्ट्रक्चरल बेस्ड एंटी वायरल ड्रग डिस्कवरी शीर्षक के इस प्रोजेक्ट के तहत ड्रग के मोलिक्यूल खोज लिए गए हैं। जो दवा के रूप में कोरोना को मात देंगे। डॉ. तोमर के अनुसार, जिस तरह से कोरोना वायरस अपना स्वरूप बदल रहा है, उससे यह साफ है कि वैक्सीन के साथ वायरस को बेअसर करने वाली दवाओं की भी जरूरत पड़ेगी। म्यूटेशन के चलते हो सकता है हर साल नई वैक्सीन बनानी पड़े, लेकिन एक बार दवा बनाने के बाद उसमें करीब तीन साल बाद परिवर्तन किए जाने की अमूमन आवश्यकता होती है। दवा एक बार बेअसर होने लगती है तो ओएच जैसे ग्रुप की मात्रा बढ़ाकर उसे कारगर किया जाता है।
कोरोना : आईआईटी के वैज्ञानिक तैयार कर रहे कोरोना की दवा, दावा- वैक्सीन की उपयोगिता के बीच होगी ज्यादा कारगर
अंकित कुमार गर्ग, अमर उजाला, रुड़की
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 27 Mar 2021 02:52 PM IST
सार
- वायरोलॉजिस्ट डॉ. शैली तोमर का दावा- वैक्सीन की उपयोगिता के बीच ज्यादा कारगर होगी दवा
- कोरोना के विरोधी मोलिक्यूल तलाश कर किया जा रहा परीक्षण, डेढ़ महीने में आ सकते हैं परिणाम
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