आज देशभर में देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन से शुभ कार्य प्रारंभ होंगे। तो चलिए जानते हैं कि इस दिन तुलसी से शालिग्राम का विवाह क्यों किया जाता है और वे कौन थीं।
देवउठनी एकादशी 2017: जानिए कौन थी तुलसी और क्यों किया जाता है शालिग्राम से उनका विवाह
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देवउठनी एकादशी को प्रबोधनी एकादशी भी कहा जाता है। ये कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें दिन आती है। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव शयनी एकादशी कहते है और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव उठनी एकादशी कहते है। देव शयनी एकादशी से देव उठनी एकादशी तक यानी चार महीने भगवान विष्णु शयनकाल की अवस्था में होते है। और इस दौरान कोई शुभ कार्य जैसे शादी, गृह प्रवेश या कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है।
इस वर्ष ये शुभ दिन 31 अक्टूबर 2017 यानि मंगलवार को है। इस दिन दिवाली की तरह लोग दीपक जलाते हैं और सभी देवी-देवताओं को प्रसन्न करते हैं। जिससे उनके घर में हमेशा कृपा बनी रहे और उनके घर इसी तरह दीए की रौशनी से रौनक रहें। एक पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान श्रीविष्णु ने भाद्रपद महीने की शुक्ल एकादशी को महापराक्रमी शंखासुर नामक राक्षस को लम्बे युद्ध के बाद समाप्त किया था और थकावट दूर करने के लिए क्षीरसागर में जाकर सो गए थे और चार महीने बाद फिर जब वे उठे तो वह दिन देवोत्थनी एकादशी कहलाया।
ज्योतिषचार्य पंडित राम भूषण ने बताया कि इस दिन व्रत करने का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजा करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और मृत्युोपरांत विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। इसी के साथ इस एकादशी से पहले गंगास्नान करना शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन लोग दीप जलाकर उत्सव मनाते हैं।
मान्यता के अनुसार तुलसी एक लड़की थी। जिसका नाम वृंदा था। वह राक्षस कुल में जन्मी थी। सदा अपने पति की सेवा किया करती थी। एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ। तब वृंदा ने जलंधर से कहा कि जब तक आप युद्ध से आएंगे तो मैं पूजा में बैठी रहूंगी।