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ठंड से ठिठुर रहे बच्चों के लिए मसीहा बने ये डीएम, पढ़ेंगे इनकी कहानी तो करेंगे सैल्यूट

Thu, 13 Dec 2018 10:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Thu, 13 Dec 2018 10:01 AM IST
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dm mangesh and his wife left luxury life for children education
mangesh ghildiyal

पहाड़ों पर इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। ऐसे में स्कूली बच्चों को ठंड से बचाने के लिए डीमए मंगेश घिल्डियाल ने अपने वेतन से गर्म ट्रैकसूट वितरित किए। रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय धारकोट सहित राजकीय हाईस्कूल व प्राथमिक विद्यालय कुरझण में 77 छात्र-छात्राओं को गर्म कपड़े वितरित किए।




 

dm mangesh and his wife left luxury life for children education
बागेश्वर में अपराध समीक्षा बैठक लेते डीएम मंगेश घिल्डियाल। - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने स्कूली बच्चों को लक्ष्य निर्धारित कर पढ़ाई का आह्वान भी किया। इस दौरान उन्होंने स्कूलों में छात्र-छात्राओं को गणित व अन्य विषयों को पढ़ाते हुए सवाल भी पूछे। इतना ही नहीं मंगेश घिल्डियाल की पत्नी ऊषा घिल्डियाल अपने आप में एक मिसाल हैं। कभी दोनों सरकारी स्कूलों के बच्चों को पढ़ाते दिख जाते हैं तो कभी उनसे संवाद करते। 

dm mangesh and his wife left luxury life for children education
dm mangesh ghildiyal and usha
ऊषा घिल्डियाल रोज कई घंटे स्कूल में नियमित छात्राओं को पढ़ाती हैं। यहीं नहीं वह समय-समय पर छात्राओं के बीच किसी ज्वलंत विषय, मसलन साफ-सफाई, पर्यावरण, दहेज, बालिका शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा, पलायन, जल, जंगल और जमीन जैसे विषयों पर वाद-विवाद भी करवाती हैं।
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dm mangesh and his wife left luxury life for children education
usha ghildiyal
वह छात्राओं को सेना, मेडिकल, बैंक, सिविल सर्विस व इंजीनियरंग की तैयारी के लिए टिप्स भी दे रही हैं। साथ ही उन्हें सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने के लिए भी प्रेरित करती हैं। 
 
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usha ghildiyal
ऊषा गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर में सीनियर वैज्ञानिक रह चुकी हैं। लेकिन, अब वह नौकरी छोड़कर रुद्रप्रयाग जिले में शिक्षा की बेहतरी के लिए कार्य कर रही हैं। एक वर्ष पूर्व जब उन्हें पता चला कि राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में अंग्रेजी की शिक्षक नहीं हैं तो उन्होंने स्वयं छात्राओं को पढ़ाने का निर्णय लिया। 
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