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रिसर्च में खुलासा: धरती के सबसे बड़ी जीव का कद हो रहा छोटा

Sat, 10 Dec 2016 03:03 PM IST
अमरनाथ/अमर उजाला, हल्द्वानी
अमरनाथ/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Sat, 10 Dec 2016 03:03 PM IST
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elephant physique going smaller.
elephant - फोटो : AmarUjala

एलीफैंट कॉरिडोरों में अतिक्रमण होने और प्राकृतिक आवास छिन जाने की वजह से धरती सबसे बड़े जीव हाथियों के डीलडौल में कमी आ रही है। सेहत पर असर पड़ने से धीरे-धीरे उनका कद छोटा हो रहा है। लंदन स्थित इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन फॉर एलीफेंट से 20 साल तक जुड़े रहे डॉ. अजय रावत के मुताबिक हाथियों के जीवन और व्यवहार में काफी बदलाव आए हैं।


 

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elephant - फोटो : AmarUjala

पर्यावरणविद डॉ. अजय रावत ने हाथियों पर लंबे समय तक अध्ययन करने के बाद पाया है कि हल्द्वानी में गौला पार, हाथीखाल और कालाढूंगी के एलीफेंट कॉरिडोरों में अतिक्रमण होने से कुमाऊं के हाथियों के डीलडौल में फर्क आ रहा है।

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elephant - फोटो : AmarUjala

प्राकृतिक आवास छिन जाने से वे हिंसक हो रहे हैं और जंगल से ग्रामीण क्षेत्रों में आकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पर्याप्त भोजन नहीं मिलने से हाथियों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और उनकी जीवनशैली बदल रही है। उनका आकार और वजन कम हो रहा है।

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elephant - फोटो : AmarUjala

डॉ. रावत ने बताया कि हाथी चिंघाड़ने के साथ-साथ 70 तरह की ध्वनियां निकालकर आपस में बातें करते हैं। सूंड हिलाने, छूने से लेकर करीब 160 तरह के इशारों से अपनी बात समूह के दूसरे हाथियों से करता है।

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elephant

जंगल में हाथियों का समूह सात-आठ दिनों में जहां भी पड़ाव डालता है, वहां काफी मात्रा में मूत्र करता है। मूत्र सूखने के बाद काफी मात्रा में अन्य जानवरों को नमक मिल जाता है और वे चाटकर नमक की कमी पूरा करते हैं।

उत्तराखंड में बढ़ रहा हाथियों का कुनबा
2015 में हुई गणना के मुताबिक उत्तराखंड में 1797 हाथी हैं।
2012 की गणना के मुताबिक 1559 थी हाथियों की संख्या।

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