एलीफैंट कॉरिडोरों में अतिक्रमण होने और प्राकृतिक आवास छिन जाने की वजह से धरती सबसे बड़े जीव हाथियों के डीलडौल में कमी आ रही है। सेहत पर असर पड़ने से धीरे-धीरे उनका कद छोटा हो रहा है। लंदन स्थित इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन फॉर एलीफेंट से 20 साल तक जुड़े रहे डॉ. अजय रावत के मुताबिक हाथियों के जीवन और व्यवहार में काफी बदलाव आए हैं।
रिसर्च में खुलासा: धरती के सबसे बड़ी जीव का कद हो रहा छोटा
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पर्यावरणविद डॉ. अजय रावत ने हाथियों पर लंबे समय तक अध्ययन करने के बाद पाया है कि हल्द्वानी में गौला पार, हाथीखाल और कालाढूंगी के एलीफेंट कॉरिडोरों में अतिक्रमण होने से कुमाऊं के हाथियों के डीलडौल में फर्क आ रहा है।
प्राकृतिक आवास छिन जाने से वे हिंसक हो रहे हैं और जंगल से ग्रामीण क्षेत्रों में आकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पर्याप्त भोजन नहीं मिलने से हाथियों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और उनकी जीवनशैली बदल रही है। उनका आकार और वजन कम हो रहा है।
डॉ. रावत ने बताया कि हाथी चिंघाड़ने के साथ-साथ 70 तरह की ध्वनियां निकालकर आपस में बातें करते हैं। सूंड हिलाने, छूने से लेकर करीब 160 तरह के इशारों से अपनी बात समूह के दूसरे हाथियों से करता है।
जंगल में हाथियों का समूह सात-आठ दिनों में जहां भी पड़ाव डालता है, वहां काफी मात्रा में मूत्र करता है। मूत्र सूखने के बाद काफी मात्रा में अन्य जानवरों को नमक मिल जाता है और वे चाटकर नमक की कमी पूरा करते हैं।
उत्तराखंड में बढ़ रहा हाथियों का कुनबा
2015 में हुई गणना के मुताबिक उत्तराखंड में 1797 हाथी हैं।
2012 की गणना के मुताबिक 1559 थी हाथियों की संख्या।