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गणेश चतुर्थी 2018: 120 साल बाद बन रहा खास योग, मूर्ति स्थापना कर पूजन करने से मिलेगा सौभाग्य
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ऋद्धि-सिद्धि के दाता गणेश चतुर्थी उत्सव 13 से 23 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस बार खास बात यह है कि 13 सितंबर को ही गुरु स्वाति योग भी बन रहा है। ज्योतिष शास्त्रियों के मुताबिक यह अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग करीब 120 वर्ष के बाद बनने जा रहा है।
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ज्योतिषाचार्य पीयूष भटनागर और संदीप भारद्वाज शास्त्री के अनुसार, इस दिन श्रीगणेश की मूर्ति को प्रतिष्ठापित करना अति शुभ है। इस योग में घर में बने मंदिर में भी मूर्ति स्थापित करना शुभ माना जाता है। इस दिन बृहस्पतिवार होने से यह देवताओं के गुरु का दिन है। इसलिए इस नक्षत्र और वार में ऋद्घि सिद्धि के दाता भगवान श्रीगणेश की स्थापना करने से घर परिवार में सुख समृद्धि का वास होता है।
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उन्होंने बताया कि शुभ नक्षत्र में श्रीगणेश का आगमन सर्वत्र शुभ फल प्रदाता माना गया है। भाद्रपद मास की चतुर्थी पर इस प्रकार का संयोग करीब 120 वर्षों बाद बना है। उन्होंने बताया कि चतुर्थी तिथि के देवता भगवान गणेश हैं, जो ऋद्घि सिद्धि प्रदान करते हैं। बृहस्पति जिन्हें ज्ञान का प्रदाता माना गया है।
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वायु देवता जोमनुष्य में पंच प्राण को संतुलित रखते हैं। इस दृष्टि से ज्ञान बुद्धि का संतुलन कार्य में सिद्धि प्रदान करता है। वहीं, गुरु स्वाति योग में 10 दिवसीय गणेशोत्सव में विधिवत पूजा मनोवांछित फल प्रदान करने वाला रहेगा।
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पंडित राजेश शर्मा ने बताया कि वैदिक पंचांगों के मुताबिक चतुर्थी तिथि के दिन गुरु स्वाति संयोग होने से श्रीगणेश मूर्ति की स्थापना सुख समृद्धि के साथ सर्व सिद्धिदायक भी होती है। इस बारे में प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी अरविंद शर्मा का कहना है कि 27 नक्षत्रों में स्वाति नक्षत्र का स्थान 15वां है। इसे शुभ और कार्य सिद्ध नक्षत्र माना गया है। इस नक्षत्र के अधिपति देवता वायुदेव होते हैं। इस नक्षत्र के चारों चरण तुला राशि के अंतर्गत आते हैं, जिसका स्वामी शुक्र है। शुक्र धन, संपदा, भौतिक वस्तुओं और हीरे का प्रतिनिधि ग्रह है।
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